रक्षा क्षेत्र में एआई के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय विकसित कर रहा भारत

खबर सार :-

दुनिया भर के देश एआई के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ा रहे हैं। भारत भी सैन्य क्षेत्र में एआई के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय विकसित कर रहा है। रक्षा क्षेत्र में एआई की विश्वसनीयता जांचने के लिए भारत ने फ्रेमवर्क बनाया है।
भारत सैन्य क्षेत्र में एआई इस्तेमाल के लिए तैयार कर रहा सुरक्षा उपाय

खबर विस्तार : -

संयुक्त राष्ट्र: दुनिया भर में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। विश्व भर के देश हर क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही दुनिया भर के देश सेना और रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं। इस दौरान भारत भी रक्षा क्षेत्र में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय विकसित करने के प्रयास कर रहा है। बीजेपी की लोकसभा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में एआई की विश्वसनीयता जांचने के लिए भारत ने घरेलू फ्रेमवर्क बनाया है। यह फ्रेमवर्क भरोसा, सुरक्षा और पारदर्शिता जैसे सिद्धांतों पर आधारित है।

यूएन महासभा ने प्रस्ताव किया था पारित  

बीजेपी सांसद के अनुसार, सेना में एआई के इस्तेमाल पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की पहली अनौपचारिक चर्चा का समर्थन करने वाले देशों में भारत भी शामिल था। विश्व के अन्य देशों की बैठक जून माह में जिनेवा में आयोजित हुई थी। यूएन महासभा ने पिछले साल दिसंबर में एक प्रस्ताव पारित किया था। जिसमें 'सैन्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर प्रभाव' विषय पर अनौपचारिक चर्चा को आयोजित करने का आह्वान किया गया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा की निरस्त्रीकरण से जुड़ी प्रथम समिति को संबोधित करते हुए सहरावत ने कन्वेंशन ऑन सर्टेन कन्वेंशनल वेपन्स (सीसीडब्‍ल्‍यू) से जुड़े कई मुद्दों पर भी बात की। यह अत्यधिक नुकसान पहुंचाने वाले हथियारों से संबंधित समझौता है। भारत इन हथियारों से संबंधित सभी पांच प्रोटोकॉल में शामिल हो चुका है। 

भारत भी प्रोटोकॉल वी का एक हिस्सा 

बीजेपी सांसद ने कहा कि भारत आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज) जैसे देसी बमों से होने वाले खतरों को कम करने और पीड़ितों की मदद करने को बहुत महत्व देता है। दूसरा प्रोटोकॉल आईईडी से निपटने के लिए एक ढ़ांचा प्रदान करता है, जिसका उपयोग आतंकवादी और गैर-कानूनी हथियारबंद समूह आमतौर पर करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने इस प्रोटोकॉल के तहत अपनी सभी ज़िम्मेदारियों को पूरा किया है, जिसमें लैंडमाइन और आईईडी से जुड़े नियम भी शामिल हैं। भारत ने ऐसी लैंडमाइन नहीं बनाई हैं जिनका आसानी से पता लगाया जा सके और सभी एंटी-पर्सनल माइंस का पता लगाया जा सके। भारत प्रोटोकॉल वी का भी एक हिस्सा है, जो युद्ध के बचे हुए विस्फोटकों को हटाने से जुड़ा है। भारत युद्ध के ऐसे बचे हुए विस्फोटकों से होने वाले जान-माल के नुकसान को लेकर चिंतित है। इस समस्या को कम करने में मदद करने के लिए, भारत ने पिछले कुछ सालों में कई देशों में 30 से ज़्यादा प्रोस्थेटिक कैंप लगाए हैं। इन कैंपों के ज़रिए, 15,000 से ज़्यादा लोगों को कृत्रिम अंग दिए गए हैं, जिससे युद्ध और विस्फोटों के शिकार लोगों की मदद हुई है। 

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