आईटी शेयरों के दम पर सेंसेक्स 16 अंक उछला, निफ्टी फिसला; कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई बाजार की चिंता
खबर सार :-
आईटी शेयरों की खरीदारी से सेंसेक्स 16 अंक चढ़ा, जबकि निफ्टी मामूली गिरावट के साथ खुला। महंगा कच्चा तेल और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड चिंता बढ़ा रहे हैं। निफ्टी के लिए 22,550 का सपोर्ट और 22,880 का स्तर अहम रहेगा।
खबर विस्तार : -
Stock Market Rally: पिछले कारोबारी सत्र में 1.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज करने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को सपाट शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और निवेशकों की सतर्कता के बीच आईटी शेयरों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। हालांकि, व्यापक बाजारों में कमजोरी और कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के कारण तेजी सीमित रही। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स मामूली बढ़त के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी हल्की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया।
सेंसेक्स में 16 अंक की बढ़त, निफ्टी लाल निशान में
बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 73,049.76 के स्तर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 73,033.78 पर बंद हुआ था। इस तरह सेंसेक्स में 15.98 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर, निफ्टी 50 पिछले बंद स्तर 22,721.95 के मुकाबले 22,715.75 पर खुला। इसमें 6.20 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की गिरावट रही। शुरुआती कारोबार में बाजार की दिशा स्पष्ट नहीं दिखी। एक ओर आईटी शेयरों में मजबूती रही, वहीं दूसरी ओर वित्तीय और अन्य चुनिंदा शेयरों में बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों की बढ़त को सीमित किया।
आईटी शेयरों में खरीदारी, स्मॉल और मिडकैप कमजोर
सेक्टरवार प्रदर्शन में निफ्टी आईटी सबसे मजबूत क्षेत्र के रूप में उभरा और इसमें एक प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम तथा एफएमसीजी सूचकांकों में भी 0.38 प्रतिशत तक की बढ़त रही। निफ्टी मीडिया और निफ्टी प्राइवेट बैंक भी हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इसके विपरीत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.67 प्रतिशत की गिरावट आई। हेल्थकेयर से जुड़े सूचकांक 0.6 प्रतिशत तक टूटे, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक पर भी दबाव रहा। व्यापक बाजारों में निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.15 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप में 0.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 50 के प्रमुख कमजोर शेयरों में श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस और बीएसई शामिल रहे।
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शॉर्ट कवरिंग से मिली पिछली तेजी को रफ्तार
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मंगलवार को निफ्टी में आई तेज उछाल कमजोर बाजार परिस्थितियों के बीच अप्रत्याशित थी। इस तेजी के पीछे शॉर्ट कवरिंग को प्रमुख कारण माना गया। इसके अलावा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) पर हितधारकों की राय की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने संबंधी टिप्पणी से निवेशकों की उम्मीदें बढ़ीं। बाजार को इससे संभावित नीतिगत बदलावों की संभावना दिखाई दी, जिससे निवेशकों की धारणा में सुधार हुआ। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इन संकेतों के आधार पर तेजी के टिकाऊ होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
मजबूत रुपया राहत, लेकिन कच्चा तेल बड़ी चुनौती
मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया कदमों के बाद रुपये में मजबूती देखने को मिली है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में रुपया करीब 1.5 प्रतिशत मजबूत हुआ। इससे घरेलू बाजार को कुछ राहत मिली है। हालांकि, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड करीब 5.2 प्रतिशत और ब्रेंट क्रूड लगभग 106 डॉलर प्रति बैरल पर बने रहने से बाजार की चिंताएं बरकरार हैं। महंगा कच्चा तेल भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। ऊंची बॉन्ड यील्ड भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। इसके बावजूद, दूसरी तिमाही के बेहतर कारोबारी नतीजों की उम्मीद के चलते वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार, धातु और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
निफ्टी के लिए 22,550 का सपोर्ट अहम
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, हालिया तेजी ने निफ्टी के 23,200 तक पहुंचने की उम्मीदों को फिर से बल दिया है। हालांकि, आगे की तेजी के सामने कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी बाधाएं मौजूद हैं। निफ्टी के लिए 22,550 का स्तर तत्काल समर्थन माना जा रहा है, जबकि 22,787 से 22,880 के बीच का दायरा अहम अवरोध क्षेत्र है। इस क्षेत्र के ऊपर निर्णायक बढ़त से तेजी का रुख मजबूत हो सकता है।
वैश्विक संकेतों और महंगाई आंकड़ों पर नजर
एशियाई बाजार लगातार दो सत्रों की गिरावट के बाद संभलते दिखे। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख अपना सकता है। साथ ही, पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों, समुद्री आपूर्ति मार्गों पर संभावित असर और रूसी डीजल की आपूर्ति में बदलाव पर नजर रखी जा रही है। घरेलू स्तर पर निवेशक थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) महंगाई के आंकड़ों का इंतजार करेंगे। कुल मिलाकर, आईटी शेयरों की मजबूती बाजार को सहारा दे रही है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक अनिश्चितताएं आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
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