दुनिया भर में घट रही दुर्लभ गैंडा की संख्या, विश्व गैंडा दिवस पर जताई चिंता

खबर सार :-

हर वर्ष 22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष भी गैंडा दिवस पर बीते साल वाला ही माहौल है। पशुओं के जानकार यह जरूर जानते होंगे कि गैंडों की सभी पांच प्रजातियों के संरक्षण की जरूरत है।
विश्व गैंडा दिवस 2026: सुमात्राई प्रजाति सबसे शर्मीली, विलुप्ति के खतरे से जूझ रहे

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली,  भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से विश्व गैंडा दिवस 2026 पर थोड़ी तसल्ली वाली खबर दी है। भारत की गैंडा संरक्षण यात्रा में इस बार प्रगति बताई गई है। सरकारी आफिसों की ओर से कहा गया है कि इसके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक कोशिश की जा रही हैं। 

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योजनाओं की सच्चाई परखने की है जरूरत

आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया कि भारत का एक सींग वाला गैंडा हमारी वन्यजीव विरासत का सिर्फ एक प्रतीक नहीं है। इनकी आबादी बढ़ाने के सरकार के अलावा वन्यजीव प्रेमी भी हर साल अपील करते रहते हैं। लेकिन इनकी आबादी बढ़ाने के लिए कोशिशें शायद ही पर्याप्त हैं। राज्य सरकारों में वन विभाग, पर्यावरण मंत्रालय और जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से भी विश्व गैंडा दिवस पर एक सींग वाले भारतीय गैंडे और उसके प्राकृतिक आवास के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की गई है।

इनके प्रति बढ़ावा देने का तरीका वास्तव में अब केवल एक्स पर पोस्ट हो सकते हैं? इन पर भी विचार किया जाना चाहिए। सालों पहले पर्यावरण को सुधारने के लिए गोष्ठियां हुआ करती थी। अब इनका काम कम, जमीन पर पौधे रिकॉर्ड बनाकर लगाए रहे हैं। इनको संरक्षित करने की भी जरूरत है। इसी तरह वन्य जीव को भी बचाने की महिम की जरूरत है। बिहार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से आधिकारिक एक्स हैंडल पर इसका संरक्षण, जैव-विविधता और प्रकृति के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक बताया है। 

योजनाओं की हर साल होनी चाहिए समीक्षा

कुछ उद्यान और जू की ओर से इनके संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें बिहार का भी नाम है। विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर बिहार के बारे में बताया गया है कि एकमात्र जैविक उद्यान, पटना जू, एक सींग वाले भारतीय गैंडे के संरक्षण और प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां पर गैंडा संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र को सफलता की कडियों में बताया गया है। 

छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री केदार कश्यप ने इसे जंगलों, घास के मैदानों और जल स्रोतों के प्राकृतिक संतुलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। इन्होंने विश्व गैंडा दिवस पर एक सींग वाले भारतीय गैंडे और उसके प्राकृतिक आवास के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की है। दरअसल अभी लोगों की गैंडा के बारे में बहुत कम जानकारी है। इनकी प्रकृति, खानपान, रहने लायक वतावरण, लाभ, हानि आदि के अलावा भी कई विषय जानकारी के हो सकते हैं। जानकारी के बिना संरक्षण के लिए आगे आ पाना संभव नहीं है। यहां कुछ रोचक जानकारियां दी जा रही हैं। 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हों संरक्षण की कोशिशें 

जिस गैंडे की पांच प्रजातियां बताई गई हैं, उनमें एक सींग वाला गैंडा भी है। यह भारत और नेपाल में पाया जाता है। गंभीर चिंता की बात यह है कि भारत में भी विलुप्त होने का संकट हो सकता है। इसलिए इनके संरक्षण की बहुत आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की सूची में यह सुभेद्य श्रेणी में आता है। इसका मतलब यह है कि एक सींग वाले गैंडे की संख्या लगातार कम हो रही है। इसी तरह दूसरा सफेद गैंडा दो सींग वाला होता हैं। भारत से बाहर अफ्रीका में पाया जाने वाला सबसे बड़ा गैंडा होता है। यह यह हाथी के बाद जमीन पर रहने वाला दूसरा सबसे बड़ा स्तनधारी जीव है। 

तस्करी पर कठोरतम सजा का प्रावधान हो

एक और दो सींग हुकदार होंठ वाला काला गैंडा होता है। यह अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की सूची में यह अति संकटग्रस्त स्थिति में है। यह पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में पाया जाता है। तस्करों ने इनकी सींग के लिए बड़े पैमाने पर शिकार कर इनकी संख्या घटा दी। गैंडा प्रजाति में एक सींग काला दुर्लभतम गैंडा है। यह इंडोनेशिया में पाई जाती है।

पांचवां सुमात्राई गैंडा के दो सींग होते हैं। इसका आगे वाला सींग बड़ा और पीछे वाला छोटा होता है। यह एक शर्मीला और अकेला रहने वाला जीव है। इसके बाल बड़े और ज्यादा होते हैं। सुमात्रा, बर्नियो व इंडोनेशिया में यह प्रजाति पाई जाती है। दुनिया में केवल 30 से 50 सुमात्राई गैंडे ही बचे हैं। हालांकि दुनिया के बचे गैंडे की संख्या बढ़ाने के लिए जमीन पर काम करने की जरूरत है। इनकी तस्करी पर कठोर सजा का प्रावधान हो। उद्यानों में गैंड़े के प्रजनन केंद्रों की सख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

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