होर्मुज संकट से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था को झटका, कुवैत-इराक में 16% से ज्यादा गिरावट का अनुमान
खबर सार :-
आईएमएफ के मुताबिक, होर्मुज संकट से 2026 में खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाएं सिकुड़ सकती हैं और कच्चा तेल 95.74 डॉलर प्रति बैरल तक रह सकता है। भारत मजबूत घरेलू मांग के दम पर बेहतर स्थिति में है, लेकिन महंगाई का जोखिम बना हुआ है।
खबर विस्तार : -
IMF Report 2026: मध्य पूर्व में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने की आशंका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मंगलवार को जारी अक्टूबर 2026 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ) रिपोर्ट में चेतावनी दी कि इसके कारण 2026 में मध्य पूर्व और मध्य एशिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सिकुड़ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2025 के 3.7 प्रतिशत से घटकर 2026 में -0.3 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, 2027 में हालात सुधरने और विकास दर 6.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से बढ़ा आर्थिक संकट
आईएमएफ ने अप्रैल 2026 के अपने अनुमान की तुलना में क्षेत्र की 2026 की विकास दर में 2.2 प्रतिशत अंक की कटौती की है। इसकी प्रमुख वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के लंबे समय तक बंद रहने की आशंका है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। इसके बाधित होने से तेल निर्यात, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं। आईएमएफ के मुताबिक, मार्ग दोबारा खुलने और आपूर्ति सामान्य होने पर 2027 में आर्थिक गतिविधियों में तेज सुधार संभव है।
कुवैत, इराक और कतर पर सबसे ज्यादा मार
रिपोर्ट में छोटे खाड़ी तेल उत्पादक देशों के लिए बेहद चिंताजनक अनुमान पेश किए गए हैं। 2026 में कुवैत की अर्थव्यवस्था 16.7 प्रतिशत, इराक की 16 प्रतिशत, कतर की 15.6 प्रतिशत और बहरीन की 11.3 प्रतिशत तक सिकुड़ सकती है। ऊर्जा उत्पादन और निर्यात में बाधाएं इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव डाल सकती हैं। हालांकि, 2027 में इन देशों के लिए तेज रिकवरी का अनुमान है। आईएमएफ के अनुसार, इराक की अर्थव्यवस्था 19 प्रतिशत, कतर की 18.8 प्रतिशत, कुवैत की 17.1 प्रतिशत और बहरीन की 13.9 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।
ये भी पढ़ें......घटते तेल भंडार से बढ़ रहा वैश्विक ऊर्जा संकट का जोखिम
सऊदी अरब और यूएई को भी लगेगा झटका
सऊदी अरब पर संकट का असर अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है, क्योंकि उसके पास तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, उसकी अर्थव्यवस्था 2026 में 3.3 प्रतिशत सिकुड़ सकती है। 2027 में इसके 7.9 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अर्थव्यवस्था में 2026 के दौरान 3.9 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है, जबकि 2027 में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि संभव है। दूसरी ओर, ओमान इस रुझान से अलग रह सकता है। आईएमएफ ने 2026 में उसकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
ईरान में मंदी के साथ महंगाई का गंभीर खतरा
आईएमएफ ने ईरान की अर्थव्यवस्था में 2026 के दौरान 7.6 प्रतिशत संकुचन का अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य तनाव, नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू होने की आशंका और कड़े प्रतिबंध देश की आर्थिक स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। ईरान में मुद्रास्फीति 78.6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे आम लोगों की क्रय शक्ति पर भारी दबाव पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमत 95.74 डॉलर रहने का अनुमान
आईएमएफ के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता था। यह दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब एक-चौथाई हिस्सा था। खाड़ी देशों ने कुछ निर्यात वैकल्पिक बंदरगाहों की ओर मोड़ा है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र के बाहर तेल उत्पादन में प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद, आईएमएफ ने 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95.74 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है, जबकि 2025 में यह 67.74 डॉलर थी। 2027 में कीमत घटकर 87.39 डॉलर प्रति बैरल हो सकती है। रिपोर्ट में 2026 के दौरान तेल की कीमतों में 41 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 48 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान है। इससे उर्वरक की कीमतें 10 प्रतिशत और खाद्य कीमतें 5 प्रतिशत बढ़ सकती हैं।
भारत के लिए राहत, लेकिन वैश्विक महंगाई का जोखिम
आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों को महंगे आयात, मुद्रा विनिमय दर पर दबाव, वास्तविक आय में कमी और सीमित सरकारी वित्तीय संसाधनों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, भारत को अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बताया गया है। मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र का समर्थन भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है। इसके बावजूद, मध्य पूर्व में तनाव लंबा खिंचने पर भारत समेत कई देशों के लिए महंगा कच्चा तेल, खाद्य महंगाई और बढ़ता आयात बिल चिंता का कारण बन सकते हैं। आईएमएफ के अनुसार, संकट की अवधि और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान ही आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक वृद्धि की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
ये भी पढ़ें......मध्य पूर्व तनाव का असर: एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज
FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)....
