कैट का बड़ा अनुमानः त्योहारी सीजन में बाजारों की बल्ले-बल्ले! 2026 में 7 लाख करोड़ पार करेगा कारोबार
खबर सार :-
कैट के अनुमान के मुताबिक, नवरात्रि से दीपावली 2026 तक भारत में त्योहारी कारोबार 7 लाख करोड़ रुपये पार कर सकता है। ग्रोसरी, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेवाओं की मांग बढ़ने से स्थानीय व्यापार, एमएसएमई और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
खबर विस्तार : -
Festive Business 2026: भारत में 2026 के त्योहारी सीजन में कारोबार नई ऊंचाई छू सकता है। नवरात्रि से लेकर दीपावली तक देशभर में कुल व्यापार 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान है। व्यापारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार कारोबार में 15 से 18 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। त्योहारी खरीदारी में तेजी, ग्राहकों की बढ़ती मांग और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार इस वृद्धि के प्रमुख आधार हैं।
पिछले साल 6.05 लाख करोड़ रुपये का हुआ था कारोबार
कैट के नेशनल सेक्रेटरी जनरल और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि 2026 के त्योहारी कारोबार का अनुमान विभिन्न राज्यों के व्यापारिक संगठनों, स्थानीय बाजारों से मिली जानकारी और खरीदारी के रुझानों के विश्लेषण पर आधारित है। पिछले साल त्योहारों के दौरान देश में करीब 6.05 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। इसमें 5.40 लाख करोड़ रुपये के सामान की बिक्री और 65,000 करोड़ रुपये की सेवाओं से होने वाली आय शामिल थी। इस साल कारोबार में संभावित बढ़ोतरी से खुदरा बाजारों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। त्योहारों के दौरान ग्राहकों की बढ़ती आवाजाही से बाजारों में बिक्री को गति मिल सकती है।
सर्विस सेक्टर की कमाई में 25% तक उछाल की उम्मीद
त्योहारी सीजन में वस्तुओं की बिक्री के साथ सेवा क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ सकता है। कैट का अनुमान है कि सर्विस सेक्टर के कारोबार में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। इस दौरान सेवाओं से जुड़ा कुल कारोबार 80,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये के बीच पहुंचने की संभावना है। त्योहारों की मांग का फायदा ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स डिलीवरी, वेयरहाउसिंग, होटल, रेस्टोरेंट, पर्यटन, कैटरिंग, इवेंट मैनेजमेंट और स्थानीय परिवहन जैसे क्षेत्रों को मिल सकता है। धार्मिक आयोजनों, मेलों, प्रदर्शनियों और सामुदायिक कार्यक्रमों से भी रोजगार और कमाई के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
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ग्रोसरी से लेकर ज्वेलरी तक, इन सामानों की रहेगी धूम
कैट के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, त्योहारी कारोबार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ग्रोसरी और फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) की हो सकती है। इस श्रेणी का हिस्सा करीब 12 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बाद सोना, चांदी और आभूषणों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत रहने की संभावना है। इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सामान की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत आंकी गई है। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रेडीमेड कपड़े और गिफ्ट आइटम प्रत्येक की हिस्सेदारी लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। होम डेकोर और फर्नीचर एवं फर्निशिंग से जुड़े उत्पादों की हिस्सेदारी 5-5 प्रतिशत हो सकती है। इसके अलावा टेक्सटाइल, फैब्रिक, मिठाई, नमकीन, पूजा सामग्री, फल, ड्राई फ्रूट्स, बेकरी उत्पाद, कन्फेक्शनरी और फुटवियर की मांग भी बाजार को मजबूती दे सकती है। हालांकि, ये आंकड़े कैट के शुरुआती अनुमान हैं।
रामलीला, गरबा और दुर्गा पूजा से बढ़ेगी आर्थिक गतिविधि
त्योहारों के दौरान खरीदारी के अलावा सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन भी अर्थव्यवस्था को गति देंगे। प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार, रामलीला, दुर्गा पूजा, गरबा, डांडिया, मेले, प्रदर्शनियां और सामुदायिक कार्यक्रम स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देंगे। इन आयोजनों से सजावट, खानपान, परिवहन, अस्थायी दुकानों और मनोरंजन सेवाओं से जुड़े कारोबारियों को अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं। त्योहारी गतिविधियों का लाभ बड़े बाजारों तक सीमित रहने के बजाय छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंचने की भी उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर कारोबार और रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
'वोकल फॉर लोकल' और भारतीय उत्पादों पर जोर
कैट का मानना है कि ग्राहक अब स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों, हस्तशिल्प, भारतीय ब्रांड और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के सामान को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। संगठन ने इस रुझान को 'वोकल फॉर लोकल', 'मेड इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों की बढ़ती स्वीकार्यता से भी जोड़ा है। खंडेलवाल ने उपभोक्ताओं से त्योहारों पर भारतीय उत्पाद खरीदने की अपील की। उनके मुताबिक, इससे स्थानीय व्यापारियों, कारीगरों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप और एमएसएमई को समर्थन मिलेगा। कैट को उम्मीद है कि नवरात्रि से दीपावली तक चलने वाला यह सीजन देश के व्यापार, सेवा क्षेत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत साबित होगा। हालांकि, वास्तविक कारोबार का स्तर त्योहारों के दौरान उपभोक्ता मांग और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)...
1. 2026 के त्योहारी सीजन में भारत में कितना कारोबार होने का अनुमान है?
कैट के अनुसार, नवरात्रि से दीपावली 2026 तक भारत में त्योहारी कारोबार 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है। पिछले साल के मुकाबले 15-18 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
2. त्योहारी सीजन में किन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है?
ग्रोसरी, एफएमसीजी, सोना-चांदी, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेडीमेड कपड़े और गिफ्ट आइटम की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे सेवा क्षेत्रों को भी लाभ मिल सकता है।
3. त्योहारी कारोबार बढ़ने से स्थानीय व्यापारियों और एमएसएमई को क्या फायदा होगा?
भारतीय उत्पादों, हस्तशिल्प और स्थानीय ब्रांडों की बढ़ती मांग से छोटे व्यापारियों, कारीगरों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप और एमएसएमई को कारोबार बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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