तेलंगाना :अस्पताल बदलते समय हुई शिशु की मौत पर हंगामा, आग बुझाने के इंतजाम की होगी जांच

खबर सार :-

तेलंगाना के आदिलाबाद शहर में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में भीषण आग लग जाने से मरने वालों की संख्या 5 हो गई है।
telangana : अस्पताल में निगरानी की भूमिका की होगी जांच, मृतक बच्चों की संख्या पांच हुई

खबर विस्तार : -

हैदराबाद, पिछली रात आदिलाबाद शहर में आग लगने की घटना के बाद दो और बच्चों की मौत हो गई। अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। आरआईएमएस में इलाज के दौरान एक नवजात शिशु की मौत हो गई। दूसरे की शहर ले जाते समय मौत हुई। इससे पहले सोमवार की आधी रात को एयर कंडीशनर में आग लग गई थी, जिससे तीन शिशुओं की मौत होने की जानकारी अस्पताल की ओर से दी गई थी।

प्लास्टिक पिघलने से फैल गई थी आग

 रिसेप्शन एरिया में यह एयर कंडीशनर फटा था। अस्पताल में आग बुझाने के लिए मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। साथ में दमकल की गाड़ियां भी मंगवाई गई थी। सोमवार आधी रात को लगी आग के बाद इसे बुझाने में कई घंटे लगे। तीमारदारों और अस्पताल के कर्मचारियों ने शिशुओं को बचाया था। आग की घटना की भयावता का अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पहले से जन्मे 5 दिन के एक बच्चे की तुरंत मौत हो गई थी।

इसी के साथ पहले जन्मे चार दिन के एक अन्य बच्चे की चार घंटे बाद मौत हो गई। एक और शिशु की यहां मौत हुई थी। बताया जाता है कि उसकी अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हुई। इसे दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा था। आग की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री ने भी मौके पर जाकर निरीक्षण किया। उन्होंने दुख जताते हुए कहा है कि अस्पताल की भूमिका की जांच की जाएगी।

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तीमारदारों और कर्मचारियों ने 25 शिशुओं को बचाया

 जिस समय आग बढ़ रही थी, तीमारदारों और अस्पताल के कर्मचारियों ने लगभग 25 शिशुओं को बचाया था। स्वास्थ्य मंत्री सी दामोदर राजा नरसिंह ने कहां की पीड़ित परिवारों के साथ सरकार खड़ी है। मंत्री ने कहा है कि अस्पताल के शिशुओं की रक्षा हर हालत में की जाए। सरकार की ओर से जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने का भी उन्होंने निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जाए। बता दें कि अस्पतालों में इन दिनों इलेक्ट्रिक उपकरणों में खराबी आने के कारण या शार्ट सर्किट की वजह से आग की घटनाएं लगातार हो रही हैं।

इस दौरान फायर सेफ्टी उपकरण आदि की निगरानी ठीक से नहीं किए जाने की जानकारियां मिलती रहती हैं। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सेफ्टी ऑडिट के आधार पर अस्पतालों को प्रमाण पत्र दे देती हैं, लेकिन जरूरी चीज जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीनीकरण, इमारत का निर्माण अतिरिक्त भर्ती आदि पर निगरानी नहीं की जाती है। जिन लोगों की कमियां सामने आ जाती हैं, उन पर भी कार्रवाई नहीं की जाती है। 

बच्चों की देखभाल बेहतर बनाने के प्रयास होंगे

इस ताजा मामले पर भी पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। राजा नरसिंह ने कहा है कि आरआईएमएस में मां और बच्चे की देखभाल की सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। चाइल्ड हेल्थ बिल्डिंग भी बनाने का फैसला लिया गया है। बहरहाल, अभी इस मामले पर किसी अधिकारी ने चुप्पी नहीं तोड़ी है। जिस अस्पताल में आग लगी है, उसका क्या ऑडिट किया गया है, सुरक्षा मानकों की भूमिका कैसी रही है? इस पर भी अभी किसी ने अपना पक्ष नहीं रख है। बलहाल, शुरुआती जांच में यह पता चला है कि एसी यूनिट में बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। इससे जुड़े प्लास्टिक के हिस्सों के जलने से घना धुआं फैला था। यहीं से आग बढ़ी ओर विकराल रूप ले लिया।

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