भागलपुर की गंगा पर चकवा का बसेरा, समृद्ध जैव-विविधता की अनोखी तस्वीर
खबर सार :-
भागलपुर की गंगा पर चकवा आ चुके हैं। विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य का रेतीला तट इनको बेहद पसंद है। जहां इनकी आमद है, वहां पटाखों पर पाबंदी है। लाउडस्पीकर भी नहीं बजेंगे। प्रशासन से अनुमति मिलने पर धीमी आवाज वाले पटाखे और लाइडस्पीकर बजा पाएंगे।
खबर विस्तार : -
भागलपुर, जैसे-जैसे मौसम बदल रहा है और ठंडक आनी शुरू हो गई है, वैसे ही जीव जंतु और पशु पक्षियों ने भी अपना बसेरा बदलना शुरू कर दिया है। इनके बसेरे में कुछ खास स्थान हैं, जहां पर यह पहुंच रहे हैं। विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य का रेतीला तट इनको खूब पसंद आ रहा है।
गंगा की शांत धाराएं देखने के लिए यह बहुत दूर से आते हैं और इसका जल पीकर अपने आप को जैसे धन्य समझते हैं। यही कारण है कि यहां के तट विदेशी मेहमानों के कलरव से गूंजने लगी हैं। हर साल की तरह इस बार भी तिब्बत और मध्य एशिया के ठंडे इलाकों से इनको भारत के भागलपुर आना पड़ा है। इस यात्रा में इन्हें हजारों किलोमीटर की दूरी भी तय करनी पड़ी है। लंबा सफर तय कर प्रवासी पक्षी चकवा बड़ी संख्या में भागलपुर पहुंच चुके हैं।
गंगा की लहरों पर इनकी अठखेलियां और रेतीले किनारों पर इनका झुंड रोज देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों को यह पक्षी बेहद पसंद आ रहे हैं। पशु और पक्षियों के प्रति स्नेह रखने वाले लोग भी इनकी ओर खिंचे चले आ रहे हैं। कुछ लोगों के हाथों में कैमरे होते हैं तो कुछ के हाथ में मोबाइल, वह इन दृश्यों को लेकर जाना चाहते हैं। यहां एक बेहद मनमोहक और सुकून देने वाला दृश्य देखने को मिल रहा है।
पर्यावरणविद् सह पक्षी विशेषज्ञ दीपक कुमार झुन्नू उनके आगमन और लोगों की भावनाओं को एक अलग नजरिए से प्रस्तुत करते हैं। उनका कहना है कि यह संसार में बहुत कम जगह में पहुंचते हैं। इसलिए चकवा सिर्फ एक प्रवासी पक्षी नहीं है, बल्कि यह भागलपुर की गंगा और यहां के समृद्ध पक्षी संसार की अनमोल पहचान का हिस्सा बन चुका है। इनके बारे में बताया जाता है कि वह हर साल स्थान बदलते रहते हैं और उनकी पसंदीदा जगह भारत का भागलपुर है।
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नदी के किनारे इनको मिलता है पर्याप्त भोजन
प्रवास काल के दौरान विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य के अंतर्गत गंगा नदी में इनकी भारी मौजूदगी दर्ज की जाती है। मानव की तरह इनमें भी शांत स्थान, बहती हुई नदी का रुनझुन की आवाज, झरने, झील और तालाब की हरियाली इनको बेहद पसंद है। गंगा के शांत जलक्षेत्र और यहां के सुरक्षित रेतीले टापू इन पक्षियों को बहुत रास आते हैं। उनकी पसंदीदा चीज हमारी स्थानीय जैव-विविधता की समृद्धि को दर्शाते हैं।
वैज्ञानिक रूप से रुडी शेल्डक के नाम से इन पक्षियों को जाना जाता है। इनका मुख्य निवास स्थान मध्य एशिया, तिब्बत और लद्दाख के ऊंचे पठार हैं। जैसे ही सर्दियां आती हैं, वहां का मौसम बदलने लगता है। ज्यादा ठंडक और अधिकतर बर्फबारी होने के कारण इनको स्थान बदलना पड़ जाता है। इसीलिए यह लंबी दूरी तय करते हुए हिमालय मार्ग से भारत में प्रवेश करते हैं। जिन स्थानों में अक्सर यह रहा करते हैं, वहां पर सर्दियों के दौरान खाने की चीजें कम पड़ जाती हैं। ये पक्षी हिमालय को पार कर भारत के मैदानी इलाकों, विशेषकर गंगा बेसिन का रुख करते हैं। यह क्षेत्र और प्रकृति इनके लिए बेहतरीन भोजन बनते हैं।
जिला प्रशासन ने पक्षियों के करीब जाने से रोका
भागलपुर की गंगा नदी में इनको पसंद की चीजें खाने को मिल जाती हैं। यह जलीय पौधे, जलीय जीव, जंतु, कीड़े मकोड़े खाते हैं। उल्लेखनीय है कि गंगा नदी में डॉल्फिन के साथ-साथ चकवा जैसे खूबसूरत प्रवासी पक्षियों का आना यह साबित करता है कि यहां का पारिस्थितिक तंत्र आज भी इन जीवों के अनुकूल है। सुबह के समय हल्की ठंडक होती है। इस समय सूरज की सुनहरी किरणें धरा पर बिखर जाती हैं। ऐसे सुहाने मौसम में इन पक्षियों को उड़ते हुए लोग देखकर प्रसन्न हो जाते हैं।
यह ऐसे दृश्य होते हैं जो यहां के पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। जिले में इको-टूरिज्म (पर्यावरण पर्यटन) की असीम संभावनाओं को भी बल दे रहा है। वहीं, इन पक्षियों के आवास और इनके खाने-पीने के प्रबंध करने के लिए पर्यावरण भी दो एवं पक्षी प्रेमियों ने अपील की है उनका मानना है कि आकर्षित करने वाले यह प्राणी हमारे यहां एक पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं।
प्रवासी पक्षी चकवा और अन्य जलीय जीवों की सुरक्षा के लिए भागलपुर वन प्रभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिला प्रशासन और वन विभाग की टीम ने आगाह किया है की शिकार की आशंका के चलते बेजुबान प्राणियों और पशु पक्षियों की रक्षा के लिए टीमें तैनात की गई हैं। जलीय जीवों और पक्षियों का शिकार करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग की गाइडलाइन का पालन न करने पर होगी कार्रवाई
वन विभाग द्वारा विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य क्षेत्र में विशेष गश्ती अभियान चलाया जा रहा है। नदी कछुआ और पक्षी संरक्षण टीम लगातार गंगा की धाराओं और रेतीले टापुओं पर नजर रख रही है। वन अधिकारियों के अनुसार, गंगा के दियारा और तटीय इलाकों में जाल बिछाने या पक्षियों का शिकार करने वालों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय मछुआरों और नाविकों को भी जागरूक किया गया है।
इसके अलावा जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। लोगों को बताया जा रहा है किस तरह से पशु पक्षियों की रक्षा की जा सकती है। विभिन्न क्षेत्रों में पटाखे फोड़ने पर पाबंदी लगाई गई है। साथ ही उनके करीब जाने से रोका गया है। तेज ध्वनि वाले यंत्रों जैसे लाउडस्पीकर बचाने पर पाबंदी है। इन आदेशों को न मानने पर वन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
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