घटते तेल भंडार से बढ़ रहा वैश्विक ऊर्जा संकट का जोखिम, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलना जरूरी: सऊदी अरामको सीईओ

खबर सार :-

सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों को आगे और आपूर्ति संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं वैश्विक तेल भंडार

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का खामियाजा वैश्विक ऊर्जा संकट के रूप में भुगतना पड़क सकता है। सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने यह चेतावनी दी है। अमीन नासिर ने सोमवार को चेतावनी दी कि वैश्विक तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों को आगे और आपूर्ति संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। लंदन में आयोजित एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम को संबोधित करते हुए नासिर ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तेल भंडार बाजार को झटकों से बचाने का काम करते हैं।  लेकिन वर्तमान में ये भंडार काफी कम हो चुके हैं, जिससे किसी भी नए संकट का असर अधिक गंभीर हो सकता है।

कच्चे तेल-रिफाइंड ईंधन बाजारों पर बना रह सकता है दबाव 

उन्होंने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने का फैसला अल्पकालिक राहत जरूर दे सकता है, लेकिन इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूद मांग और आपूर्ति के मूल असंतुलन का समाधान नहीं होगा। नासिर ने कहा कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और ईंधन की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं होती और बाजार का भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन बाजारों पर दबाव बना रह सकता है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने बढ़ती ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगभग 10 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल और डीजल भंडार जारी करने की योजना की घोषणा की है।

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वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है होर्मुज 

अरामको प्रमुख ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुल जाने के बाद भी वैश्विक तेल भंडार को दोबारा सामान्य स्तर पर पहुंचाने में करीब दो वर्ष तक का समय लग सकता है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान दबाव केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि मध्यम अवधि तक भी बने रह सकते हैं। गौरतलब है कि इस वर्ष अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, को प्रभावित किया था। इसके चलते तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। हालांकि, खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक देशों ने निर्यात बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। नतीजतन, कच्चे तेल की आपूर्ति संघर्ष से पहले के स्तरों के करीब पहुंचने लगी है।

संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर चिंतित हैं निवेशक 

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत ने तेल परिवहन बनाए रखने के लिए अपने स्वयं के टैंकर बेड़ों का उपयोग बढ़ाया है। वहीं सऊदी अरामको ने रास तनुरा टर्मिनल से निर्यात बढ़ाया है और हालिया हमले के बाद प्रभावित हुई ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को भी लगभग 80 प्रतिशत तक बहाल कर दिया है। इसके बावजूद बाजार में खतरे की धारणा बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी और लाल सागर में जारी सुरक्षा जोखिमों के कारण तेल बाजार अभी भी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को कीमतों में शामिल कर रहा है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड पिछले एक महीने से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह संकेत देता है कि निवेशक अभी भी संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर चिंतित हैं।

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