Nalanda :राजगीर में अस्पताल के साथ क्रिटिकल केयर यूनिट के निर्माण के प्रस्ताव को मिली मंजूरी
खबर सार :-
नए अस्पताल के लिए भवन का स्थानांतरण किया जाना है। इसमें कई रोड़े हैैं। डीएम को इसकी जिम्मेदारी दी कई हैै। यद्यपि काम तो अच्छा होना है, लेेकिन बड़ा पेच डीएम कैसे निपटाएंगे। जिलाधिकारी से 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है। सबसे पड़ा पेच किराया का है। यह भी डीएम को ही लेना है।
खबर विस्तार : -
नालंदा, बिहारशरीफ, प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजगीर में प्रस्तावित 99 बेड से ज्यादा के अस्पताल और 49 से ज्यादा बेड के क्रिटिकल केयर यूनिट के निर्माण का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। इससे गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर दूसरे शहरों में जाने की मजबूरी कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने और अस्पताल के संचालन की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर
नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार की पहल पर राजगीर में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इनमे स्वास्थ्य विभाग भी सराहनीय योगदान कर रहा है। राजगीर स्थित क्षेत्र प्रदर्शन केंद्र (फील्ड डेमोन्स्ट्रेशन सेंटर) के भवन और परिसर को पूरी तरह से खाली करा दिया जा रहा है। यह नालंदा विश्वविद्यालय की जमीन थी। स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया के आदेश मिलने के बाद इस दिशा में काम तेज हो गया है।
पर्यटन और रोजगार पर भी पड़ेगा इसका असर
बताया जा रहा है कि इस परिसर में 99 बेड से ज्यादा का अस्पताल बनाया जाएगा। अस्पताल के साथ 49 से ज्यादा बेड के क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) के निर्माण का प्रस्ताव किया गया है। राजगीर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। पर्यटकों तथा खिलाड़ियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। राजगीर में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास समय की जरूरत है।
वर्तमान में कई स्थानो पर विभिन्न कारणों से स्वास्थ्य सेवाएं चकनाचूर रहती हैं। यहां आसपास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, पर्यटन स्थल हैं। इससे अन्य विकास परियोजनाओं को गति मिल रही है। इस कारण क्षेत्र में चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी हो गया है। यहां स्थायीय से ज्यादा विदेशी मेहमान रह सकते हैं।
सांसद ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पत्र लिखा था
सांसद ने 3 जून को स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पत्र लिखा था। इस मांग को लेकर कई बार प्रदर्शन भी किए गए हैं। क्षेत्र प्रदर्शन केंद्र की जमीन और भवन को वापस लिया जाएगा। इस जमीन पर अस्पताल निर्माण कराने का अनुरोध किया था। विभागीय अधिकारियों ने समस्या को ध्यान दिया और प्रयास किया यदि मांग मान लेने के विकल्प हैं तो उनको कोई ऐतराज नहीं है। बहरहाल, जनप्रतिनिधियों ने अपने पत्र में बताया था कि वर्तमान अनुमंडलीय अस्पताल का भवन जर्जर स्थिति में है।
वहीं, परिसर में पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण नए अस्पताल का निर्माण शुरू करने में कठिनाई हो रही है। अधिकारियों के अलावा सभी को यह समझ में आ गया कि अस्पताल को जमीन चाहिए। बिना जमीन के इमारत कैसे बन सकती है। यदि बहुमंजिला बना भी दिया जाए, तो कर्मचारियों के रहने, डाक्टरों के रहने, कैंटीन और पाकिं कहां बनाई जाएगी, जबकि अस्पताल में एंबुलेंस और अन्य गाड़यां भी होती हैं।
डीएम के पास नवनिर्माण की सूचना पहुंच चुकी
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव कुमार रवि ने आज सोमवार को नालंदा के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर नालंदा विश्वविद्यालय के साथ समन्वय स्थापित करते हुए एक महीने के भीतर भवन और परिसर खाली कराने का निर्देश दिया है। यानी यह स्पष्ट हो गया कि डीएम के पास नवनिर्माण की सूचना पहुंच चुकी है। संयुक्त निरीक्षण के बाद भवन को सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, नालंदा को हस्तांतरित किया जाएगा।
कुल जमीन, उसके कागज आदि पूरा डिटेल लेकर उच्चाधिकारियों तक पहुंचना है। विभागीय का एक पत्र भी महत्वपूर्ण है, इसमें वर्ष 2011 में नालंदा विश्वविद्यालय को कार्यालय संचालन के लिए भवन के निचले तल के उपयोग की अनुमति दी गई थी। विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 19 जून 2024 को हो चुका है। पुराना भवन अब तक खाली नहीं किया गया है। 7 सितंबर 2015 को केवल 5,77,125 रुपये का भुगतान किया गया था।
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