मध्य प्रदेश की बालिकाओं को भोपाल भेजने की मजबूरी खत्म करें, फिट फैसिलिटी सेंटर हर संभाग में बनाएं
खबर सार :-
मध्य प्रदेश के सिर्फ 12 जिलों में बालिकागृह बनाए गए हैं। जबकि ग्वालियर-चंबल संभाग में एक भी शासकीय बालिकागृह नहीं हैं। बाल अधिकार आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग को पत्र भेजकर नाराजगी जताई है। हर संभाग में फिट फैसिलिटी सेंटर बनाने के लिए कहा गया है।
खबर विस्तार : -
भोपाल, मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बालिकाओं के संरक्षण और आश्रय व्यवस्था में लापरवाही करने व संवेदनशील न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने जरूरत को ध्यान में रखते हुए बालिकाओं को सुरक्षित ठिकाने हर संभाग में बनाने के लिए कहा है। सभी रीजनल क्षेत्र में न होने के कारण लंबी दूरी तय कर बालिकाएं राज्य की राजधानी भोपाल पहुंचाई जाती हैं। इस व्यवस्था पर उन्होंने आपत्ति जताई है। प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नई व्यवस्था देने के लिए कहा है।
ये भी पढ़ेंःज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में प्रदर्शन, 11 मेट्रो स्टेशन बंद, यूथ कांग्रेस ने जताया विरोध
बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नई व्यवस्था के दिए निर्देश
मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग का कहना है कि ज्यादा दूरी से दिक्कतें बढ़ती हैं। बालिकाओं को उनके क्षेत्र में ही नजदीकी संभाग में रखकर उचित व्यवस्थाएं दी जा सकती हैं। इससे ज्यादा सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। आयोग ने प्रदेश के हर संभाग में उपयुक्त संस्थाओं को ‘फिट फैसिलिटी’ घोषित करने की प्रक्रिया पर काम करने के लिए कहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग से कहा गया है कि किसी बालिका को उसके निकटतम संभाग में ही सुरक्षित आश्रय और संरक्षण उपलब्ध कराया जाना उसके लिए ज्यादा हितकारी रहता है।
प्रदेश के सभी संभाग का डाटा उन्होंने जुटाया। इसमें बताया गया है कि प्रदेश के 12 जिलों में बालिकागृह संचालित किए जा रहे हैं। यह वर्तमान की व्यवस्था है। इसमें ग्वालियर और चंबल संभाग जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया कि इन क्षेत्रों में एक भी शासकीय बालिकागृह नहीं है। यदि इन क्षेत्रों में कोई बहुत जरूरी मामला होता है तो भी यहां बालिकागृह नहीं हैं। इसलिए लंबी दूरी तय कर विशेष परिस्थितियों वाली बालिकाओं को भोपाल स्थित बालिकागृह में भेजा जाता है।
ये भी पढ़ेंः बीएसएफ की गोलाबारी में दो पाकिस्तानी घुसपैठिए ढेर, पंजाब के तरन तारन जिले में कर रहे थे प्रवेश
महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव को लिखा पत्र
तमाम समस्याओं पर गौर करते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने एक कल्याणकारी कार्य के लिए कदम बढ़ाया है। इसमें कहा गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव अपने स्तर पर प्रयास करें। एक पत्र के जरिए कई बातें कही गई हैं। इनमें यह जिक्र किया गया है कि प्रदेश स्तर की सचिव एक बार संस्थाओं को चेक करें। उन्हें किशोर न्याय अधिनियम का भी ध्यान रखने के लिए कहा है।
