वैश्विक बाजारों में हाहाकार के बीच सेंसेक्स 570 अंक उछला, निफ्टी में भी तेजी, इन सेक्टरों ने संभाली कमान

खबर सार :-

वैश्विक दबाव के बावजूद सेंसेक्स 570 अंक उछला और निफ्टी में 0.69% की तेजी आई। आईटी, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों ने बाजार को सहारा दिया, जबकि अमेरिकी महंगाई, विदेशी बिकवाली और एशियाई बाजारों की कमजोरी से आगे भी उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है।
वैश्विक गिरावट बेअसर! सेंसेक्स 570 अंक उछला, निफ्टी भी झूमा

खबर विस्तार : -

Stock Market News: वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और अमेरिका में महंगाई बढ़ने की चिंता के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में खुले और बाद में तेजी और बढ़ गई। खबर लिखे जाने तक बीएसई सेंसेक्स 569.55 अंक यानी 0.78 प्रतिशत उछलकर 73,351.44 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने 22,780.85 का उच्चतम स्तर छुआ, जो पिछले बंद के मुकाबले 158.15 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है।

हरे निशान में खुला बाजार, बाद में बढ़ी तेजी

30 शेयरों वाला सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र में 72,781.89 पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 72,965.80 पर खुला, जो 183.91 अंक यानी 0.25 प्रतिशत की शुरुआती बढ़त थी। इसी तरह निफ्टी 50 अपने पिछले बंद स्तर 22,622.70 से 48.59 अंक यानी 0.21 प्रतिशत ऊपर 22,671.30 पर खुला। शुरुआती बढ़त के बाद दोनों प्रमुख सूचकांकों में खरीदारी बढ़ी और बाजार ने ऊंचे स्तरों की ओर रुख किया। हालांकि, व्यापक बाजार में तस्वीर उतनी मजबूत नहीं रही। शुरुआती कारोबार में निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.60 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 0.12 प्रतिशत नीचे रहा। इससे संकेत मिला कि तेजी का फायदा सभी श्रेणियों के शेयरों को समान रूप से नहीं मिला।

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आईटी, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में खरीदारी

सेक्टोरल सूचकांकों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। निफ्टी आईटी, एफएमसीजी, ऑटो और प्राइवेट बैंक सूचकांक सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे। इन क्षेत्रों में करीब 2 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इन शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को मजबूती देने में मदद की। इसके उलट निफ्टी मेटल करीब 1 प्रतिशत गिरकर सबसे कमजोर सेक्टरों में रहा। पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इस तरह प्रमुख सूचकांकों की तेजी के बावजूद बाजार में क्षेत्रवार प्रदर्शन असमान बना रहा।

अमेरिकी महंगाई से बढ़ी ब्याज दरों की चिंता

बाजार की वैश्विक पृष्ठभूमि कमजोर बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई दर अगस्त के 3.4 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई। उम्मीद से अधिक महंगाई ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इससे अक्टूबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की आशंका मजबूत हुई है। महंगाई और ब्याज दरों की चिंता के कारण अमेरिकी शेयर बाजारों में बिकवाली देखने को मिली। टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव अधिक रहा और नैस्डैक सूचकांक 1.88 प्रतिशत तक गिर गया। इसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जापान का निक्केई 4 प्रतिशत से अधिक और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7 प्रतिशत से ज्यादा नीचे कारोबार करता दिखा।

एआई शेयरों में करेक्शन से एफआईआई का रुख बदलने की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े शेयरों में जारी गिरावट भारतीय बाजार के लिए अप्रत्यक्ष रूप से सकारात्मक हो सकती है। हाल के समय में कुछ विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकालकर एआई आधारित कंपनियों में निवेश कर रहे थे। यदि इस निवेश प्रवृत्ति में बदलाव आता है, तो भारतीय बाजार में विदेशी निवेश का दबाव कम हो सकता है। हालांकि, यह संभावना वैश्विक बाजारों के रुख और निवेशकों की रणनीति पर निर्भर करेगी।

घरेलू निवेशकों ने दिया बाजार को सहारा

संस्थागत निवेश के आंकड़ों में भी घरेलू और विदेशी निवेशकों के बीच अंतर दिखाई दिया। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने करीब 1,857 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगभग 2,670 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने वाला अहम कारक बनी। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो निफ्टी ने मंदड़िया रुझान वाली कैंडल बनाई थी। इसका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 41.66 पर रहा, जो उसके औसत 32.01 से ऊपर था। यह गति में कुछ सुधार का संकेत देता है, लेकिन इससे बाजार में तेजी की निरंतरता की गारंटी नहीं मिलती।

कच्चे तेल में गिरावट, लेकिन जोखिम बरकरार

इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशक होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े आपूर्ति जोखिमों और शिपिंग लागत घटाने के लिए अमेरिका की संभावित पहलों के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत के लिहाज से राहत दे सकती है। फिर भी वैश्विक महंगाई, ब्याज दरों और विदेशी निवेश की दिशा आने वाले सत्रों में बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे।

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