मोदी की कनाडा यात्रा से पहले CEPA पर तेजी, नवंबर तक समझौते की उम्मीद; 2030 तक 70 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

खबर सार :-

भारत और कनाडा CEPA को नवंबर तक अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। मोदी की दिसंबर यात्रा के दौरान हस्ताक्षर की उम्मीद है। दोनों देश व्यापार को 2030 तक 70 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए निवेश, एयरोस्पेस और ऊर्जा सहयोग बढ़ा रहे हैं।
मोदी की कनाडा यात्रा से पहले भारत-कनाडा CEPA पर तेज हुई वार्ता

खबर विस्तार : -

India-Canada trade agreement: भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बातचीत तेज हो गई है। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने बुधवार को उम्मीद जताई कि दोनों देश नवंबर तक प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की भी उम्मीद है। दोनों देशों का लक्ष्य वार्ता शुरू होने के एक वर्ष के भीतर समझौते को पूरा करना है। इससे व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना है।

नवंबर तक वार्ता पूरी करने का लक्ष्य

पटनायक ने बताया कि CEPA वार्ता का चौथा दौर पूरा हो चुका है और बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों ने वार्ता शुरू होने के एक साल के भीतर इसे पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई थी। पटनायक के अनुसार, प्रस्तावित समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। व्यापार के साथ-साथ निवेश, रक्षा, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, कृषि-खाद्य और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

टैरिफ और व्यापारिक बाधाएं घटने की उम्मीद

भारतीय उच्चायुक्त ने कहा कि CEPA से आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क यानी टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, तकनीकी मानकों से जुड़ी व्यापारिक अड़चनों और अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर भी काम किया जाएगा। इससे दोनों देशों की कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच बनाना और कारोबार का विस्तार करना आसान हो सकता है। समझौते से सेवाओं के व्यापार, निवेश प्रवाह और लोगों, वस्तुओं तथा पूंजी की आवाजाही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी को मजबूत आधार मिल सकता है।

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ऊर्जा, खनिज और एयरोस्पेस में सहयोग के अवसर

पटनायक ने कहा कि कनाडा भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और एयरोस्पेस उत्पादों का दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता बन सकता है। भारत में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ संसाधनों, उन्नत तकनीक और औद्योगिक उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है। उन्होंने कृषि-खाद्य उत्पादों, ऊर्जा, एयरोस्पेस एवं रक्षा उपकरणों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) समाधानों में सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और खुली अर्थव्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर दोनों देश दीर्घकालिक साझेदारी के नए अवसर तलाश सकते हैं।

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एयर इंडिया और कनाडाई मंत्री के बीच विमान खरीद पर चर्चा

भारत-कनाडा आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की कोशिशों के बीच कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने मंगलवार को दिल्ली में एयर इंडिया के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी (CCO) निपुण अग्रवाल से मुलाकात की। सिद्धू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि बैठक में एयर इंडिया की अतिरिक्त विमान खरीदने की योजनाओं और दोनों देशों के एयरोस्पेस उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई। बैठक में भारत और कनाडा के बीच हवाई संपर्क बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार किया गया। सिद्धू के मुताबिक, द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 30 अरब डॉलर से बढ़ाकर 70 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य के लिए दोनों देशों के बीच लोगों और सामानों की आवाजाही को अधिक तेज और कुशल बनाना जरूरी है।

300 कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ भारत पहुंचा कनाडा

कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री सिद्धू 12 से 17 अक्टूबर तक चल रहे टीम कनाडा ट्रेड मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं। इस मिशन में करीब 300 कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हैं। कनाडा इसे पिछले तीन दशकों में भारत के लिए अपने सबसे बड़े व्यापार प्रतिनिधिमंडलों में से एक बता रहा है। प्रतिनिधिमंडल मुंबई और बेंगलुरु समेत भारत के प्रमुख कारोबारी केंद्रों में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, संभावित ग्राहकों और भारतीय निर्णयकर्ताओं से संपर्क कर रहा है। इसका उद्देश्य व्यावसायिक संबंधों का विस्तार करना, निवेश आकर्षित करना और नई साझेदारियां विकसित करना है। मिशन में एयरोस्पेस एवं अंतरिक्ष, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, ऊर्जा संक्रमण, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान और कृषि-खाद्य क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। वानिकी और लकड़ी उत्पाद भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में हैं। कार्यक्रम के तहत कारोबारी बैठकें, औद्योगिक स्थलों का दौरा और कनाडाई व्यापार अधिकारियों की ओर से जानकारी साझा करने जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

2030 तक व्यापार दोगुना करने की योजना

सिद्धू ने कहा कि कनाडा अपनी विशेषज्ञता को भारत की बढ़ती मांग से जोड़कर व्यापार में विविधता लाना और नए निवेश आकर्षित करना चाहता है। उनका लक्ष्य 2030 तक भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। यह व्यापार मिशन CEPA वार्ता के पांचवें दौर के बाद आयोजित हो रहा है। पांचवां दौर 5 से 9 अक्टूबर तक ओटावा में हुआ था। अब दोनों देशों की नजर समझौते को अंतिम रूप देने और आर्थिक सहयोग के लिए ठोस रास्ते तैयार करने पर है। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर सहमति बनती है, तो प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित दिसंबर यात्रा के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम समयसीमा वार्ता के नतीजों और दोनों पक्षों की औपचारिक सहमति पर निर्भर करेगी।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)...

1. भारत और कनाडा के बीच CEPA समझौता क्या है?

CEPA यानी व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की पहल है। इसके तहत टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम करने तथा कारोबार की प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

2. भारत-कनाडा CEPA समझौते पर कब हस्ताक्षर होने की उम्मीद है?

भारत में कनाडा के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक के अनुसार, दोनों देश नवंबर तक वार्ता पूरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित दिसंबर यात्रा के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

3. भारत और कनाडा ने द्विपक्षीय व्यापार के लिए क्या लक्ष्य रखा है?

दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब डॉलर करना है। इसके लिए एयरोस्पेस, ऊर्जा, कृषि-खाद्य, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

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