दिल्ली से सप्लाई चेन टूटी, त्योहारी सीजन में माल फंसा, धरना-प्रदर्शन वाले करें भरपाई

खबर सार :-

दिल्ली में लगातार प्रदर्शन हुए हैं। इससे नवरात्र की खरीदारी नहीं हो पाई। दीपावली की खरीद के लिए बाहरी कारोबारी नहीं आ रहे हैं। इसलिए धरना प्रदर्शन दिल्ली से बाहर ही हों। साथ ही व्यापारियों ने मांग की है कि उनका जो नुकसान हो रहा है, उसकी भरपाई प्रदर्शन करने वाली पार्टियां और सरकार मिलकर करें।
DELHI में प्रदर्शनों के चलते माल डंप, व्यापारियों को 3,000 करोड़ का नुकसान

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, दिल्ली में लगातार कई दिनों के धरना प्रदर्शनों को लेकर व्यापारियों में अब बेहद नाराजगी है। यह नाराजगी उनकी रोटी रोजी को लेकर है। उनकी पीड़ा है की लाखों रुपए का माल फंस जाएगा तो वह कहीं के नहीं रहेंगे। दुकानों का किराया भी दे पाना मुश्किल पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है की इन प्रदर्शनों को बंद किया जाए।

शहर के प्रमुख बाजारों पर व्यापक असर पड़ा

दिल्ली में विपक्षी नेताओं के द्वारा लगातार कई दिनों तक धरना प्रदर्शन किए गए। इस दौरान शहर के प्रमुख बाजारों पर व्यापक असर पड़ा है। आवागमन ठप होने से या ज्यादा भीड़भाड़ होने के कारण हंगामे का दौर चला और इसमें व्यापारियों को दुकान बंद करनी पड़ीं। धारा 163 लागू होने के कारण भी व्यापार प्रभावित हुआ। व्यापारियों में इस बात को लेकर बेहद नाराजगी है। आने वाले दिनों में बड़ा पर्व दीपावली है।

दीपावली के दौरान व्यापारी कई महीनों पहले से तैयारी करते हैं और दुकानों में लाखों रुपए का माल भरते हैं। दिल्ली की एक-एक छोटी-छोटी दुकानों का किराया भी महंगा है। लेकिन जिस तरह का धरना प्रदर्शन चल रहा है, पूरी दिल्ली को ठप कर दिया गया। ऐसे में बड़े मॉल भी प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस इन दिनों अगर माल फस गया तो वह बर्बाद हो जाएंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 3000 करोड रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

बाहर के लोग आना ही नहीं चाह रहे

सप्लाई की चेन पूरी तरह से टूट गई है। दिल्ली में प्रदर्शनों का मतलब केवल दिल्ली सीमित नहीं रही। पूरे देश के लोग यहां पर आते हैं। पर्यटकों में दुनिया भर के लोग दिल्ली आते हैं। उनके द्वारा भी हजारों रुपए की खरीदारी की जाती है, लेकिन जिस तरह से प्रदर्शनों के जरिए दिल्ली को ठप कर दिया गया। उससे व्यापारी अब कंगाल होने के कगार पर पहुंच रहे हैं। करीब 15 दिनों से यही माहौल चल रहा है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि इस प्रदर्शन से कोई हल नहीं निकलने वाला है।

इससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है। बता दें कि लगातार विरोध प्रदर्शनों के कारण उद्योग संगठन चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने शनिवार को कहा कि अक्टूबर में चल रहे प्रदर्शन के कारण दिल्ली में व्यापार अब तक करीब 3000 करोड रुपए का नुकसान हो चुका है। दुकान का माल दुकान में ही है। बाहर के लोग आना ही नहीं चाह रहे हैं। पूरी दिल्ली में असुरक्षा का माहौल है। 

सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल का कहना है कि 10 अक्टूबर को हुए पहले प्रदर्शन में 2000 करोड रुपए और 13 से 16 अक्टूबर के बीच सेंट्रल दिल्ली में ना की बंदी मेट्रो बंदी सेंट्रल पार्क बंद अतिरिक्त 1000 करोड़ रुपए का नुकसान माना जा रहा है। पिछले दिनों भी व्यापारी संगठनों में उद्योग संगठन ने कहा था कि नवरात्र में भी बड़े पैमाने पर खरीदारी की जाती है। यह दिन भी उनके साल में एक बार आते हैं। वह प्रदर्शनों की बलि चढ़ गए। इन प्रदर्शनों के चलते पीक खरीदारी उनकी ठप हो गई रिटेल क्षेत्र प्रभावित हो गया।

यह भी पढें : ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी, मानहानि मामले में होगी सुनवाई

करीब 600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ

दिल्ली में चांदनी चौक, सदर बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, भागीरथ प्लेस, गांधीनगर, नया बाजार, करोल बाग, लाजपत राय मार्केट के अलावा 700 से ज्यादा बाजार प्रभावित हुए हैं। इनके सटे प्रदेशों में भी बड़ा असर पड़ा है। सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, राजस्थान से दिल्ली आने वाली तीन चार लाख थोक खरीदार के नहीं आने से करीब 600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

कोई प्रदर्शनकारी आगे आने को तैयार नहीं

इस पीड़ा को समझने के लिए कोई प्रदर्शनकारी आगे आने को तैयार नहीं है, जबकि पूरी दिल्ली को आग लगाने की तैयारी सबने कर रखी है। लोकतंत्र और संविधान की रखवाली सब कर रहे हैं, लेकिन उसने संविधान और लोकतंत्र में आने वाले इन व्यापारियों की चिंता किसी को नहीं है। व्यापारियों ने कहा यह सब हम जानते हैं। इरादा क्या है और निशान कहां है? त्योहारों के लिए गोदाम भरे पड़े हैं, लेकिन व्यापार चौपट है। वहीं, दिल्ली के कई स्थानों पर मांग की जा रही है कि प्रदर्शन पूरी तरह से बंद किए जाएं। भविष्य के लिए बाहरी दिल्ली जैसे बुराड़ी, रोहिणी, द्वारका में विरोध प्रदर्शन के लिए जगह बनाया जाए।

यह भी पढें : ऊर्जा निगम ने पुलिस के साथ शुरू किया उत्तराखंड में अभियान, मुख्यमंत्री धामी ने बिजली चोरी रोकने के दिए निर्देश

अन्य प्रमुख खबरें