दस हजार में दस महीने तक कमाई का जरिया, Siwan में उद्यान निदेशालय का गेंदा फूल योजना
खबर सार :-
सिवान, जिले में गेंदा फूल की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसे किसानों की कमाई का जरिया बनाया जा रहा है। उद्यान निदेशालय एक खास योजना के तहत वित्तीय सहायता मुहैया कराएगा। कुछ ऐसे खास किस्म के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो एक साल तक पौधों से फूल देते रहेंगे।
खबर विस्तार : -
सिवान, किसानों के लिए सरकार की ओर से लाभ देने के लिए उद्यान निदेशालय ने गेंदा फूल उत्पादन एवं प्रसंस्करण योजना शुरू की है। इस योजना का ज्यादा लाभ किसानों को मिले, इसलिए प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है। योजना के तहत रबी और खरीफ मौसम में गेंदा फूल की खेती लिए ध्यान देना है।
इस खूशबू वाली फसल के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने का लक्ष्य बनाने के लिए सरकार की ओर से किसानों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकारी कर्मचारी और जिले के किसानों के योगदान में इस योजना के तहत कुल 24 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन में गेंदा फूल की खेती का लक्ष्य तय किया गया है।
योजना से 30 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य निर्धारित
जिले में गेंदा फूल की खेती को बढ़ावा देने वाली उद्यान निदेशालय की गेंदा फूल उत्पादन एवं प्रसंस्करण योजना की प्रशंसा की जा रही है। इसका उत्पादन किसानों को नया रोजगार का जरिया बन रहा है। योजना के अनुसार उत्पादन के साथ ही इसके प्रसंस्करण पर भी काम करना है। यह केवल एक व्यक्ति के माध्यम से नहीं होगा, सरकार का भी इसमें सहयोग रहेगा। जिला उद्यान पदाधिकारी विपिन कुमार पोद्दार ने गेंदा फूल की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर आने वाली लागत की जानकारी दी है।
उनके अनुभव के अनुसार, इसमें 82 हजार रुपये इकाई लागत आ सकती है। इतनी रकम पर किसानों को 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक अनुदान सरकार यानी विभाग से मिल जाएगा। इससे फूलों की खेती में लागत का बोझ नहीं रहेगा। खर्च कम करने में किसानों को मदद मिलेगी। किसानों का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक स्तर पर गेंदा उत्पादन करने के प्रति रूझान पैदा होगा। इस योजना के तहत करीब 30 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिनके पास अपनी जमीन नहीं, वह भी पाएंगे अनुदान
किसानों के सामने आय के श्रोत कम हैं। उनका मन खेती में भी नहीं लग रहा है। इसका कारण भी वह बताया करते हैं। मौसम की मार कभी बारिश, आंधी, ओला और सूखा के बाद उचित रेट न मिलने से वह मायूस हो चुके हैं। इस संबंध में जिला उद्यान पदाधिकारी का कहना है कि योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। फूल खेती में सरकार मदद कर रही है। यह पारंपरिक फसलों से ज्यादा मुनाफा देगी। प्रसंस्करण के जरिए ज्यादा लाभ के विकल्प हैं।
एक बार पौधा खिलने लगेगा, तो एक साल तक फूल देगा। बारबार की जुताई और बुवाई के साथ बीज का टेंशन नहीं रहेगा। इच्छुक किसान निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करें। किसानों के पास खेती है तो योजना का लाभ लेने के लिए खेती योग्य भूमि का उपयोग करें। इस योजना का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर और अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि की सीमा तय की गई है।
निर्धारित करार के आधार पर खेती हैं कर सकतेे
सरकार की ओर से जिन किसानों के नाम पर अपनी जमीन नहीं है, उनके लिए भी निर्धारित एकरारनामा के आधार पर लाभ में शामिल करने की योजना है। यानी जिन किसानों के पास जमीन नहीं है, वह दूसरे किसान का खेत लेकर यह खेती कर सकतेे हैं। फूलों की मांग बढ़ रही है। इसको देखते हुए किसानों के लिए अतिरिक्त आय श्रोत माना जा रहा है।
कुछ ऐसे भी किसान हैं, जो बीज का सिलेक्शन खुद करते हैं। उनके गंदा के पौधे सालभर खिलते हैैं। इस गेंदा का फूल हमेशा बिका करता है। इसकी खेती 10 हजार की लागत से शुरू कर सकते हैं। यह टेनिस बॉल गेंदा की खेती किसानों के लिए सालभर फूल उत्पादन का विकल्प दे सकती हैै। सबसे बड़ी इसकी खासियत है कि यह सभी मौसम में उगाया जा सकता है। इस वैरायटी को गर्मी, सर्दी और बारिश के मौसम में लगाया जा सकता है।
ज्यादा उपलब्ध रहेगा, तो खपत भी अच्छी रहेगी
फूलों की खेती हमेशा किसानों के लिए कम समय में आमदनी का अच्छा रहा है। अभी तक किसान इससे दूर रहे हैं, क्योंकि बाजार की उपलब्धता नहीं रही है। जबकि गेंदा फूल की मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है। वह शादी का अवसर हो या पूजा-पाठ का, त्योहार और हर उत्सव में भी इसका इस्तेमाल होता रहा है। इसकी उपलब्धता के अनुसार ही लोग इसे इस्तेमाल करते आए हैं। ज्यादा उपलब्ध रहेगा, तो खपत भी अच्छी रहेगी। फूलों की मंडी अभी भी हर स्थानों पर नहीं हैं। यद्यपि सरकार इस दिशा में काम कर रही है।
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