बारिश बनी संजीवनीः भागलपुर में झमाझम बरसे बदरा, धान की फसलों को मिला नया जीवन
खबर सार :-
डीजल महंगा और बिजली का अनिश्चित समय किसानों की परेशानी के साथ ही फसल की पैदावार पर भारी पड़ने लगा। इसी बीच भागलपुर में मंगलवार को बारिश हुई और किसानों को इससे बड़ी राहत हुई है।
खबर विस्तार : -
भागलपुर, जिले में मंगलवार को हुई झमाझम बारिश ने किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी है। इससे पहले कई दिनों से उमस भरी गर्मी और सूखे जैसे हालात बने रहे। खेतों को लगातार पानी की जरूरत थी। धान की फसल पानी में ही खिलती है। उसकी जरूरत भर पानी नहीं मिलने से फसल कमजोर पड़ने लगती है। मंगलवार को यह कमी दूर हो गई।
धान के पौधों पर मंडराने लगा था संकट
किसान समय से ही फसल को पानी का बंदोबस्त करना पसंद करते हैं। फसल के लिए ही पानी से संबंध पर कहा गया है, का वर्षा जब कृषि सुखाने, यानी जब फसल सूखने लगे या सूख जाए, तब पानी की जरूरत नहीं रह जाती है। इस क्षेत्र में सितंबर के अंतिम हफ्तों में खेतों की नमी तेजी से कम हो रही थी। इसका कारण यही रहा। यहां पानी के बिना धान के पौधों पर संकट मंडराने लगा था। किसान आसमान की ओर देखकर मायूस होता रहा। लेकिन मंगलवार को उसकी मायूसी मुस्कुराहट में बदल गई।
ट्यूबवेल चलाकर सिंचाई करना पड़ेगा
बारिश होने से तापमान में गिरावट हुई और इससे लोगों को राहत भी मिली। मंगलवार को हुई बारिश खेतों में लहलहा रही धान की फसल के लिए यह अमृत साबित हुई है। इस समय धान की फसल वानस्पतिक वृद्धि और बालियां निकलने की बेहद महत्वपूर्ण अवस्था में है। ऐसे में इनको पर्याप्त पानी नहीं मिलने से धान की बालियों में दानों का भराव कमजोर हो जाता। किसान विशेषज्ञ कहते हैं कि पानी से ही दाने ठोस, चमकदार और वजनदार बनेंगे। लेकिन यदि खेतों में प्राकृतिक रूप से पानी नहीं मिला तो किसानों को डीजल पंप या ट्यूबवेल चलाकर सिंचाई करना पड़ेगा। इसीलिए अभी और पानी की जरूरत पड़ेगी।
बारिश से पौधों की प्राकृतिक धुलाई हो गई
यह सभी जानते हैं कि पंप से पानी की पूर्ति करना काफी खर्चीला होता है। फिलहाल, पिछले दिन की बारिश से किसानों का लागत खर्च काफी हद तक बच जाएगा। इस बारिश के कई फायदे बताए जा रहे है। इनमें बारिश से पौधों की प्राकृतिक धुलाई हो गई है। इससे धान में लगने वाले पत्ता लपेट सुंडी और रस चूसने वाले हानिकारक कीटों व फफूंदजनित रोगों का प्रकोप काफी कम हो जाएगा। यह अक्सर फसल पर अपनी पहुंच बना लेते हैं। पानी गिरने के बाद इनमें कमी देखी जाएगी। जिले के स्थानीय किसानों ने इस बारिश पर खुशी जाहिर की है।
यह भी पढ़ें : आयुर्वेद दिवस पर CM रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने दीं शुभकामनाएं, बताया स्वस्थ जीवनशैली का आधार
पीले पड़ रहे पौधे हरे हो गए
