अमेरिकी मसाला उद्योग की बड़ी मांग, भारतीय मसालों पर टैरिफ छूट स्थायी करने की पैरवी तेज

खबर सार :-

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच अमेरिकी मसाला उद्योग ने भारतीय मसालों पर टैरिफ छूट जारी रखने और इसे स्थायी बनाने की मांग की है। भारत से अमेरिका हर साल करीब 700 मिलियन डॉलर के मसाले आयात करता है।
अमेरिकी मसाला उद्योग की मांग, भारतीय मसालों पर टैरिफ छूट रहे कायम

खबर विस्तार : -

India-US Trade Agreement: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी रहने के बीच अमेरिकी मसाला उद्योग ने भारतीय मसालों पर मौजूदा टैरिफ छूट को बनाए रखने और भविष्य में इसे स्थायी रूप देने की मांग की है। अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन (ASTA) का कहना है कि कई मसाले ऐसे हैं, जिन्हें अमेरिका में व्यावसायिक स्तर पर उगाना संभव नहीं है। ऐसे में इन उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से अमेरिकी उपभोक्ताओं और खाद्य कारोबार पर लागत का दबाव बढ़ सकता है।  

टैरिफ में छूट से जुड़ी यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में कई मुद्दों पर अभी सहमति बाकी है। फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए रूपरेखा पर सहमति जताई थी, लेकिन अक्टूबर में वार्ता को लेकर दोनों पक्षों ने चुनौतियां और सीमित गुंजाइश होने की बात कही है।

भारत से हर साल 700 मिलियन डॉलर के मसालों का आयात

ASTA के अध्यक्ष डोनाल्ड प्रैट के अनुसार, अमेरिका हर साल भारत से करीब 70 करोड़ डॉलर यानी 700 मिलियन डॉलर के मसालों का आयात करता है। भारतीय मसाले अमेरिकी खाद्य उद्योग के लिए महत्वपूर्ण आपूर्ति स्रोत हैं और इनका इस्तेमाल रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों में किया जाता है। प्रैट ने कहा कि उद्योग की प्राथमिकता उन कृषि उत्पादों को टैरिफ से राहत दिलाना है, जिन्हें अमेरिका में पर्याप्त मात्रा में पैदा नहीं किया जा सकता। उनका तर्क है कि यदि ऐसे उत्पादों पर शुल्क लगाया जाता है तो इससे घरेलू अमेरिकी उत्पादकों को खास फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि इन मसालों का पर्याप्त घरेलू उत्पादन ही उपलब्ध नहीं है। भारत और अमेरिका के बीच मसाला व्यापार को लेकर ASTA पिछले करीब 18 महीनों से भारतीय दूतावास के साथ संपर्क में है। संगठन ने टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के साथ-साथ भारतीय मसालों की अमेरिकी बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी पैरवी की है।

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जीरा, सौंफ और मिर्च की आपूर्ति में भारत अहम

अमेरिकी मसाला उद्योग के मुताबिक, भारत से आने वाले जीरा, सौंफ, मिर्च और कई अन्य मसाले अमेरिकी खाद्य कारोबार में व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं। संगठन का कहना है कि इन उत्पादों को अमेरिका में बड़े पैमाने पर उगाना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए आयात पर निर्भरता बनी रहेगी। ASTA की विज्ञान एवं नियामक समिति के अध्यक्ष रॉबर्टो फानी ने भी मसालों को टैरिफ छूट दिए जाने के पीछे यही तर्क बताया कि अमेरिका इनका प्रमुख उत्पादक नहीं है। उनके अनुसार, इन उत्पादों पर शुल्क लगाने से किसी बड़े घरेलू मसाला उत्पादन उद्योग को संरक्षण मिलने की संभावना सीमित है। ASTA की कार्यकारी निदेशक लौरा शूमोव ने भारत को अमेरिकी मसाला कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बताया है। उनके मुताबिक संगठन अमेरिका में मसालों के आयात, प्रसंस्करण, विनिर्माण और मार्केटिंग से जुड़ी करीब 100 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।

भारतीय मसालों की मांग बढ़ने की उम्मीद

अमेरिकी बाजार में भारतीय मसालों की मांग सिर्फ पारंपरिक खाद्य इस्तेमाल तक सीमित नहीं रह गई है। ASTA के अनुसार, हल्दी जैसे मसालों का इस्तेमाल अब चाय और अन्य उत्पादों में भी बढ़ रहा है। इससे भारतीय मसालों के लिए अमेरिकी बाजार में नए अवसर बन रहे हैं। भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भी कहा है कि अमेरिका को भारतीय मसालों का निर्यात साल-दर-साल बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार की संभावना है। भारतीय दूतावास ने ASTA के साथ मिलकर अमेरिका में भारतीय मसालों की पहुंच और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किया है।

व्यापार समझौते में स्थायी छूट की मांग

ASTA अब चाहता है कि भारतीय मसालों को मौजूदा टैरिफ राहत का लाभ आगे भी मिलता रहे और इसे किसी संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में स्थायी रूप से सुरक्षित किया जाए। संगठन का तर्क है कि इससे अमेरिकी खाद्य कंपनियों को जरूरी कच्चा माल प्रतिस्पर्धी कीमत पर मिलता रहेगा और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लागत का दबाव कम रहेगा। फरवरी 2026 में घोषित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा में दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में बाजार पहुंच और टैरिफ से जुड़े प्रावधानों पर सहमति जताई थी। भारत सरकार ने भी उस समय बताया था कि कुछ कृषि उत्पादों, जिनमें मसाले शामिल हैं, को अमेरिकी बाजार में शून्य अतिरिक्त शुल्क का लाभ मिलेगा। हालांकि, मौजूदा व्यापार वार्ता की स्थिति को देखते हुए टैरिफ व्यवस्था के अंतिम स्वरूप पर बातचीत महत्वपूर्ण बनी हुई है। अमेरिकी मसाला उद्योग की मांग ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में मसाले एक छोटे लेकिन रणनीतिक क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं। उद्योग की कोशिश है कि जिन उत्पादों का अमेरिका में पर्याप्त घरेलू उत्पादन संभव नहीं है, उन पर व्यापारिक बाधाएं कम से कम रखी जाएं।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)...

1. अमेरिकी मसाला उद्योग ने भारत से जुड़ी क्या मांग की है?

अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन ने भारतीय मसालों पर मौजूदा टैरिफ छूट जारी रखने और इसे भविष्य में स्थायी रूप देने की मांग की है।

2. अमेरिका भारत से किन मसालों का आयात करता है?

अमेरिका भारत से जीरा, सौंफ, मिर्च और कई अन्य मसालों का आयात करता है। इन मसालों का इस्तेमाल अमेरिकी खाद्य उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है।

3. अमेरिका भारत से कितने मूल्य के मसाले आयात करता है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिका हर साल भारत से करीब 70 करोड़ डॉलर यानी 700 मिलियन डॉलर मूल्य के मसालों का आयात करता है।

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