भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात जून में चमका, 26.5% की तेज बढ़त से उद्योग को मिली नई रफ्तार
खबर सार :-
जून 2026 के आंकड़े बताते हैं कि भारत का रत्न एवं आभूषण उद्योग वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत वापसी की ओर बढ़ रहा है। सोने के आभूषण, कटे-पॉलिश किए हीरे और लैब-ग्रोन डायमंड की बढ़ती मांग ने निर्यात को नई गति दी है। यदि अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार जारी रहा तो वर्ष की दूसरी छमाही में यह क्षेत्र और बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
खबर विस्तार : -
India's gem and jewellery exports: वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए जून 2026 राहत और उम्मीद लेकर आया है। जून महीने में देश का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात सालाना आधार पर 26.5 प्रतिशत बढ़कर 2.21 अरब डॉलर पहुंच गया। उद्योग से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार लंबे समय से कमजोर मांग और आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना कर रहे थे। निर्यात में यह उछाल उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
Q1 में भारत का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात 6.61 अरब डॉलर
वित्त वर्ष 2026-27 (अप्रैल-जून 2026) की पहली तिमाही में भारत का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात 6.61 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 0.04 प्रतिशत अधिक है। भले ही तिमाही वृद्धि सीमित रही हो, लेकिन जून के मजबूत प्रदर्शन ने पूरे सेक्टर में नई ऊर्जा का संचार किया है। आयात के मोर्चे पर भी जून में गतिविधियां बढ़ीं। इस दौरान कुल आयात 10.06 प्रतिशत बढ़कर 1.72 अरब डॉलर रहा। हालांकि, पहली तिमाही के आधार पर आयात में 5.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 4.97 अरब डॉलर पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योग फिलहाल नई खरीदारी की बजाय मौजूदा स्टॉक के बेहतर उपयोग पर ध्यान दे रहा है।
कटे और पॉलिश्ड हीरों का निर्यात बढ़कर पहुंचा 84.67 करोड़ डॉलर
कटे और पॉलिश किए गए हीरों का निर्यात जून में 8.7 प्रतिशत बढ़कर 84.67 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष जून में यह 77.88 करोड़ डॉलर था। हालांकि, अप्रैल-जून तिमाही में इस श्रेणी के निर्यात में 4.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद मात्रा के लिहाज से प्रदर्शन बेहतर रहा और पहली तिमाही में कटे एवं पॉलिश किए गए हीरों का निर्यात 8.9 प्रतिशत बढ़कर 39.8 लाख कैरेट पहुंच गया। इस अवधि में प्रति कैरेट औसत मूल्य 681.7 डॉलर रहा। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुझान अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हीरे के आभूषणों की मांग में सुधार का संकेत है। अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में आगामी हॉलिडे सीजन को देखते हुए ऑर्डर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) को मिल रही प्राथमिकता भी निर्यात को गति देने में सहायक साबित हो सकती है। दूसरी ओर, अपरिष्कृत यानी रफ हीरों के आयात में गिरावट का दौर जारी है। जून 2026 में रफ हीरों का सकल आयात 70.03 करोड़ डॉलर रहा, जबकि अप्रैल-जून तिमाही में इसमें सालाना आधार पर 32.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मात्रा के हिसाब से जून में 66.9 लाख कैरेट रफ हीरों का आयात हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.6 प्रतिशत कम है।

लैब-ग्रोन हीरों का बाजार लगातार हो रहा मजबूत
विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में मांग की अनिश्चितता के कारण भारतीय निर्माता फिलहाल नई खरीदारी करने की बजाय पुराने स्टॉक को कम करने की रणनीति अपना रहे हैं। हालांकि, अंतिम उपभोक्ताओं की मांग बढ़ने के साथ आने वाले समय में रफ हीरों के आयात में भी तेजी लौट सकती है। इस बीच लैब-ग्रोन हीरों का बाजार लगातार मजबूत हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तैयार लैब-ग्रोन डायमंड को बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है। महंगे प्राकृतिक हीरों की तुलना में कम कीमत और आकर्षक विकल्प होने के कारण कीमत के प्रति संवेदनशील ग्राहक इस श्रेणी को तेजी से अपना रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह सेगमेंट भारतीय निर्यात का प्रमुख आधार बन सकता है।
सोने के आभूषणों का निर्यात 54.5 प्रतिशत बढ़ा
सोने के आभूषणों ने जून में सबसे शानदार प्रदर्शन किया। इस श्रेणी का निर्यात 54.5 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ 1.09 अरब डॉलर पहुंच गया। इसमें जड़ाऊ आभूषणों का सबसे बड़ा योगदान रहा। हालांकि, सादे सोने के आभूषणों के निर्यात में तिमाही के दौरान मिश्रित रुझान देखने को मिले। चांदी और प्लैटिनम के आभूषणों ने भी निर्यात वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इन दोनों श्रेणियों के निर्यात में 20 से 27 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि भारतीय आभूषण उद्योग केवल पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि विविध श्रेणियों में भी वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
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