बर्नस्टीन ने घटाया निफ्टी का टारगेट, 25,000 का नया लक्ष्य; कमाई में सुस्ती और महंगे तेल से सीमित रहेगी तेजी
खबर सार :-
बर्नस्टीन ने निफ्टी का साल के अंत का टारगेट 26,000 से घटाकर 25,000 किया है। अमेरिकी ट्रेड डील की अनिश्चितता, महंगा कच्चा तेल और कमजोर कॉरपोरेट आय बाजार की तेजी सीमित कर सकते हैं। छह साल के निचले वैल्यूएशन के बावजूद भारतीय शेयर महंगे हैं।
खबर विस्तार : -
Bernstein Report: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कंपनियों की कमाई में सुधार को लेकर बनी चिंताओं के बीच ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने निफ्टी के लिए अपने साल के अंत का टारगेट प्राइस घटाकर 25,000 कर दिया है। इससे पहले ब्रोकरेज ने इसके लिए 26,000 का लक्ष्य निर्धारित किया था। अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कॉरपोरेट आय पर दबाव इसके प्रमुख कारण हैं। बर्नस्टीन का मानना है कि बाजार में गिरावट के बाद कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में तेजी लंबे समय तक कायम रहना मुश्किल है।
लगातार दूसरी बार घटाया निफ्टी का लक्ष्य
बर्नस्टीन ने निफ्टी के टारगेट में लगातार दूसरी बार कटौती की है। इस साल की शुरुआत में ब्रोकरेज फर्म ने इंडेक्स के लिए 28,100 का लक्ष्य रखा था। उस समय बाजार में पिछले साल के अंत के स्तर से करीब 7 फीसदी की बढ़त की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, बदलते वैश्विक हालात और भारतीय कंपनियों की कमाई को लेकर कमजोर अनुमान के कारण अब यह लक्ष्य घटाकर 25,000 कर दिया गया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, बिगड़ती व्यापक आर्थिक परिस्थितियां, ऊर्जा की महंगी कीमतें और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बाजार की तेजी को सीमित कर सकते हैं। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर स्पष्टता की कमी भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही है। ऐसे में बाजार में सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे मजबूत तेजी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
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गिरावट के बाद रिकवरी पर टिकी उम्मीदें
बर्नस्टीन ने अपनी भारत स्ट्रेटजी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सकारात्मक रिटर्न की उम्मीद बाजार में गिरावट के बाद संभावित रिकवरी पर आधारित है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय शेयर बाजार के बुनियादी परिदृश्य में व्यापक सुधार हो गया है। ब्रोकरेज के अनुसार, निवेशकों को बाजार में संभावित उछाल और कंपनियों की वास्तविक कमाई के बीच अंतर समझना चाहिए। यदि कॉरपोरेट आय में अपेक्षित सुधार नहीं होता और वैश्विक आर्थिक दबाव बना रहता है, तो शेयरों की कीमतों में टिकाऊ तेजी आना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकती हैं। इसलिए बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक आय के आंकड़ों, वैश्विक परिस्थितियों और व्यापार संबंधी घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
छह साल के निचले स्तर पर निफ्टी का पीई रेशियो
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के बीच निफ्टी का अगले 12 महीनों का प्राइस-टू-अर्निंग्स (पीई) रेशियो घटकर 16.6 पर आ गया है। बर्नस्टीन के अनुसार, यह पिछले छह वर्षों का सबसे निचला स्तर है। जून 2022 के बाद पहली बार इंडेक्स का वैल्यूएशन 17 गुना से नीचे पहुंचा है। यह स्तर कोविड-19 के दौरान बाजार में आई गिरावट और वर्ष 2022 की कमजोरी के समय देखे गए वैल्यूएशन के करीब है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में कमाई में मामूली वृद्धि के बावजूद निफ्टी का वैल्यूएशन छह साल के निचले स्तर पर पहुंचना निवेशकों को आकर्षक अवसर जैसा लग सकता है। हालांकि, बर्नस्टीन ने आगाह किया है कि केवल ऐतिहासिक वैल्यूएशन से तुलना करके बाजार को सस्ता मान लेना भ्रामक हो सकता है। शेयरों की उचित कीमत का आकलन करते समय कंपनियों की भविष्य की कमाई और आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
एशियाई बाजारों के मुकाबले अब भी महंगे भारतीय शेयर
बर्नस्टीन का कहना है कि हालिया गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर कई अन्य एशियाई बाजारों की तुलना में महंगे बने हुए हैं। इसकी वजहों में व्यापक बाजार की कमजोरी के बीच घरेलू फंड का मजबूत निवेश प्रवाह और भारतीय बाजार का अपेक्षाकृत ऊंचा वैल्यूएशन शामिल हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सिर्फ गिरते पीई रेशियो को खरीदारी का संकेत मानना पर्याप्त नहीं होगा। बाजार की टिकाऊ तेजी के लिए कंपनियों की कमाई में ठोस सुधार और आर्थिक अनिश्चितताओं में कमी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल बर्नस्टीन का आकलन यही है कि निफ्टी में रिकवरी की गुंजाइश मौजूद है, लेकिन आय संबंधी चिंताओं और वैश्विक दबावों के चलते तेजी की संभावनाएं सीमित रह सकती हैं।
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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)....
1. बर्नस्टीन ने निफ्टी का नया टारगेट कितना तय किया है?
बर्नस्टीन ने निफ्टी का साल के अंत का टारगेट 26,000 से घटाकर 25,000 कर दिया है।
2. बर्नस्टीन ने निफ्टी का टारगेट क्यों घटाया है?
अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर कॉरपोरेट आय और बिगड़ते वैश्विक आर्थिक हालात इसके प्रमुख कारण हैं।
3. क्या मौजूदा स्तर पर भारतीय शेयर बाजार सस्ता हो गया है?
निफ्टी का पीई रेशियो छह साल के निचले स्तर 16.6 पर आ गया है, लेकिन बर्नस्टीन के मुताबिक भारतीय शेयर अब भी कई एशियाई बाजारों के मुकाबले महंगे हैं।
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