1. होर्मुज संकट का खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
आईएमएफ के अनुसार, 2026 में मध्य पूर्व और मध्य एशिया की आर्थिक वृद्धि दर -0.3% रह सकती है। कुवैत, इराक और कतर की अर्थव्यवस्थाओं में भारी गिरावट का अनुमान है।
2. 2026 में कच्चे तेल की कीमत कितनी रहने का अनुमान है?
आईएमएफ ने 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95.74 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है। महंगे तेल से वैश्विक महंगाई और ऊर्जा आयात का खर्च बढ़ सकता है।
3. होर्मुज संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
भारत को मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से समर्थन मिल रहा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।
अन्य प्रमुख खबरें
-
आईटी-रियल्टी शेयर चमके, सेंसेक्स 445 अंक उछला, निफ्टी में तेजी
2026-10-13
-
गोल्ड ETF निवेश 71% बढ़ा, सितंबर में आए ₹4,451 करोड़
2026-10-12
-
FTA से खुलेंगे 85 ट्रिलियन डॉलर के बाजार, भारत को बड़ा फायदा!
2026-10-12
-
एसआईपी निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड, सितंबर में आए ₹32,490 करोड़
2026-10-12
-
AI और मुक्त व्यापार से चमकेगी भारत की अर्थव्यवस्था, बढ़ेंगे निवेश के अवसर
2026-10-12
-
सेंसेक्स 412 अंक उछला, निफ्टी में तेजी; रुपया भी चमका
2026-10-12
-
Gold-Silver Price: एक हफ्ते में इतने बढ़े सोने-चांदी के दाम
2026-10-10
-
मध्य पूर्व तनाव का असर: अंतरराष्ट्रीय रूट पर भी बढ़ेगा फ्यूल चार्ज
2026-10-08
-
कमजोर ग्लोबल संकेतों का असर, सेंसेक्स 492 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
2026-10-08
-
₹10,000 करोड़ का SME Growth Fund, छोटे उद्योगों को मिलेगी नई उड़ान
2026-10-07
-
क्विक कॉमर्स की रफ्तार होगी और तेज, FY31 तक 90 अरब डॉलर का बाजार!
2026-10-07
-
अमेरिकी मसाला उद्योग की मांग, भारतीय मसालों पर टैरिफ छूट रहे कायम
2026-10-07
-
बजाज फाइनेंस FD पर बढ़ा ब्याज, सीनियर सिटिजन्स को 8.15% तक रिटर्न
2026-10-07
-
RBI का संदेश: अभी ब्याज दरों में कटौती नहीं, EMI पर बढ़ सकता है बोझ
2026-10-07
-
महंगाई का वार: RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, कर्ज-EMI पर बढ़ेगा बोझ
2026-10-07