गुना में गुलाब की खेती से मुनाफा कमा रहे किसान, 30 लाख तक आय बढ़ाने का लक्ष्य

खबर सार :-

मध्य प्रदेश के गुना में पाॅलीहाउस के जरिए गुलाब की खेती लोकप्रिय हो रही है। कलेक्टर किशोर कन्याल ने भदौर गांव का दौरा किया। किसान तकनीक आधारित खेती में रुचि ले रहे हैं।
गुना में लोकप्रिय हो रही गुलाब की खेती, 8 लाख फूल उत्पादन की तैयारी

खबर विस्तार : -

गुना: मध्य प्रदेश में 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' के तहत गुना के कलेक्टर किशोर कन्याल ने शुक्रवार को भदौर गांव का दौरा किया। वहां प्रगतिशील किसान धर्मवीर सिंह रघुवंशी ने एक एकड़ में गुलाब का पॉलीहाउस स्थापित किया है। एक महीने पहले इस पॉलीहाउस में लगभग 30,000 गुलाब के पौधे लगाए गए थे और चौथे महीने से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

कलेक्टर कन्याल ने बताया कि गुना जिले में पॉलीहाउस के जरिए गुलाब की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। जिले के उच्च शिक्षित युवा भी खेती के इस आधुनिक और तकनीक-आधारित तरीके में गहरी रुचि ले रहे हैं। फिलहाल, किसान ऐसे पॉलीहाउस से प्रति एकड़ सालाना ₹15 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि उन्नत तकनीक, बेहतर उत्पादन प्रबंधन और आधुनिक मार्केटिंग सिस्टम का उपयोग करके इस आय को प्रति एकड़ सालाना ₹25–30 लाख तक बढ़ाया जाए।

एक एकड़ से सालाना 7–8 लाख फूल का लक्ष्य

उन्होंने बताया कि अभी एक एकड़ पॉलीहाउस से लगभग 5 लाख गुलाब के फूल मिलते हैं। उन्नत तकनीकों का उपयोग करके इसे बढ़ाकर प्रति एकड़ सालाना 7–8 लाख फूल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, फूलों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बेहतर मार्केटिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि गुना के गुलाबों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान मिल सके। पॉलीहाउस संचालक धर्मवीर सिंह रघुवंशी के बेटे, आदित्य रघुवंशी, अभी दिल्ली के फूल बाजार का अध्ययन कर रहे हैं और वहां अपने गुलाब बेचने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही, भविष्य में इन गुलाबों के निर्यात की संभावनाओं को तलाशने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

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50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में गुलाब की खेती

गौरतलब है कि गुना जिले में अभी 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पॉलीहाउस के जरिए गुलाब की खेती की जा रही है। किसान तेजी से अत्याधुनिक सुविधाओं को अपना रहे हैं, जिनमें सेंसर-आधारित ऑटोमेशन, फर्टिगेशन सिस्टम (सिंचाई के साथ खाद देने की प्रणाली), फार्म-गेट पैकहाउस और कोल्ड स्टोरेज यूनिट शामिल हैं। बागवानी विभाग (हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट) इन गतिविधियों के लिए पात्रता के आधार पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रहा है। 

किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

इस अवसर पर, बागवानी विभाग के उप-निदेशक के.पी.एस. किरार ने बताया कि विभाग किसानों को संगठित करने और उन्हें क्लस्टर-आधारित खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। जब एक ही क्षेत्र के किसान समूह के रूप में एक जैसी फसल उगाते हैं, तो फसल कटाई के बाद के प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचा—जैसे पैक हाउस, ग्रेडिंग और पैकेजिंग सुविधाएं, कोल्ड स्टोरेज और मार्केटिंग सिस्टम सामूहिक रूप से विकसित करना आसान हो जाता है। इससे किसानों की लागत कम होगी और उन्हें अपनी उपज के लिए बेहतर दाम मिल सकेंगे।

क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं

उप-निदेशक ने बताया कि 'फ्लोरीकल्चर एरिया एक्सपेंशन स्कीम' (पुष्प कृषि क्षेत्र विस्तार योजना) के तहत, गुना और बमोरी विकास खंडों में पॉलीहाउस में गुलाब की खेती के अलावा, खुले खेतों में फूलों की खेती के लिए भी क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा और ग्लेडियोलस जैसे फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पूरे जिले में फूलों के उत्पादन का एक व्यापक नेटवर्क तैयार करना है।

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