फिनफ्लुएंसर के झांसे में न आएं, सेबी चेयरमैन ने निवेशकों को चेताया; रिटर्न के दावों पर बरतें सावधानी
खबर सार :-
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने फिनफ्लुएंसर के अवास्तविक रिटर्न दावों से सावधान रहने को कहा। बढ़ती बाजार भागीदारी के बीच जागरूकता, जोखिम समझना और साइबर सुरक्षा निवेशकों के लिए अहम है।
खबर विस्तार : -
SEBI Chairman Alert’s: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को निवेशकों और ट्रेडर्स को फिनफ्लुएंसर तथा अप्रत्याशित रिटर्न का लालच देने वाले लोगों से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पूंजी बाजार में आम परिवारों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में निवेशकों के लिए सही जानकारी और जागरूकता पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
पंजाब यूनिवर्सिटी में सेबी के ‘प्रोजेक्ट जागरूक’ के लॉन्च के दौरान पांडे ने कहा कि अब अधिक परिवार अपनी बचत का बड़ा हिस्सा सिक्योरिटीज मार्केट से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निवेशकों को ऐसे वित्तीय उत्पाद भी उपलब्ध हैं, जो करीब एक दशक पहले बाजार में व्यापक रूप से मौजूद नहीं थे।
SIP बनी निवेश का आसान रास्ता
सेबी चेयरमैन ने कहा कि रिटेल निवेशकों के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) निवेश के आसान तरीकों में से एक बनकर उभरे हैं। बाजार में व्यापक भागीदारी बढ़ाने के लिए सेबी ने म्यूचुअल फंड स्कीम की कैटेगरी को आसान बनाने, लागत पर सीमा तय करने और कम राशि वाली एसआईपी जैसे कदमों को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि बाजार के विस्तार के साथ निवेशकों की संख्या और उपलब्ध वित्तीय उत्पादों का दायरा भी बढ़ा है। ऐसे माहौल में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश से जुड़ी सलाह देने वाले फिनफ्लुएंसर की भूमिका भी चर्चा में आई है। निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के किसी व्यक्ति के दावे या असामान्य रिटर्न के वादे के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए।
10 साल में चार गुना हुआ मार्केट कैप
पांडे के मुताबिक, पिछले दशक में भारत का बाजार पूंजीकरण चार गुना बढ़कर करीब 472 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की संपत्ति 22 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 78 लाख करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने कहा कि सेबी ने विदेशी निवेशकों के लिए आसान एफपीआई फ्रेमवर्क पेश किया है। इसके तहत डिजिटल ऑनबोर्डिंग को आसान बनाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर करने की दिशा में काम किया गया है।
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निवेश के विकल्पों का दायरा हुआ व्यापक
सेबी चेयरमैन ने कहा कि रेगुलेटर ने निवेश सलाहकार, ईएसजी रेटिंग देने वाली कंपनियों और स्टार्टअप्स व इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए नए फाइनेंसिंग चैनल विकसित किए हैं। इससे बाजार में भाग लेने वाले संस्थानों और उपलब्ध वित्तीय उत्पादों का दायरा बढ़ा है। उनके अनुसार, भारत का कैपिटल मार्केट सिस्टम अब केवल घरेलू निवेश को समर्थन देने तक सीमित नहीं है। यह देश को वैश्विक फंड मैनेजमेंट गतिविधियों के संभावित केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
SME IPO और तेज हुई लिस्टिंग प्रक्रिया
पांडे ने कहा कि एसएमई आईपीओ प्लेटफॉर्म के जरिए छोटी और मध्यम कंपनियों की पूंजी बाजार तक पहुंच बढ़ी है। इसके अलावा आईपीओ लिस्टिंग की प्रक्रिया को भी तेज किया गया है। लिस्टिंग का समय टी+6 से घटाकर टी+3 वर्किंग डेज कर दिया गया है। उन्होंने बाजार के इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। भारत टी+1 सेटलमेंट को अपनाने की दिशा में अग्रणी बाजारों में रहा है और क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की सुविधा देने वाले शुरुआती देशों में शामिल रहा है।
बॉन्ड और नए निवेश उत्पादों पर जोर, सुरक्षा भी अहम
डेट मार्केट में कॉरपोरेट बॉन्ड तक पहुंच बढ़ाने के लिए ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म शुरू किए गए हैं। इसके अलावा ग्रीन, सस्टेनेबल और म्युनिसिपल बॉन्ड ने पूंजी जुटाने के नए विकल्प उपलब्ध कराए हैं। पांडे ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) और कमोडिटी डेरिवेटिव्स जैसे उत्पादों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इनसे निवेशकों, कारोबारियों और उत्पादकों को जोखिम प्रबंधन तथा परिसंपत्तियों से बेहतर तरीके से कमाई करने के अवसर मिलते हैं। बढ़ती डिजिटल भागीदारी के बीच सेबी ने साइबर सुरक्षा रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों को भी सख्त किया है। पांडे ने संकेत दिया कि बाजार के विस्तार के साथ निवेशकों की सुरक्षा, पारदर्शिता और तकनीकी जोखिमों से निपटना भी नियामक की प्राथमिकताओं में बना हुआ है।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...
1. सेबी चेयरमैन ने फिनफ्लुएंसर को लेकर क्या चेतावनी दी?
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने निवेशकों और ट्रेडर्स को फिनफ्लुएंसर से सावधान रहने को कहा। उन्होंने अप्रत्याशित या असामान्य रिटर्न का लालच देने वाले दावों पर सतर्कता बरतने की सलाह दी।
2. भारतीय पूंजी बाजार में क्या बदलाव हुए हैं?
पिछले दशक में भारत का बाजार पूंजीकरण करीब चार गुना बढ़कर 472 लाख करोड़ रुपये हुआ है। SIP, SME IPO, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म और नए निवेश उत्पादों से बाजार की पहुंच बढ़ी है।
3. डिजिटल निवेश के दौर में निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
निवेशकों को सोशल मीडिया की सलाह पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय जोखिम और उत्पाद की जानकारी समझनी चाहिए। साथ ही साइबर सुरक्षा, आधिकारिक स्रोतों और नियामकीय जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है।
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