यूएई के समुद्री नौवहन तक पहुंचीं बैलिस्टिक मिसाइल, ईरान ने साफ कर दिया अपना रुख

खबर सार :-

ईरान इस समय अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाने पर ले रहा है। उसने यूएई के समुद्री नौवहन को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाकर अपने रुख को साफ कर दिया है।
यूएई के समुद्री नौवहन पर ईरान का हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर फिर बढ़ा टकराव

खबर विस्तार : -

अबूधाबी/वाशिंगटन/तेहरान : लगभग सात माह से सैन्य टकराव और तनाव के बादल अब फिर गरजने लगे हैं। इसका असर सबसे ज्यादा होर्मुज जलडमरूमध्य में देखी जा रही है। यहां की हालत और गंभीर हो गई है। इससे साफ कहा जा सकता है कि अमेरिका और ईरान के बीच सुलह के द्वारा बंद हो चुके हैं। 

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कभी तो ऐसा वक्त आ जाता है जब ईरान और अमेरिका का टकराव कम होता नजर आने लगता है। इनके बीच बिगड़ते हालातों पर समझौते के प्रयास भले ही रंग न दिखा पाए, किन्तु दुनिया में उम्मीदों के जहाज रेस लगाने लगते हैं। अब एक बार फिर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर हुए हमले के बाद हालात बिगड़ने लगे हैं। होर्मुज की सुरक्षा को लेकर मध्य क्षेत्र में खलबली मची हुई है। ईरान इस समय अमेरिका के सहयोगी देशों से दूरियां बना चुका है। उसने यूएई के समुद्री नौवहन को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाकर अपने रुख को साफ कर दिया है।

स हमले के बाद के हाल पर अल जजीरा, गल्फ न्यूज और सीएनएन ने एक रिपोर्ट बनाई है। हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद सार्वजनिक लागू किए जाने वाले कदम उठाए हैं। यह सीधा व्यापारिक सीमाओं को टारगेट करता नजर आ रहा है। कड़ाई से इसका पालन किया गया तो यूएई का ईरान के साथ सभी तरह के व्यापार, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेनदेन ठप हो जाएंगे।

ईरान से प्रतिबंध अगली सूचना तक लागू रहेंगे

क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए बढ़ते खतरों को देखते यह कदम यूएई की ओर से उठाए गए हैं। इस तनाव का कारण अमेरिका बन रहा है। अमेरिका की ओर नरम बने देश ही ईरान के निशाने पर है और जहां ईरान की पहुंच है, वहां अमेरिका भी पहुंच रहा है। यह तरीका भलेही आग और पानी का बन रहा है। तनाव मसले पर अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) शेख तहनून बिन ज़ायद अल नाहयान से बात की है।

यूएई विदेश मंत्रालय के रणनीतिक संचार विभाग की निदेशक अफरा अल हमेली ने ईरान से प्रतिबंध पर कहा है कि अगली सूचना तक लागू रहेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ईरान के साथ बातचीत का मोह त्याग दिया है। हालांकि उनके बातचीत का कारण और इच्छा सभी जानते हैं। ट्रंप की मानें तो होर्मुज जलडमरूमध्य अब अमेरिकी क्षेत्र में है। दुनिया में यह सच साबित करने के लिए ट्रंप ने इस जलमार्ग को नया अमेरिकी क्षेत्र बताने वाली एक तस्वीर पोस्ट की है। उधर इनके दावों के दौरान ही ईरान ने शर्ताें के तहत जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए कहा है।

जलडमरूमध्य दो देशों के लिए फांस बना हुआ

अब दोनों के बीच जलडमरूमध्य जैसे फंस चुका है या फिर किसी देश के लिए फांस बना हुआ है। उधर, ईरान-ओमान के बीच जो चल रहा है, उसको लेकर कतर के विदेश मंत्रालय घबराए हुए हैं। उन्होंने कहा कि यूएस-ईरान बातचीत शुरू होने से पहले मध्यस्थ होर्मुज पर ईरान-ओमान में फैसला कराया जाना चाहिए। होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बंद होने से किसी भी देश को फायदा नहीं होने वाला है। अमेरिका के विदेश सचिव रुबियो ने यूएई के एनएसए शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान को आवाजाही का फायदा भी बताया है, लेकिन बातचीत का विषय साफ नहीं किया गया है।

यूएई का दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट के अनुसार, रुबियो ने प्रमुख क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान से लेबनान के हालात बात की है। जब अमेरिका के फोन घनघनाने लगते हैं तो ईरान में एलर्ट की घंटी बज जाती हैं। दरअसल, यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया था, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस दावे को झूठा करार दिया।  उन्होंने पड़ोसी की समझ और उसके परिणामों की सीख यूएई के रक्षा मंत्रालय को समझाई। बताया कि ऐसी आदत अच्छे संबंधों को नुकसान पहुंचते है। ईरान की सेना के चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दुल्लाही ने खाड़ी देशों को अमेरिकी सेना की मदद न करने की चेतावनी दी है।

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इसे समझने के लिए ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी का बयान काफी है। इसमें अब्दुल्लाही ने कहा कि इलाके के बेस पर इतने सारे मिलिट्री एयरक्राफ़्ट, खासकर रीफ़्यूलिंग करने वाले विमानों की मौजूदगी है। बिना इनको संरक्षण के या स्वागत के संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने संरक्षण वाले देशों को चेतावनी दी है। ईरान में संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र घालिबाफ हैै। उनकी इराक यात्रा हुई है। लेकिन उन्होंने यहां से किसी प्रकार की मदद नहीं मांगी है, बल्कि क्षेत्रीय संबंध मजबूत करने के इरादे से हुई है। वह इस्लामी देशों को एकजुट करना चाह रहे हैं।

ईरान को पिछले साल से 1.5 गुना ज्यादा कमाई

इससे आर्थिक सहयोग और बेहतर सुरक्षा संबंध तैयार होंगे। ईरान इस बार खुलकर खेल रहा है। इनके तेल मंत्रालय ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर जारी सैन्य तनाव के बीच देश को फायदा मिलने वाला सौदेबाजी का आंकड़ा दिया है। बताया कि ईरान को इस साल के पहले चार महीनों में तेल से विदेशी मुद्रा के रूप में पिछले साल से 1.5 गुना ज्यादा कमाई हुई है। यह दुनिया के लोग देख रहे हैं कि ईरान के प्रमुख ठिकाने धुआं-धुआं हो रहे हैं।

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