रुपये की गिरावट पर RBI सख्त! डॉलर के मुकाबले उतार-चढ़ाव थामने के लिए जारी रहेंगे प्रयास: सीतारमण

खबर सार :-

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, RBI रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के प्रयास जारी रखेगा, लेकिन डॉलर के मुकाबले कोई तय स्तर बचाना उसका लक्ष्य नहीं है। विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक बुनियाद मजबूत हैं। डॉलर की मांग घटाने के कदम उठाए गए हैं।
रुपये में गिरावट पर RBI की नजर, उतार-चढ़ाव थामने की तैयारी

खबर विस्तार : -

Bloomberg New Economy Forum 2026:  डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) घरेलू मुद्रा में अत्यधिक अस्थिरता रोकने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले डेढ़ साल में रुपये के मूल्य में उल्लेखनीय गिरावट आई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डॉलर के मुकाबले रुपये का कोई खास स्तर तय करना या उसका बचाव करना नहीं, बल्कि बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।

नई दिल्ली में आयोजित 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम-2026' की पैनल चर्चा में सीतारमण ने कहा कि RBI के हालिया कदमों से रुपये को समर्थन मिला है। उन्होंने भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार का भी उल्लेख किया। वित्त मंत्री के बयान ऐसे समय आए हैं, जब डॉलर की मांग, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाहरी दबावों के बीच रुपये की चाल पर बाजार की नजर बनी हुई है।

रुपये की कीमत नहीं, बाजार की स्थिरता पर RBI का जोर

सीतारमण ने कहा कि RBI किसी निश्चित विनिमय दर को बनाए रखने के लिए बाजार में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। केंद्रीय बैंक का जोर रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को सीमित करने पर है, ताकि मुद्रा बाजार में अस्थिरता से पैदा होने वाले जोखिम कम किए जा सकें। वित्त मंत्री के मुताबिक, रुपये की हालिया चाल पर बाहरी परिस्थितियों का असर पड़ा है। इसके बावजूद भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी कारक मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती बनाए रखने के लिए काम कर रही है। रुपये में सोमवार को करीब एक प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में यह मजबूत होकर 94.96 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, मुद्रा बाजार में विनिमय दर लगातार बदलती रहती है और शुरुआती कारोबार का स्तर पूरे दिन की चाल को नहीं दर्शाता।

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विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक बुनियाद पर भरोसा

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। उनके मुताबिक, रुपये में उतार-चढ़ाव को केवल घरेलू आर्थिक स्थिति के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि वैश्विक घटनाक्रम भी विनिमय दर को प्रभावित करते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी का असर आयात लागत पर पड़ सकता है। खास तौर पर कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं के महंगे होने से कंपनियों की लागत बढ़ने और महंगाई पर दबाव आने की आशंका रहती है। वहीं, विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से कारोबारियों और निवेशकों के लिए भविष्य की लागत का अनुमान लगाना भी मुश्किल हो सकता है। सीतारमण ने राजकोषीय अनुशासन को लेकर भी भरोसा जताया। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार आर्थिक बुनियाद मजबूत रखने पर ध्यान दे रही है और राजकोषीय अनुशासन को निवेशकों के लिए चिंता का विषय नहीं माना जाना चाहिए।

डॉलर की मांग घटाने के लिए RBI ने उठाए कई कदम

रुपये पर दबाव कम करने के लिए RBI ने पिछले सप्ताह कई उपायों की घोषणा की थी। इनमें सरकारी तेल एवं गैस विपणन कंपनियों के लिए एक विशेष सुविधा शामिल है। इसका उद्देश्य इन कंपनियों की डॉलर संबंधी मांग को हाजिर विदेशी मुद्रा बाजार से हटाने में मदद करना है, ताकि बाजार में डॉलर की तत्काल मांग का दबाव कम हो सके। इसके अलावा, रुपये से जुड़े सट्टेबाजी वाले कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन के नियम कड़े किए गए हैं। केंद्रीय बैंक ने बैंकों से दो लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की डॉलर खरीद पर 20 प्रतिशत का आरक्षित प्रावधान करने को भी कहा है। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग और कारोबार से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना है। हालांकि, रुपये पर इन उपायों का वास्तविक और दीर्घकालिक असर वैश्विक बाजार की परिस्थितियों तथा डॉलर की मांग सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।

रुपये की चाल पर रहेगी बाजार की नजर

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए स्थिर विनिमय दर महत्वपूर्ण है, लेकिन रुपये का मूल्य कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होता है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेश का प्रवाह और वैश्विक जोखिम के प्रति निवेशकों का रुख रुपये की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं। सीतारमण के बयान से स्पष्ट है कि सरकार रुपये के किसी निश्चित स्तर को बनाए रखने के बजाय आर्थिक बुनियाद मजबूत रखने और अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने पर जोर दे रही है। वहीं, RBI के हालिया उपायों का असर आने वाले दिनों में विदेशी मुद्रा बाजार की चाल से और स्पष्ट होगा।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)

1. RBI रुपये में गिरावट रोकने के लिए क्या करेगा?

RBI रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने और डॉलर की मांग नियंत्रित करने के प्रयास जारी रखेगा।

2. क्या RBI डॉलर के मुकाबले रुपये का तय भाव बनाए रखेगा?

नहीं, RBI का लक्ष्य किसी निश्चित विनिमय दर को बचाना नहीं, बल्कि बाजार में अस्थिरता कम करना है।

3. रुपये को समर्थन देने के लिए RBI ने क्या कदम उठाए?

RBI ने डॉलर की मांग घटाने, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव के नियम सख्त करने और बैंकों के लिए अतिरिक्त आरक्षित प्रावधान जैसे कदम उठाए हैं।

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