जगदीशपुर के किसान राजकुमार पंजियारा का कहना है कि बिजली का आना-जाना और महंगा डीजल फसल सूखने का कारण बन रहा था। इस हालत में खेतों को बचाना मुश्किल हो रहा था। यहां के लोग पंपिंगसेट चलाकर सिंचाई करने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच ऊपर वाले ने हमारी सुन ली। इस बार की सिंचाई से हम बच गए। जो पौधे पीले पड़ रहे थे, वे फिर से हरे-भरे हो गए हैं। इन कारणों से हम खुश हैं। फसल की पैदावार भी अच्छी होने की उम्मीद बढ़ गई है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञों ने इस बारिश को धान की फसल के लिए वरदान बताया है।
किसान कर रहे बंपर पैदावार की उम्मीद
सितंबर के तीसरे-चौथे सप्ताह में होने वाली बारिश ही फसल का भविष्य तय करती है। इसमें ज्यादा इंतजार भी नहीं किया जा सकता है। किसान को हर हाल में फसल की सिंचाई का बंदोबस्त करना पड़ता है। यह कोई एक भी बारिश समय के बाद मिले तो फसल चौपट हो जाती है। धान की संजीवनी खेतों को पानी से ही बनती है। इस समय मिट्टी में नमी रहने से पौधे जमीन में मौजूद यूरिया, जिंक और अन्य पोषक तत्वों को आसानी से जड़ों तक पहुंचा पाते हैं।
कुछ जगह पर असमान खबरें भी हैं। इनमें किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि जिन निचले खेतों में जलजमाव की स्थिति बन रही है, वहां जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई। इसका ध्यान सभी जगहों पर रखना होगा, ताकि फसलों को नुकसान न पहुंचे। वैसो तो इस बारिश ने भागलपुर के कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत दी हैै। यही राहत किसान की खुशी बनकर इठलाने वाली भी है। किसान बारिश के बाद फसल देखने जरूर जा रहे हैं। हम कह सकते हैं के इस साल धान की बंपर पैदावार की उम्मीदें फिर से जगी है।
यह भी पढ़ें : कुलंजन की खेती धान और गेहूं से काफी ज्यादा लाभकारी, बन सकता है छोटा उद्योग
अन्य प्रमुख खबरें
-
कुलंजन की खेती के कई फायदे, आमदनी का श्रोत है फसल की जड़
2026-09-20
-
किसान और गरुड़ पक्षी में निभ रही दोस्ती, मक्का अब हो गया सुरक्षित
2026-09-20
-
खेत की मिट्टी को केंचुए का इंतजार, फसलों में कमजोर हो रही पैदावार
2026-09-20
-
एक साथ कई लाभ वाली फसल है जौ, बीज पर भी लें अनुदान
2026-09-19
-
असम के बक्सा में हाथी-बाघ पर आफत, जंगली घास छीन रही भोजन
2026-09-18
-
ड्रोन से खेतों के कीट मारेंगे किसान, जैविक खेती छोड़ी तो ब्लैक लिस्ट में नाम
2026-09-18
-
जोधपुर गया औरैया के 50 किसानोें का दल, पांच दिन सीखेंगे उन्नतखेती
2026-09-16
-
गुस्से में मंत्रीः खेतों तक पहुंचाएं योजनाएं, किसानों का करें सहयोग-शाही
2026-09-15
-
असम के सोनापुर में मछली पालन में नवाचार, आधुनिक तकनीक से मिल रही सफलता
2026-09-15
-
आत्मनिर्भरता का example : सूखे में भी 30 day में आ गईं मोठ की फलियां
2026-09-14
-
हल्दी की खेती पर सरकारी ध्यान, किसानों की आय में हो रही वृद्धि
2026-09-13
-
बाजरा: जमीन का जल बचाए, महफिल को व्यंजन से भरे
2026-09-11
-
कृषि मंत्री शाही की अपील, फसलों के बीजों की बुकिंग में फ्री का लें लाभ
2026-09-07
-
पैसे कमाने हैं तो बदलें परंपराएं, गोमा यशी बेल लगाएं
2026-09-07
-
रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन से मजबूत हुई खाद्य सुरक्षा, भंडारण नेटवर्क भी बना सहारा
2026-09-03