योग की पाठशाला: आयुष मंत्रालय ने दी जरूरी सलाह, योग को ध्यान चाहिए

खबर सार :-

शरीर की कई बीमारियों को योग से दूर किया जा सकता है। लेकिन यह ध्यानमग्न करने, नियमित करने, शांतिपूर्ण वातावरण में अंगों को बिना झटके करने से ही संभव है।
माइंडफुल योग रख सकता है निरोग, अंगों को झटकने पर लगाएं रोक

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, आने वाले समय में योग से ही निरोग का सिद्धांत हल हो पाएगा। खानपान और भागदौड़ सब अनियमित हो रहा है। शुद्धता पर प्रश्न हर जगह पर खड़ा है। इसीलिए अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए आयुष मंत्रालय ने योग करने वालों के लिए जरूरी सलाह दी है।

योग हमेशा धैर्य के साथ करना चाहिए

मंत्रालय का कहना है कि योग का अभ्यास हमेशा सजगता और धैर्य के साथ करना चाहिए। जल्दबाजी और उदासीनता से योग के मायने बिगड़ सकते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करके बताया कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। मुख्यालय ने योग के प्रति सचेत रहने और सावधान रहने के लिए कहा है। इसमें जागरूकता के साथ अभ्यास करने, धैर्य के साथ आगे बढ़ने, ध्यानमग्न योग पर जोर दिया गया है।

उत्साह बढ़ाते हुए मंत्रालय ने कहा कि शरीर के प्रति जागरूकता सम्मान के साथ जुड़ी होती होती है। इसे जल्दबाजी में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे अभ्यासरत करना चाहिए। स्वाभाविक रूप से सांस लेने से तनाव और तनाव से बचते हुए अपनी क्षमता के अनुसार योग लाभकारी होता है। मंत्रालय ने कहा कि अभ्यास के दौरान बताए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने से बचने वालों को सावधान किया है।

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योग में आसनों का क्रम है जरूरी 

कहा है कि अपने अभ्यास को ध्यानमग्न करना चाहिए। इस दौरान अच्छा होगा कि मौन और संकल्प लेकर करें। एक और तरीका बताया गया है, इसमें योग को शांतिपाठ के साथ संपन्न करने पर जोर दिया। योग करने के लिए दिए गए कई सुझावों में कहा गया है कि प्रार्थना के साथ योग शुरू करें और धीरे-धीरे, कोमलता और जागरूकता के साथ आगे बढ़ें। नाक से स्वाभाविक रूप से सांस लें। जब तक निर्देश न दिया जाए, सांस रोकने से बचें। यह तरीका योग का माइंडफुल है।

 मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है प्रभाव

इनको मंत्रालय ने योग करते समय फालो करने के लिए कहा है। अचानक शरीर को झटकना और खिंचाव देना शरीर के लिए बेहतर नहीं है। हर अभ्यास के लिए बताए गए नियमों का पालन करने पर आयुष मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया के प्लेटफार्म एक्स पर जोर दिया गया है। बताया गया है कि सजगता के साथ योग का अभ्यास करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

माइंडफुल के लिए कहा गया है कि इसके अंतर्गत सांसों पर ध्यान देना होता है। यह कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन का स्तर कम करता है। मन को शांत करने की प्रक्रिया में यह बेहतर होता है। इसके और कई लाभ बताए गए हैं। इनमें आसन के समय की आदत से मानसिक शक्ति बढ़ती है। 

शरीर को मोड़ने में मददगार है यह आसन

इन योग अभ्यास में ही उत्थित पश्चिमोत्तानासन भी है। यह शरीर के पिछले हिस्से में गहरा खिंचाव लाता है और पेट की मांसपेशियों को एक्टिव करता है। शरीर को आराम देने के लिए मकरासन और भुजंगासन को पहली आसन के बाद जरूरी बताया गया है। इस आसन से शरीर को आराम मिलता है। शिथिलता दूर हो जाती है। इसके अलावा भुजंगासन रीढ़ को मजबूती और लचीलापन देने में सहायक बनता है।

इस संबंध में मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की ओर से कहा गया है कि उत्थित या निरालम्ब पश्चिमोत्तानासन के बाद मकरासन का अभ्यास मुख्य रूप से एक काउंटर-पोज और थकान के रूप में किया जाता है। जब आप शरीर को एक दिशा में गहराई से मोड़ते हैं, तो उसके विपरीत दिशा में किया जाने वाला आसन शरीर को वापस लाने में मददगार होता है।

पेट की कई दिक्कतें दूर करने में मिलती है मदद 

आयुष मंत्रालय कहता है कि उत्थित पश्चिमोत्तानासन करने से पेट के अंगों पर दबाव बनता है। भुजंगासन लिवर, किडनी और आंतों की टोनिंग पूरी करता है। इनमें जरूरी खिंचाव लाता है। इससे कई दिक्कतें दूर करने में मदद मिलती है। इनमें कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है। लेकिन आसन के दौरान यदि शरीर में कोई दिक्कत बढ़ने लगे तो सावधान होना चाहिए। 

अभ्यास करने वाला जब आगे झुकता है और फिर अपनी स्थिति पर वापस आता है तो वह दशा रीढ़ की हड्डी के जोड़ों पर गलत दबाव डाल सकता है। इसलिए भी भुजंगासन और मकरासन का नियमित होना पीठ के निचले हिस्से को सुरक्षित रखता है। इसीलिए आयुष मंत्रालय ने योग करने वालों के लिए जरूरी सलाह दी है।

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