बांदाः नीति आयोग की टीम ने आकांक्षी विकासखंड का भ्रमण किया, जैविक ग्राम में खेती देखी
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश के बांदा जिला में नीति आयोग की टीम ने उन्नत खेती देखी। यहां पर किसानों को दिए जाने वाले बीजों की गुणवत्ता परखी। खेतों में फसल देखकर वह हैरान रह गए। केंद्र, वैज्ञानिक, किसान और युवकों की भूमिका की सराहना की गई।
खबर विस्तार : -
बांदा, उत्तर प्रदेश नीति आयोग की टीम जनपद बांदा की खेती को देखने पहुंची थी। लोगों के द्वारा उन्नत खेती की जानकारी मिलने के आधार पर एवं खेती में किए जा रहे बांदा के प्रयासों का निरीक्षण भी कार्यक्रम का हिस्सा था। यहां गांवों में पहुंची टीम चकित रह गई। जो जिले अधिकतर खेती में पीछे हो रहे थे, वहां आज उन्नत खेती की जा रही है। यहां के किसानों और वैज्ञानिकों के साथ स्थानीय युवाओं ने खेती के प्रति दिलचस्पी दिखाई और बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
खेतों में हरियाली दूर से दिख रही है। जिला बांदा के भ्रमण कार्यक्रम के तहत राज्य के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के विशेष सचिव रणविजय यादव भी थे। जानकारी के आधार पर पहुंची अधिकारियों की टीम ने बिसंडा रोड स्थित जैविक ग्राम में किसान बोधगम्य किसान उत्पादक कंपनी के कार्यों का मंगलवार को जायजा लिया। इनके सराहनीय कार्य की चर्चा दूर-दूर तक है। इसीलिए अधिकारियों की टीम इस क्षेत्र में विशेष खेती को देखने पहुंची थी।
युवाओं के किये जा रहे कार्यों की सराहना की
आखिर नया क्या है, इसी सवाल की पूर्ति के लिए टीम वहां तक पहुंची थी। यहां कसानों के साथ मिलकर प्राकृतिक खेती, देशी बीजों के संरक्षण, उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के लिए प्रयास किए गए जो कि आज सफल हो रहे हैं। टीम ने सारी बातें सुनी। यहां पर वैज्ञानिकों, किसानों और युवाओं के किये जा रहे कार्यों की सराहना की। यहां का भ्रमण करने के बाद वह विभिन्न स्थानों पर भी गए। सबसे पहले वह बीज बिक्री केंद्र पहुंचे।
यह ऐसा स्थान है, जहां पर आज भी पारंपरिक फसलों के बीच बिकते हैं और उनकी खेती भी लोग करते हैं। इनकी खेती उन्नतशील मानी जा रही है। अच्छी पैदावार के लिए इन किसानों की खेती उदाहरण हैं। भ्रमण की शुरुआत किसान उत्पादक कंपनी के बिक्री केंद्र से हुई। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित श्रीवास्तव ने स्थानीय स्तर पर तैयार और बेचे जा रहे कृषि उत्पादों की जानकारी दी।
इनमें अतर्रा क्षेत्र का प्रसिद्ध महाचिन्नावर चावल, बुंदेलखंड की अरहर दाल, कठिया गेहूं सहित कई पारंपरिक कृषि उत्पाद शामिल रहे। इसके बाद रणविजय यादव ने जैविक खाद तैयार करने की इकाई और देशी धान की विभिन्न प्रजातियों के प्रदर्शन खेतों का निरीक्षण किया। जैविक खाद्य की जरूरत भी खेतों के लिए होती है, लेकिन किसान रसायन की तरफ ज्यादा भाग रहे हैं और जैविक खेती फिसल रही है। वहीं, जैविक खेती यहां के लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो रही है।
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गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जाते
टीम ने इस संस्थान में कई महत्वपूर्ण प्रश्नों की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि किसान उत्पादक कंपनी किसानों के साथ मिलकर बीज से लेकर उत्पादन और फिर बाजार तक की पूरी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास कर रही है। यहां पर भी पारंपरिक और उन्नतशील बीजों की बिक्री की जाती है। किसानों को देशी और पारंपरिक प्रजातियों के गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जाते हैं। किसान इन बीजों से अपने खेतों में फसल तैयार करते हैं और उत्पादन के बाद फसल तथा बीज को दोबारा कंपनी से जोड़ते हैं।
इससे एक ओर देशी बीजों का संरक्षण हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। यहां के केंद्र किसानों की अच्छी मदद करते हैं। किसान जो फसल तैयार करते हैं, उनकी बिक्री करने में यह सहायक होते हैं। किसान जिन फसलों को बोना चाहते हैं, उन फसलों के लिए उन्नत बीजों की व्यवस्था भी यहां रहती है।
साथ ही किसानों को उचित सलाह भी मिल जाती है। कंपनी कार्यालय में रणविजय यादव को लकी बैंबू तथा महाचिन्नावर चावल, अरहर दाल और कठिया गेहूं भेंट किए गए। इस दौरान प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा देशी फसलों और पारंपरिक बीजों को फिर से प्रचलन में लाने के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा हुई। दरअसल, यह कुछ ऐसी फैसले हैं जो पारंपरिक खेती से हट गई हैं।
अधिक से अधिक पौधे लगाने पर बल दिया
लोगों का रुझान इनके प्रति न होने के कारण अब खेतों में यह कम दिखाई पड़ती हैं। सरकार के प्रोत्साहन के बाद और किसान कृषि केंद्रांे में वैज्ञानिकों की मदद के बाद उनके प्रति प्रोत्साहन बढ़ रहा है। इसीलिए केदो में इनकी बिक्री हो रही है और किसानों को अधिक से अधिक प्रोत्साहित भी किया जाने लगा है। रणविजय यादव ने किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए बुंदेलखंड के पारंपरिक और प्राकृतिक कृषि उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया।
उन्होंने कानपुर अथवा लखनऊ जैसे बड़े शहरों में किसान उत्पादक कंपनी का अपना बिक्री केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि स्थानीय किसानों के उत्पाद सीधे बड़े उपभोक्ता बाजार तक पहुंच सकें। पर्यावरण संरक्षण के लिए टीम ने पौधे लगाने की इच्छा जताई। जैविक ग्राम परिसर में रणविजय यादव ने हरिशंकरी पौधे का रोपण भी किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर बेसिक शिक्षा अधिकारी अव्यक्त राम तिवारी, किसान बोधगम्य कंपनी के निदेशक शिवनारायण, हरिमोहन श्रीवास्तव, प्रवर्तक राजेंद्र कुमार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित श्रीवास्तव, लेखाकार अमन तिवारी सहित किसान सदस्य और अन्य सहयोगी मौजूद रहे।
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