असम में छोटे उद्यमियों को बड़ा तोहफा: छोटे उद्योगों को 3 साल तक सरकारी मंजूरी से राहत, अब कारोबार करना होगा आसान

खबर सार :-

असम सरकार का यह फैसला छोटे उद्योगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। शुरुआती तीन वर्षों तक सरकारी मंजूरी की अनिवार्यता समाप्त होने से निवेश, नवाचार और रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है। यदि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो असम पूर्वोत्तर भारत में उद्योगों और स्टार्टअप के लिए एक प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में उभर सकता है।
असम में छोटे उद्यमियों को बड़ा तोहफा: छोटे उद्योगों को 3 साल तक सरकारी मंजूरी से राहत, अब कारोबार करना होगा आसान

खबर विस्तार : -

Assam Government MSME approval: भारत सरकार देशभर में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार नई नीतियां लागू कर रही है। इसी दिशा में राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में जुटी हैं। इसी कड़ी में असम सरकार ने छोटे उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सरल बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि राज्य में छोटे और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को कारोबार शुरू करने के लिए पहले तीन वर्षों तक किसी सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी। इस फैसले को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रोजगार सृजित करने और नए अवसर पैदा करने पर ध्यान

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार चाहती है कि नए उद्यमी अपना समय सरकारी अनुमतियां लेने में खर्च करने के बजाय अपने व्यवसाय को मजबूत बनाने, रोजगार सृजित करने और नए अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करें। उनके अनुसार, छोटे उद्योग राज्य की आर्थिक प्रगति की रीढ़ हैं और यदि शुरुआती स्तर पर उन्हें प्रशासनिक जटिलताओं से राहत मिलेगी तो वे तेजी से आगे बढ़ सकेंगे। सरकार का यह फैसला विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप और पहली बार उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों के लिए राहत लेकर आया है। खासतौर पर ऐसे उद्योग, जिनका पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है, अब बिना लंबी सरकारी प्रक्रियाओं में उलझे अपना उत्पादन या सेवा कार्य शुरू कर सकेंगे। इससे उद्योग लगाने की समयसीमा कम होगी और शुरुआती लागत में भी कमी आने की संभावना है।

कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया होगी आसान

राज्य सरकार का मानना है कि कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान होने से असम में निजी निवेश बढ़ेगा और नए उद्योगों की स्थापना को गति मिलेगी। इससे विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और अन्य कम जोखिम वाले आर्थिक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार यह निर्णय असम को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार लंबे समय से उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने पर काम कर रही है। इसी उद्देश्य से कई सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किया गया है ताकि उद्यमियों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अधिकांश कार्य ऑनलाइन पूरे हो सकें।

असम सरकार की तरफ से किए जा रहे प्रयास

पिछले कुछ वर्षों में असम सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कई सुधार लागू किए हैं। व्यापार संबंधी नियमों को सरल बनाया गया है, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है और उद्योगों के लिए निवेश-अनुकूल नीतियां तैयार की गई हैं। इसके अलावा 'एडवांटेज असम' जैसे निवेश शिखर सम्मेलनों के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को राज्य में निवेश के लिए आकर्षित करने का प्रयास भी लगातार किया जा रहा है।

छूट का लाभः केवल पात्र छोटे और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों के लिए

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटे उद्योगों को शुरुआती वर्षों में नियामकीय राहत मिलती है तो वे अपनी पूंजी का बेहतर उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और बाजार विस्तार में कर सकेंगे। इससे राज्य में औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादों को भी नए बाजार मिलेंगे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल पात्र छोटे और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों के लिए होगी। जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, जिनमें यह तय किया जाएगा कि किन उद्योगों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा और तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें किन नियामकीय प्रक्रियाओं और अनुपालन नियमों का पालन करना होगा।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस नीति से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय उद्यमिता मजबूत होगी और असम का औद्योगिक आधार पहले की तुलना में अधिक व्यापक और सशक्त बनेगा। यह पहल न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देगी, बल्कि भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत और एमएसएमई सशक्तीकरण के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।

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