बोले कृषि मंत्रीः किसान खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें,  फसल विविधीकरण पर दें जोर

खबर सार :-

रबी के मौसम में किसानों को सब्सिडी वाली दरों पर 12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने की तैयारी सरकार ने कर ली है। इसके अलावा, 10 लाख किसानों को दलहन और तिलहन की मिनी-किट भी बांटी जाएंगी।
वैज्ञानिक उन्नतशील किस्मों के बीजों पर करें शोध: सूर्य प्रताप शाही

खबर विस्तार : -

लखनऊः उत्तर प्रदेश देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 22 प्रतिशत का योगदान देता है। यह हाल तब है, जबकि कुल कृषि भूमि का 11 प्रतिशत हिस्सा ही प्रदेश में है। सरकार नए प्रयासों में 600 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाकर एक बड़ी दिक्कत पराली की साल्व करने जा रही है। उत्तर प्रदेश के कृषि के साथ ही कृषि शिक्षा और कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के 37वें स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के सभागार में यह बातें बताई गई।

कार्यक्रम का विषय था “उत्पादकता से परेः

यहां पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी थी। इस कार्यक्रम का विषय था “उत्पादकता से परेः। उत्तर प्रदेश के किसान और वैज्ञानिक भी यहां थे। उत्तर प्रदेश में कृषि के भविष्य की नई परिकल्पना। इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों, कृषि संस्थानों और प्रगतिशील किसानों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया। कृषि मंत्री ने बताया कि देश की कुल कृषि योग्य भूमि का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। राज्य में फसल सघनता 196 प्रतिशत तक पहुंच गई है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए फसल के अवशेषों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस कार्यक्रम के दौरान खेती के नए व नवाचारी तरीकों को अपनाने में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले सम्मनित किए गए। सात किसानों को कृषि में नए प्रयोग करने और फसलों की विविधता अपनाने के लिए सम्मानित किया गया।

एक ही भूमि पर साल भर में एक से अधिक फसलें उगाई जा रही

एक ही भूमि पर साल भर में एक से अधिक फसलें उगाई जा रही हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि जमीन खाली न रहे, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि होती है। मंत्री ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि पहले पारंपरिक खेती के समय तुलना में देश की जनसंख्या में काफी वृद्धि हुई है। कृषि मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराने की पहल की सराहना की। उन्होंने देश की आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उपज की गुणवत्ता में सुधार करने पर भी ध्यान केंद्रित किया। कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य में लगभग 80 प्रतिशत कृषि भूमि तक अब सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। पानी मुख्य रूप से नहरों के माध्यम से है। इससे किसानों को अलग-अलग मौसमों में फसलें उगाने में मदद मिलती है।

12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे

मौजूदा रबी सीजन के लिए जरूरी है कि किसानों को रियायती दरों पर 12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बाजार में भारी मांग और जिनसे किसानों को अधिक आय हो सकती है। गाय के गोबर, गोमूत्र और फसल अवशेषों का उपयोग करके प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राकृतिक खेती को एक जन आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए, ताकि यह अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके। यूपी में लगातार अनिश्चित होती जा रही बारिश पर निर्भर फसल निर्भर नहीं रह सकती है।

इसलिए सिंचाई के प्रबंध पर सोचना होगा। आवश्यकतानुसार निर्धारित पानी पैदावार बढ़ा सकती है। किसान फसलों को सही मात्रा में पानी देकर उनकी वृद्धि की स्थिति देखता रहता है। फिर अगली सिंचाई के लिए वह निहारता रहता है। हालांकि फसलों को पानी देने का एक कारगर तरीका होना चाहिए। दिन के ठंडे समय में सिंचाई करना चुन सकते हैं। सूरज की गर्मी कम हो, जिससे वाष्पीकरण कम हो जाता है। ऐसे समय का ध्यान दिया जा सकता है। 

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