भारत-स्वीडन साझेदारी से रक्षा, ग्रीन टेक्नोलॉजी, नवाचार और एफटीए के जरिए निवेश व रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

खबर सार :-

भारत-स्वीडन साझेदारी रक्षा विनिर्माण, ग्रीन टेक्नोलॉजी, नवाचार और उन्नत उत्पादन में नए अवसर खोल सकती है। एसआईबीसी के सीईओ रॉबिन सुखिया ने निवेश, रोजगार और व्यापार बढ़ाने के लिए समयबद्ध मंजूरी व भारत-ईयू एफटीए पर जोर दिया।
भारत-स्वीडन साझेदारी: रक्षा, ग्रीन टेक और नवाचार से बढ़ेगी ग्रोथ

खबर विस्तार : -

India-Sweden partnership: भारत और स्वीडन के बीच मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में रक्षा विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में विकास के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। स्वीडन-इंडिया बिजनेस काउंसिल (एसआईबीसी) के महासचिव एवं सीईओ रॉबिन सुखिया ने गुरुवार को कहा कि दोनों देशों के उद्योगों, तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल मानव संसाधन का बेहतर तालमेल निवेश, व्यापार और रोजगार सृजन को नई गति दे सकता है।

एक खास बातचीत में सुखिया ने कहा कि भारत और स्वीडन की साझेदारी में रक्षा उत्पादन से लेकर स्वच्छ ऊर्जा तक सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए मजबूत इकोसिस्टम, नीतिगत स्पष्टता और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है।

रक्षा विनिर्माण में संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं

भारत और स्वीडन के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। सुखिया ने बताया कि भारतीय कंपनियां स्वीडन और यूरोपीय बाजारों को समझने तथा वहां कारोबार के अवसर तलाशने के लिए आगे बढ़ रही हैं। वहीं, नाटो देशों में रक्षा खरीद गतिविधियों में तेजी से नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर निवेश और उत्पादन के नए केंद्र बन रहे हैं। इन क्षेत्रों में औद्योगिक क्षमताओं के विकास से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिल सकता है। सुखिया के अनुसार, रक्षा उत्पादन में दीर्घकालिक सफलता के लिए केवल निवेश ही नहीं, बल्कि आपूर्तिकर्ताओं, तकनीकी कंपनियों और विनिर्माण इकाइयों को जोड़ने वाला मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम भी जरूरी है।

ग्रीन टेक्नोलॉजी से जलवायु लक्ष्यों को मिलेगी गति

हरित ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को भारत-स्वीडन सहयोग का अहम हिस्सा बताते हुए सुखिया ने भारत की सौर ऊर्जा क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल इंटरनेशनल सोलर अलायंस को स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। स्वीडन भी इस गठबंधन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के उद्योग ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन घटाने, हरित प्रौद्योगिकी अपनाने और सतत औद्योगिक विकास के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। इससे उद्योगों को अधिक टिकाऊ बनाने और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में मदद मिल सकती है।

नवाचार और प्रतिभा से बनेंगे रोजगार के नए अवसर

सुखिया ने नवाचार को भारत और स्वीडन के बीच सहयोग का प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि स्वीडन तकनीकी नवाचार के लिए जाना जाता है, जबकि भारत के पास विशाल प्रतिभा भंडार और कुशल मानव संसाधन है। दोनों देशों की क्षमताओं का मेल नए उत्पादों, सेवाओं और कंपनियों के विकास का रास्ता खोल सकता है। उनके अनुसार, भविष्य में रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण आधार नवाचार होगा। यदि भारतीय प्रतिभा और स्वीडन की तकनीकी विशेषज्ञता को साथ लाया जाए, तो नए व्यावसायिक मॉडल विकसित करने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

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निवेशकों के लिए समयबद्ध मंजूरी जरूरी

भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के प्रयासों पर सुखिया ने कहा कि पिछले वर्षों में हजारों नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। हालांकि, उन्होंने नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और परियोजनाओं की मंजूरी के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि किसी परियोजना को मंजूरी मिलने में कितना समय लगेगा। समयसीमा स्पष्ट होने पर कंपनियां अपने निवेश, उत्पादन और संसाधनों की बेहतर योजना बना सकती हैं। इसके विपरीत, अनुमोदन में अनिश्चितता निवेश संबंधी फैसलों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने वैश्विक आपूर्ति शृंखला का उदाहरण देते हुए कहा कि आज उद्योग काफी हद तक 'जस्ट-इन-टाइम' मॉडल पर निर्भर हैं। यदि मशीनरी, कलपुर्जे या अन्य सामान सीमा शुल्क प्रक्रिया से समय पर नहीं गुजरते, तो उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए प्रक्रियाओं को पूर्वानुमेय और समयबद्ध बनाना जरूरी है।

भारत-यूरोपीय संघ एफटीए से खुलेंगे नए बाजार

भारत और यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को सुखिया ने वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार, यह समझौता दुनिया की लगभग एक-चौथाई अर्थव्यवस्था और करीब दो अरब लोगों को जोड़ने की क्षमता रखता है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इससे व्यापारिक संबंधों को स्थिरता और भरोसा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि समझौता लागू होने के बाद यूरोपीय कंपनियां भारत में नए निवेश अवसर तलाश सकती हैं। वहीं, भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। इससे व्यापार, निवेश और रोजगार को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी जोर

वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर सुखिया ने कहा कि भारत और स्वीडन लोकतांत्रिक मूल्यों तथा नियम-आधारित विश्व व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। कुछ मुद्दों पर दोनों के दृष्टिकोण अलग हो सकते हैं, लेकिन कई वैश्विक विषयों पर उनकी सोच समान है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करने को भी महत्वपूर्ण कदम बताया। कुल मिलाकर, सुखिया के मुताबिक रक्षा उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच भारत-स्वीडन साझेदारी के प्रमुख विकास क्षेत्र बन सकते हैं। इसके लिए उद्योगों के बीच सहयोग के साथ नीतियों का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन निर्णायक होगा।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)....

1. भारत-स्वीडन सहयोग के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?

रक्षा विनिर्माण, ग्रीन टेक्नोलॉजी, नवाचार और उन्नत विनिर्माण।

2. भारत में रक्षा उत्पादन के प्रमुख केंद्र कौन से हैं?

उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर।

3. भारत-स्वीडन साझेदारी से रोजगार कैसे बढ़ेंगे?

तकनीकी नवाचार, नए उत्पादों और कंपनियों के विकास से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

4. भारत-ईयू एफटीए से क्या लाभ होगा?

इससे व्यापार, निवेश और यूरोपीय बाजारों तक भारतीय कंपनियों की पहुंच बढ़ने की संभावना है।

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