27 वर्षों के समर्पण को वैश्विक सम्मान: टीबी उन्मूलन में भारतीय संस्था REACH को मिला प्रतिष्ठित कोचोन पुरस्कार 2026
खबर सार :-
भारत में टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में कार्यरत संस्था REACH को प्रतिष्ठित Kochon पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। जानिए इस उपलब्धि के बारे में।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: भारत से टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए पिछले 27 वर्षों से लगातार प्रयास कर रही देश की प्रमुख संस्था 'रीच' ने एक बड़ी वैश्विक उपलब्धि हासिल की है। इस संस्था को टीबी के खिलाफ लड़ाई में अहम योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'कोचोन पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने वाला 'रीच' भारत का पहला नागरिक समुदाय संगठन बन गया है। इस उपलब्धि से देश में टीबी उन्मूलन के प्रयासों को नई पहचान मिली है और स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। इस वैश्विक सम्मान की घोषणा के साथ ही देश के चिकित्सा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।
वैश्विक मंच पर मिला बड़ा सम्मान
दक्षिण कोरिया के 'कोचोन फाउंडेशन' और 'स्टॉप टीबी पार्टनरशिप' की ओर से संयुक्त रूप से प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा अवार्ड माना जाता है। इंडोनेशिया में पांच नवंबर को आयोजित एक विशेष समारोह में वर्ष 2026 का यह पुरस्कार 'रीच' (भारत), केन्या के 'सेंटर फॉर हेल्थ सॉल्यूशंस' और 'मार्शल आइलैंड्स टीबी कंट्रोल प्रोग्राम' को संयुक्त रूप से दिया गया। इस वर्ष इस पुरस्कार के लिए चयन की मुख्य थीम टीबी के मरीजों की समय पर पहचान और उचित इलाज सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के साझा प्रयासों पर आधारित थी। इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होकर संस्था ने देश का गौरव बढ़ाया है।
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संस्था का मूलमंत्र और जमीनी प्रयास
सम्मान मिलने के बाद संस्था की अध्यक्ष एवं सह-संस्थापक डॉ. नलिनी कृष्णन ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि हमारा मूलमंत्र हमेशा से व्यक्ति का इलाज करना रहा है, न कि केवल बीमारी का। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी से पीड़ित समुदायों के साथ हमारी अब तक की यात्रा में हमने शुरुआती दौर में ही यह समझ लिया था कि देखभाल और उपचार तक पहुंचने में आने वाली बाधाओं को दूर करना बेहद जरूरी है। इसके लिए केवल चिकित्सकीय जरूरतों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सामाजिक, सामुदायिक, पारिवारिक, मानसिक स्वास्थ्य और परिस्थितिजन्य चुनौतियों को भी समझना और उनका समाधान निकालना आवश्यक होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सराहा संस्था का कार्य
विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने 'रीच' को इस बड़ी सफलता पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस संस्था ने टीबी के क्षेत्र में हमेशा नए और बेहतर तरीकों से काम किया है। महिलाओं के नेतृत्व वाली यह संस्था टीबी मरीजों की समस्याओं को गहराई से समझती है और उनकी मदद करती है। उनके लिए टीबी के मरीज केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उनकी जरूरतें और समस्याएं भी महत्वपूर्ण हैं। डॉ. स्वामीनाथन ने विश्वास जताया कि यह संस्था आगे भी नए प्रयास करती रहेगी और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम जारी रखेगी।
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समर्पण और भरोसे का परिणाम
संस्था की निदेशक डॉ. रम्या अनंतकृष्णन ने इस सफलता का श्रेय जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों को दिया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान असल में जमीनी स्तर पर जुटे सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, टीबी चैंपियंस और प्रभावित परिवारों के अटूट विश्वास का नतीजा है। उनका यह भरोसा और समर्पण ही संस्था को हर जरूरतमंद तक बिना किसी भेदभाव के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार प्रेरित करता है। संस्था की इस पूरी यात्रा में सभी सहयोगियों की मेहनत और लगन शामिल रही है, जिससे आज यह मुकाम हासिल हुआ है।
रीच संस्था का सफर और उद्देश्य
रीच (REACH organization) की स्थापना वर्ष 1999 में चेन्नई में हुई थी। यह संस्था पिछले 27 वर्षों से भारत में टीबी के खिलाफ प्रयासों में एक प्रमुख सहयोगी और अग्रणी इकाई के रूप में काम कर रही है। इस दौरान संस्था ने राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम के साथ मिलकर काम किया है और निजी क्षेत्र, टीबी प्रभावित समुदायों, उद्योग जगत तथा मीडिया सहित विभिन्न साझेदारों को इस अभियान से जोड़ा है। संस्था का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान, जन-जागरूकता और नए स्वास्थ्य मॉडलों के जरिए हर टीबी मरीज तक गुणवत्तापूर्ण और समान सेवाएं पहुंचाना है, ताकि देश को टीबी मुक्त बनाया जा सके।
भारत में क्षय रोग (टीबी) की रोकथाम और नियंत्रण के लिए सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले भारत से इस वैश्विक सम्मान को पाने वालों में रिवाइज्ड नेशनल टीबी कंट्रोल के प्रमुख डॉ. एलएस चौहान (2006), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR (2017) और मोलबायो डायग्नोस्टिक्स (2024) शामिल हैं। अब इस कड़ी में 'रीच' संस्था का नाम भी जुड़ गया है, जो नागरिक समुदाय संगठन के रूप में पहली बार इस मुकाम तक पहुंची है।
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