भाषा विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बांटे मेडल, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय बोले- 'डिग्री नहीं, राष्ट्र सेवा है शिक्षा'

खबर सार :-

लखनऊ के ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह में 1246 छात्रों को उपाधियां और 125 को पदक मिले, जिसमें बेटियों ने बाजी मारी।
भाषा विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बांटे मेडल, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय बोले- 'डिग्री नहीं, राष्ट्र सेवा है शिक्षा'

खबर विस्तार : -

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) स्थित ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में बुधवार को Language University Convocation Lucknow का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय का यह 11वां दीक्षांत समारोह प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की गरिमामयी अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस खास मौके पर कुल 1,246 छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपाधियां सौंपी गईं, जबकि 125 होनहार विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया गया। इस दीक्षांत समारोह (Convocation Ceremony) में एक बार फिर बेटियों की प्रतिभा का डंका बजा। कुल 125 पदकों में से 74 पदक छात्राओं की झोली में गए, जबकि 51 पदकों पर छात्रों ने अपना नाम दर्ज कराया। यह आंकड़े साफ तौर पर बदलते समाज में बेटियों की बढ़ती हिस्सेदारी और उनकी कड़ी मेहनत को बयां करते हैं। इसके साथ ही, आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी डिग्रियां और अंकपत्र डिजिटल लॉकर पर भी अपलोड कर दिए हैं, ताकि छात्रों को भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सामाजिक सरोकार की अनूठी मिसाल

कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से Language University Convocation Lucknow सिर्फ डिग्रियां बांटने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सामाजिक सरोकारों की भी एक सुंदर झलक देखने को मिली। समारोह के दौरान औरैया जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों की मदद के लिए 250 विशेष आंगनबाड़ी किट वितरित की गईं। इसके साथ ही महिलाओं और स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 300 बेटियों का एचपीवी (HPV) टीकाकरण भी कराया गया।

माता-पिता और गुरुओं का संघर्ष ही सफलता की नींव: योगेंद्र उपाध्याय

समारोह के मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने सभी सफल छात्रों और मेडल विजेताओं को बधाई देते हुए जीवन के कई जरूरी सूत्र सिखाए। उन्होंने अपने संबोधन में भावुक होते हुए कहा कि आज युवा जिस मुकाम पर खड़े हैं, उसके पीछे उनके माता-पिता का असीम त्याग, प्यार और अनगिनत खुशियों का बलिदान छिपा है। उन्होंने कहा कि हमारे संस्कार हमें सिखाते हैं कि माता, पिता और गुरु का स्थान भगवान से भी ऊपर है। मेडल पाने वाले छात्रों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों ने ज्यादा मेहनत की, उन्हें पदक मिला है। अब समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है और उन्हें दूसरों के लिए एक रोल मॉडल की भूमिका निभानी होगी। वहीं, जो छात्र इस बार पदक पाने से चूक गए, उनका हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि असफलता से निराश होने की जरूरत नहीं है। निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है। जीवन में कभी भी हताश नहीं होना चाहिए, क्योंकि कुछ सपनों के टूटने से जिंदगी की रफ्तार नहीं रुकती।

शिक्षा एक जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया

उच्च शिक्षा मंत्री ने युवाओं को समझाते हुए कहा कि Language University Convocation Lucknow आपकी औपचारिक शिक्षा का पड़ाव हो सकता है, लेकिन आपके सीखने की प्रक्रिया का अंत नहीं है। इंसान पूरी जिंदगी अपने आस-पास के माहौल, घटनाओं, लोगों और यहाँ तक कि पशु-पक्षियों से भी कुछ न कुछ सीखता रहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली शिक्षा केवल कागज की एक डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि देश और समाज की सेवा के लिए खुद को समर्पित करने का एक मजबूत संकल्प है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यूपी ने रचे नए कीर्तिमान

प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आए बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के नेतृत्व की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के हालात बहुत बेहतर नहीं थे, लेकिन राज्यपाल महोदया के कड़े परिश्रम और मार्गदर्शन ने पूरी तस्वीर बदल दी है। वह विश्वविद्यालयों को बेहतर बनाने के लिए खुद आठ से दस घंटे तक बैठकें करती हैं। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश देश में सबसे बेहतरीन शैक्षणिक ग्रेडिंग वाले राज्यों की सूची में सबसे आगे आ खड़ा हुआ है। मौजूदा समय में यूपी के विश्वविद्यालय नैक (NAAC) की ए++ (A++) रैंकिंग से लेकर यूजीसी के ग्रेड-1 की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा राज्य के कई शिक्षण संस्थान क्यूएस (QS) वर्ल्ड और एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भी अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के स्तर को इस ऊंचाई पर ले जाना ही सच्ची देशभक्ति है।

2047 के विकसित भारत में युवाओं की भूमिका अहम

अपने भाषण के समापन पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और भारत वैश्विक मंच पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। साल 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का जो सपना देखा गया है, उसे पूरा करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश के युवाओं के कंधों पर है। युवाओं की नई सोच और उनका सकारात्मक योगदान ही आने वाले समय में देश की तकदीर लिखेगा। इस ऐतिहासिक Language University Convocation Lucknow ने सभी विद्यार्थियों के मन में देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का एक नया जोश भर दिया है।

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