समुद्री सहयोग बढ़ाने के मकसद से प्रशिक्षण अभियान के लिए मालदीव पहुंचे भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के तीन जहाज

खबर सार :-

लंबी दूरी के प्रशिक्षण अभियान के लिए भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के तीन पोत मालदीव पहुंचे हैं। भारतीय नौसेना के इन जहाजों में आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता के अलावा भारतीय तटरक्षक बल का आईसीजीएस सारथी भी शामिल है। इस अभियान का मकसद समुद्री सहयोग को और मजबूत करना है।
लंबी दूरी के प्रशिक्षण अभियान के लिए मालदीव पहुंचे भारत के तीन जहाज

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: मालदीव के साथ भारत लंबी दूरी के प्रशिक्षण अभियान में शामिल होगा। इसके लिए भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के तीन पोत मालदीव की राजधानी माले के समुद्री तट पर पहुंच गए हैं। माले के तट पर पहुंचने वाले भारतीय नौसेना के इन जहाजों में आईएनएस तीर व आईएनएस सुजाता शामिल हैं। इन दोनों जहाजों के अलावा भारतीय तटरक्षक बल का जहाज आईसीजीएस सारथी भी मालदीव की सीमा पर पहुंच गया है। भारत के ये तीनों समुद्री जहाज लंबी दूरी के प्रशिक्षण अभियान के तहत मालदीव पहुंचे हैं। जहाजों के यहां पहुंचने पर मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बल ने भारतीय पोतों का स्वागत किया। यह सफर दोनों देशों के बीच समुद्री साझेदारी को मजबूत बनाने,  क्षेत्रीय संबंधों को और गहरा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम को दर्शाती। ये समुद्री जहाज नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन से हैं। 

समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर रहा फोकस 

इस यात्रा के दौरान, पहले ट्रेनिंग स्क्वाड्रन के सीनियर ऑफिसर ने मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स के चीफ और मालदीव कोस्ट गार्ड के कमांडेंट से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच बातचीत इंडियन नेवी और मालदीव डिफेंस फोर्स के बीच करीबी संपर्क बनाए रखने और समुद्री क्षेत्र में कई तरह के सहयोग को बढ़ाने पर फोकस रही। पहले ट्रेनिंग स्क्वाड्रन के सीनियर ऑफिसर ने मालदीव में भारत के हाई कमिश्नर जी. बालासुब्रमण्यम से भी मुलाकात की। इस बीच, इंडियन नेवी के ट्रेनी अपनी ट्रेनिंग के हिस्से के तौर पर मालदीव के गिरिफुशी ट्रेनिंग सेंटर गए। इस दौरे के दौरान, उन्हें मालदीव के ट्रेनिंग सेंटर और उसकी गतिविधि को समझने का मौका मिला। इस दौरे के दौरान, दोनों देशों की नेवी के बीच आपसी तालमेल और दोस्ती बढ़ाने के लिए कई गतिविधि आयोजित की जाएंगी।

सैन्य बलों के बीच समझ-सहयोग मजबूत बनाना मकसद  

भारतीय नौसेना के मुताबिक, दोनों देशों के बीच गतिविधियों में एक-दूसरे के पोतों का दौरा व खेल प्रतियोगिताएं शामिल हैं। इसके अलावा सामाजिक मेल-मिलाप और जनसंपर्क से जुड़ी गतिविधियां भी अभियान का हिस्सा हैं। ऐसी गति​​विधियों का मकसद दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच आपसी समझ और सहयोग को और मजबूत बनाना है। भारतीय नौसेना के पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की यह यात्रा दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में मजबूत तालमेल और बढ़ते सहयोग को रेखांकित करती है।

यह अभियान 'महासागर' (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) की परिकल्पना के अनुसार है। इसके जरिए भारत हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण और सहयोग को आगे बढ़ाने पर फोकस कर रहा है। बताते चलें कि इससे पूर्व भारतीय तटरक्षक और नौसेना के समुद्री जहाज सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों की यात्रा कर चुके हैं। साथ ही भारतीय नौसेना के जवान और अधिकारियों ने मेजबान देशों की नौसेनाओं के साथ कंबाइंड समुद्री अभ्यास भी किया है। भारतीय नौसेना का पहला ट्रेनिंग स्क्वाड्रन (1टीएस) दक्षिण पूर्व एशिया में तैनाती पर था। इनमें भारतीय नौसेना का आईएनएस तीर, आईएनएस शार्दूल, आईएनएस सुजाता और तटरक्षक पोत सारथी शामिल रहा। 

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