लक्ष्मी पूजा से पहले फूलों की कीमतें नियंत्रित, मिट्टी की महंगाई से Potter परेशान
खबर सार :-
इस बार की दीपावली में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां महंगी हो सकती हैं। कारण है कि जिस मिट्टी से मूर्तियों का निर्माण किया करते थे, उसकी कीमत कई कारणों से बढ़ गई है। जो गाड़ी 25 हजार की थी, वही मिट्टी अब 50 हजार की दे रहे हैं।
खबर विस्तार : -
मेदिनीपुर, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर जिले में दीवाली की तैयारियां चल रही हैं। बाजारों में जमकर भीड़ है। हालांकि खरीदारों की संख्या कम है। सजावट की सामग्री और पूजा की सामग्री के दामों में काफी फर्क है। इस बार जहां फूलों के दाम स्थिर रहे, वहीं मूर्तियों की कीमत काफी ज्यादा है। जिस मिट्टी से मूर्तियां बनाई जा रही हैं, उसके दाम काफी बढ़े हुए हैं।
आमदनी कम होने का कारण है विक्री का कमजोर होना
कोजागरी लक्ष्मी पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। लक्ष्मी प्रतिमा बनाने वाले Potter के सामने कच्ची मिट्टी की कमी बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। मेदिनीपुर शहर के खयरुल्लाचक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिट्टी के बर्तन बनते थे। इस बार यह काम प्रभावित हुआ है। यहां के कलाकारों का कहना है कि प्रतिमा बनाने के लिए मुख्य रूप से डायमंड हार्बर और दक्षिण 24 परगना के विभिन्न क्षेत्रों से मिट्टी मंगानी पड़ती है। पिछले साल यहां से एक गाड़ी मिट्टी की कीमत लगभग 25 हजार रुपये थी। इस बार दाम बढ़ा दिए गए हैं। वही गाड़ी 25 हजार वाली 50 से 60 हजार रुपये में दे रहे हैं। इतनी रकम दिए जाने के बावजूद पर्याप्त मिट्टी नहीं मिल रही है। मिट्टी की कीमतों में भारी वृद्धि और कच्चे माल की कमी से लक्ष्मी प्रतिमा बनाने वाले कुम्हारों की परेशानी बढ़ गई है।
160 वाली मूर्ति 110 में बिक रही थी
जानकारों का कहना है कि पहले जो लोग 500 से अधिक सांचे वाली लक्ष्मी प्रतिमाएं बनाते थे, वही लोग इस बार मूर्ति का निर्माण कम कर दिया है। इसका कारण केवल मिट्टी ही है। छोटी प्रतिमाओं की थोक कीमत पिछले वर्ष 90 से 110 रुपये थी। इस बार उसी सांचे वाली मूर्ति की कीमत 150 से 160 रुपये हो गई है। कुम्हार का काम कर रहीं अरुणिमा पाल भी मिट्टी की कमी के कारण प्रतिमाओं के निर्माण में कमी कर दी है।
उनका कहना है कि वाजिब दाम मिल पाना कठिन बन रहा हैं। इसका असर उनकी आमदनी पर पड़ने जा रहा है। मिट्टी के दीये और कुल्हड़ बनाने वाले इस संकट से प्रभावित हैं। दीपावली के दौरान कई तरह के खिलौने भी बनाए जाते हैं। घर-घर में होने वाली पूजा के लिए बाजारों में फूलों की खरीदारी अभी से बढ़ गई है।
खुश हैं इसबार फूल के कारोबारी
दीवाली के दौरान इस बार फूलों की अच्छी कमाई का अवसर मिलने जा रहा है। यद्यपि हाल में ही नवरात्र के दौरान खूब फूल बिके, अब धनतेरस और दीवाली है। करीब एक सप्ताह तक खरीदारी होती रहेगी। पैदावार और पर्याप्त आपूर्ति के कारण कीमतें सामान्य तो हैं, लेकिन नुकसान नहीं है। यह लोगों की पहुंच में भी बनी हुई हैं। इससे जहां मध्यम वर्ग के परिवारों को राहत मिली है, वहीं फूल बेचकर किसान भी संतुष्ट हैं।
जिले के कोलाघाट, देउलटी और केशापाट सहित विभिन्न फूल बाजारों में अच्छी चहल-पहल बनी हुई है। बाजार में कमल, गेंदा, रजनीगंधा, गुलाब और अपराजिता आदि के अलावा तमाम तरह के फूल हैं। बंगाल में फूल उत्पादक एवं फूल व्यवसायी समिति के महासचिव नारायणचंद्र नायक हैं। उनका कहना है कि इस वर्ष फूलों की खेती में लाभ मिल रहा है। इसका कारण है कि बाढ़ नहीं आई और इससे उत्पादन अच्छा हुआ है। बाजार में पर्याप्त आपूर्ति रहने से कीमतें भी नियंत्रण में हैं।
माला बनाकर कमाई कर रहे हैं लोग
फूल व्यापारियों का कहना है कि कोलाघाट और देउलटी के बाजारों में एक कमल की कीमत करीब 10 रूपये, रजनीगंधा के छोटे फूलों की कीमत लगभग 400 रुपये प्रति किलो, 24 डंडियों का एक गुच्छा 250 रुपये, एक गुलाब की कीमत साढ़े तीन रुपये, अपराजिता 60 से 70 रुपये किला, दोपाटी 40 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रही है। साथ ही बाजार में लाल गेंदा के छोटे फूल 60 से 70 रुपये तथा बसंती गेंदा 100 से 120 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। माला बनाकर भी लोग विक्री कर रहे हैं। इसमें तीन फुट की लाल गेंदे की माला 12 रुपये और बसंती गेंदे की माला 15 रुपये में बिक रहा है।
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