पत्र में इस संबंध में 2015 की धारा 39 (3) का उल्लेख किया गया है। यह ‘फिट फैसिलिटी’ से संबंधित है। आयोग ने कहा है कि विभागीय स्तर से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर इस दिशा में काम करना ठीक रहेगा। पत्र में महत्वपूर्ण बातों का जिक्र किया गया है। जानकारी है कि प्रदेश के मात्र 12 जिलों में बालिकागृह संचालित हैं। इनमें ग्वालियर एवं चंबल संभाग में कोई शासकीय बालिकागृह नहीं है। परिणामस्वरूप इन संभागों की ऐसी बालिकाओं को, जिन्हें आश्रय एवं संरक्षण की आवश्यकता होती है, भोपाल स्थित बालिकागृह में प्रवेश दिलाया जाता है।
अधिकारों के प्रति गंभीर नहीं हैं राज्य की अधिकारी
हैरान करने वाली यह बात है कि वह बालिकाएं जो पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत पीड़िता हैं। लैंगिक अपराध से प्रभावित अथवा गर्भवती हैं। यदि ऐसी बालिकाओं को भी बहुत दूर ले जाने की प्रक्रिया की जाती है तो उन्हें मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। साथ ही वह न्यायिक कार्यवाही, चिकित्सकीय परीक्षण, परामर्श सेवाओं और परिवार के संपर्क से काफी कट जाती हैं।
जहां सुविधा देने की जरूरत है, वहां एक साथ कई दिक्कतें मिल जाती हैं। इस संबंध में राज्य की अधिकारी गंभीर नहीं हैं। बाल हित का सर्वोत्तम सिद्धांत’ कहता है कि संरक्षण की जरूरत वाली बालिका के लिए केवल सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके मानसिक और भावनात्मक हितों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
संवेदनशील होकर ही कर सकतें हैं यह काम
अभी हर हाल में भोपाल स्थित संस्थान पर निर्भरता बनी रहती है। इसको भी कम किया जा सकता है। इसीलिए प्रत्येक संभाग में उपलब्ध उपयुक्त संस्थाओं का चयन कर उन्हें ‘फिट फैसिलिटी’ के रूप में अधिसूचित करने की जरूरत बताई जा रही है। इसमें ज्यादा बड़ा काम नहीं करना है। औपचारिकताएं और अपनी जिम्मेदारी के साथ संवेदनशीलता का प्रदर्शन करना है। संस्थानों को चिन्हित कर ‘फिट फैसिलिटी’ के चयन, मान्यता, संचालन, निरीक्षण और गुणवत्ता आदि की निगरानी करनी है।
ये भी पढ़ेंः China को अमेरिकी हथियार बेचने की बात पर Trump का यू-टर्न बोले, शी से कोई ऐसी चर्चा नहीं हुई
अन्य प्रमुख खबरें
-
Punjab सीमा पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम, दो पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया
2026-10-02
-
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में प्रदर्शन
2026-10-02
-
देशभर में चला स्वच्छता अभियान, राष्ट्रपिता के आदर्शों को अपनाने पर जोर
2026-10-02
-
सागर कवच अभ्यास और समुद्री कुकुंबर बरामदगी
2026-10-02
-
झारखंड के चाईबासा में खेत में मृत पाई गई हथिनी, दोनों दांत काट ले गए तस्कर
2026-10-02
-
PM मोदी ने 'फ्लाईदुबई' के 'हीरो' कैप्टन स्मित मच्छार से की बात
2026-10-02
-
राज्यों में वोटरों को मतदाता सूची में जोड़ने के लिए चलेगा विशेष अभियान
2026-10-02
-
राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति समेत नेताओं ने महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि
2026-10-02
-
deepotsav से पहले सज जाएगी Ayodhya, परिक्रमा मार्ग की हर चीज आकर्षक
2026-10-02
-
महाराष्ट्र के रायगढ़ में पिकनिक मनाने आए 8 छात्रों की डूबकर मौत
2026-10-01
-
लाल बहादुर शास्त्री आज भी प्रेरणादायी, सादगी से बनाई अलग पहचान
2026-10-01
-
ED की बड़ी कार्रवाई, कोलकाता से साइबर अपराधी गिरफ्तार
2026-10-01
-
पीएनजीआरबी के 20वें स्थापना दिवस पर नेशनल पीएनजी ड्राइव 3-0 का शुभारंभ
2026-10-01
-
बिहार में निवेश से खुलेंगे रोजगार के रास्ते: नितिन गडकरी
2026-10-01
-
खुदरा चीनी की कीमतें करीब 15 प्रतिशत गिरीं, एक्स-मिल दाम भी 28 प्रतिशत घटा: केंद्र
2026-10-01