योग के दौरान ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें, योग अभ्यास से जुड़े कुछ विशेष और महत्वपूर्ण बिंदु

खबर सार :-

योग करने से पहले सही नियम और सावधानियां जानना जरूरी है। आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार गलत योगाभ्यास से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है।
योग करने से पहले जानें जरूरी नियम, गलत तरीके से हो सकता है नुकसान

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: योग केवल शरीर को मोड़ने या कुछ देर आंखें बंद करके बैठने का नाम नहीं है, बल्कि यह खुद को समझने और संतुलित जीवन जीने की एक प्रभावी प्रक्रिया है। हर व्यक्ति का शरीर, मन और जीवन जीने की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं, इसलिए सभी के लिए एक जैसा योग अभ्यास कभी भी सही नहीं माना जाता है। योग का अभ्यास हमेशा अपनी व्यक्तिगत स्थिति को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। आयुष मंत्रालय ने भी इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, शारीरिक-मानसिक अवस्था और मौसम जैसे कई कारण यह तय करते हैं कि उसके लिए कौन-सा योग अभ्यास सही रहेगा। कुछ विशेष स्वास्थ्य समस्याओं में कुछ योगासन वर्जित होते हैं, जबकि अन्य आसनों में उम्र और क्षमता के अनुसार सावधानी बरतनी जरूरी होती है।

उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार बदलाव जरूरी

बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कार्यक्षमता और जरूरतें दोनों बदल जाती हैं। इस वजह से बुजुर्गों को अत्यधिक आगे या पीछे झुकने वाले आसन तथा लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने वाले अभ्यासों से बचने की सलाह दी जाती है। उदाहरण के लिए, पादहस्तासन और चक्रासन जैसे अभ्यासों में शरीर को बहुत अधिक झुकाना पड़ता है, जो बुजुर्गों के लिए कठिन हो सकता है। किसी भी योग या प्राणायाम को शुरू करने से पहले उसके वर्जित पहलुओं यानी किन स्थितियों में अभ्यास नहीं करना चाहिए, इसे समझना अनिवार्य है। गलत तरीके से किए गए अभ्यासों का शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, भस्त्रिका प्राणायाम में तेजी से सांस ली और छोड़ी जाती है, जिससे रक्त संचार बहुत तेज हो जाता है।

उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए जोखिम

उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीजों के लिए तेज योग या प्राणायाम प्रक्रियाएं हानिकारक साबित हो सकती हैं। भस्त्रिका जैसे अभ्यासों से हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है, जिससे चक्कर आने या अन्य कार्डियक समस्याएं होने का खतरा रहता है। इसलिए मेडिकल कंडीशन के हिसाब से इन निषेधों का पालन करना आवश्यक है। योगासन करते समय सांसों की गति पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है, इसलिए योग कभी भी हांफते हुए या जल्दबाजी में नहीं किया जाना चाहिए और प्रत्येक आसन के साथ सांस लेने (Inhalation) व छोड़ने (Exhalation) के तय नियमों का पालन करना चाहिए। अभ्यास के दौरान हमेशा ढीले, आरामदायक और सूती (cotton) कपड़े पहनें ताकि शरीर में हवा का संचार ठीक से हो सके और यह अभ्यास हमेशा शांत, हवादार एवं साफ-सुथरे वातावरण में करें। इसके अलावा, योगाभ्यास के तुरंत बाद न तो ठंडे पानी से नहाना चाहिए और न ही तुरंत भोजन करना चाहिए, बल्कि शरीर का तापमान सामान्य होने के कम से कम 30 मिनट बाद ही स्नान या खान-पान करें। साथ ही, शरीर को उसकी क्षमता से अधिक मोड़ने या खींचने का प्रयास न करें क्योंकि योग का उद्देश्य शरीर को लचीला बनाना है न कि चोट पहुंचाना, इसलिए यदि किसी आसन को करते समय दर्द महसूस हो तो उसे तुरंत रोक दें।

योग अभ्यास से जुड़े कुछ विशेष और महत्वपूर्ण बिंदु 

योग और आयुर्वेद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जहाँ आयुर्वेद के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) अलग-अलग होती है, और अपनी प्रकृति के अनुसार योग व प्राणायाम चुनने से शरीर के दोष संतुलित रहते हैं तथा स्वास्थ्य बेहतर होता है। इसके अलावा, सामान्य शव आसन से आगे बढ़कर 'योग निद्रा' शरीर और मस्तिष्क को गहरी विश्राम अवस्था में ले जाती है, जो मानसिक तनाव, चिंता और अनिद्रा (Insomnia) जैसी समस्याओं को दूर करने में बेहद असरदार मानी जाती है। अभ्यास पर समय और मौसम का भी गहरा प्रभाव पड़ता है; जैसे गर्मियों के मौसम में शीतली और शीतकारी जैसे शीतलता प्रदान करने वाले प्राणायाम करने चाहिए, जबकि सर्दियों में भस्त्रिका या सूर्यभेदी प्राणायाम शरीर में ऊष्मा बनाए रखने में मदद करते हैं। अंत में, योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि एक ध्यान प्रक्रिया है, इसलिए अभ्यास के दौरान अपना पूरा ध्यान अपनी सांसों और शरीर के उस हिस्से पर केंद्रित रखना चाहिए जिस पर आसन का प्रभाव पड़ रहा है।

यह भी पढ़ेंः- टीबी मुक्त भारत अभियान में मिली बड़ी सफलता, ​हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की 44 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित

अन्य प्रमुख खबरें