दिवाली पर शोर और वायु प्रदूषण का बाॅम्बे हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान, सरकार के कदमों पर जताई संतुष्टि

खबर सार :-

दिवाली पर शोर और वायु प्रदूषण को लेकर बाॅम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन के कार्यों पर संतुष्टि जाहिर की।
हेल्पलाइन पर कर सकते हैं दिवाली पर शोर की शिकायतें, BMC ने दी जानकारी

खबर विस्तार : -

मुंबई: दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले शोर और वायु प्रदूषण से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए, बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष जताया। हालांकि कोर्ट ने माना कि पहले दिए गए आदेशों का पालन करने में देरी हुई थी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि प्रशासन ने अब तत्परता से कार्रवाई की है।

यह टिप्पणी 26 अक्टूबर के एक आदेश में जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान, मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती, बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) की ओर से हलफनामे दाखिल किए गए, जिनमें प्रदूषण और शोर को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण दिया गया था।

जागरूकता बढ़ाने वाले होर्डिंग और डिस्प्ले लगाए गए

BMC ने कोर्ट को बताया कि पर्यावरण विभाग के डिप्टी चीफ इंजीनियर, अजय राणे को इस अभियान के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। 22 अक्टूबर को अखबारों में जन-जागरूकता विज्ञापन प्रकाशित किए गए, और 25 अक्टूबर से टेलीविजन पर विज्ञापन दिखाए जाने लगे। BMC के अनुसार, रेलवे स्टेशनों, बस डिपो, राजमार्गों के किनारे और BMC के आधिकारिक पोर्टल पर जागरूकता बढ़ाने वाले होर्डिंग और डिस्प्ले लगाए गए हैं। स्कूलों में पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं और छात्रों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई जा रही है। BMC ने आगे बताया कि शोर से जुड़ी शिकायतें हेल्पलाइन नंबर 1916 पर दर्ज की जा सकती हैं, और ऐसी शिकायतों को सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को भेज दिया जाएगा।

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शोर के स्तर की विशेष निगरानी की जाएगी

इस बीच, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के अनुसार, दिवाली 2026 के दौरान वायु गुणवत्ता और शोर के स्तर की विशेष निगरानी की जाएगी। इसके लिए जरूरी प्रोटोकॉल और मैनुअल तैयार कर लिए गए हैं। पुलिस कमिश्नर देवेन भारती ने कोर्ट को बताया कि सभी पुलिस थानों के प्रभारी अधिकारियों को हाई कोर्ट के आदेशों के बारे में सूचित कर दिया गया है। साथ ही, बिना लाइसेंस वाले लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल और सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर लगी रोक को सख्ती से लागू करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। 

झुग्गी-बस्तियों में अभियान चलाने का सुझाव

सुनवाई के दौरान, अदालत ने गौर किया कि मुंबई की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी झुग्गी-बस्तियों में रहती है। इसे देखते हुए, इन इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने के लिए नगर पार्षदों और स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) के CEO के साथ बैठकें की जानी चाहिए। अदालत ने सुझाव दिया कि इन अभियानों का नेतृत्व उन लोगों द्वारा भी किया जा सकता है जो इन्हीं झुग्गी-बस्तियों में रहते हैं और अपने समुदाय में एक खास पहचान या रुतबा रखते हैं। अदालत ने उम्मीद जताई कि फिल्म सितारे और खिलाड़ी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए खुद आगे आएंगे। फिलहाल, अदालत प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट है और मामले की आगे निगरानी के लिए इसे अपने पास रखा है। इन अभियानों में मशहूर हस्तियों की भागीदारी के संबंध में, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस काम के लिए सरकारी खजाने से कोई भी धनराशि खर्च नहीं की जानी चाहिए।

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