चिप्स बनेंगी भविष्य की बुनियाद, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लंबी सोच और धैर्यवान पूंजी जरूरी: चंद्रशेखरन

खबर सार :-

एन. चंद्रशेखरन के मुताबिक, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सफलता के लिए धैर्यवान पूंजी, लंबी अवधि की रणनीति और वित्तीय अनुशासन जरूरी हैं। वैश्विक साझेदारी, बाजार की मांग और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला भारत की तकनीकी क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
सेमीकंडक्टर में लंबी सोच जरूरी, चिप्स ही भविष्य की बुनियाद

खबर विस्तार : -

Semiconductor Investment: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए धैर्यवान पूंजी और दीर्घकालिक नजरिया जरूरी है। इस क्षेत्र में दो या तीन साल में लक्ष्य हासिल करना ही सबसे महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर मजबूत आधार तैयार करना ज्यादा अहम है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चिप्स ही तकनीक और उद्योगों की बुनियाद बनने वाली हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में चंद्रशेखरन ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश करते समय अल्पकालिक परिणामों के बजाय दीर्घकालिक जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके मुताबिक, यदि किसी परियोजना को भारत, मानवता और कंपनियों के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है, तो वह सही दिशा में आगे बढ़ सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि इस राह में चुनौतियां नहीं आएंगी।

एक साथ कई वैश्विक चुनौतियां

चंद्रशेखरन ने कहा कि दुनिया पहले भी कई मुश्किल दौर से गुजरी है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां अलग हैं। इस समय भू-राजनीतिक उथल-पुथल, धातुओं की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी चुनौतियां एक साथ सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में कंपनियों के लिए भविष्य की जरूरतों का अनुमान लगाना और अपनी रणनीति को मजबूत बनाना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने के साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। कंपनियों को अपनी बैलेंस शीट पर लगातार नजर रखनी चाहिए और निवेश के मामले में लापरवाही से बचना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी बड़े औद्योगिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के साथ वित्तीय मजबूती बनाए रखना जरूरी है।

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पांच साल में चार गुना हुआ इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि देश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पांच साल पहले लगभग 12 अरब डॉलर था, जो इस साल बढ़कर 48 अरब डॉलर हो गया है। यह वृद्धि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल अत्याधुनिक तकनीक की घोषणा करने के बजाय बाजार की वास्तविक मांग के अनुरूप काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ दो-नैनोमीटर चिप बनाने की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं है। कंपनियों को यह भी देखना होगा कि बाजार में किस तरह की चिप्स की मांग है और किस तकनीक में निवेश व्यावसायिक रूप से टिकाऊ साबित हो सकता है।

वैश्विक साझेदारी से मजबूत होगी तकनीकी क्षमता

चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग करना होगा, क्योंकि फिलहाल देश के पास सभी प्रकार की तकनीक उपलब्ध नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी से तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और इस क्षेत्र की जटिल चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस धारणा से भी असहमति जताई कि किसी कंपनी को मजबूत बनाने के लिए कार्यक्षमता से समझौता करना पड़ता है। उनके मुताबिक, उतार-चढ़ाव और अप्रत्याशित संकटों का सामना करने में सक्षम व्यवस्था तैयार करना वास्तव में कार्यक्षमता बढ़ाने का तरीका है। कंपनियों को ऐसी आपूर्ति श्रृंखला और परिचालन व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जो संकट के दौरान भी काम जारी रखने में मदद करे।

साइबर हमले और आपूर्ति संकट से सबक

चंद्रशेखरन ने टाटा समूह की कंपनी जैगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इस घटना के कारण करीब छह सप्ताह तक उत्पादन प्रभावित रहा। इसके अलावा, मैग्नेट जैसी जरूरी सामग्रियों की कमी भी वाहन निर्माण को रोक सकती है। ये उदाहरण बताते हैं कि तकनीकी सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती किसी भी उद्योग के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद टाटा समूह दोहरे अंकों की वृद्धि हासिल करने और अपने मार्जिन को बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके विचारों से स्पष्ट है कि सेमीकंडक्टर सहित रणनीतिक उद्योगों में टिकाऊ सफलता के लिए दीर्घकालिक निवेश, वित्तीय अनुशासन, वैश्विक सहयोग और संकटों से निपटने की क्षमता पर एक साथ ध्यान देना होगा।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)...

1. एन. चंद्रशेखरन ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए क्या जरूरी बताया?

उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सफलता के लिए धैर्यवान पूंजी, लंबी अवधि की रणनीति और वित्तीय अनुशासन को जरूरी बताया।

2. भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पांच साल में कितना बढ़ा है?

चंद्रशेखरन के मुताबिक, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पांच साल पहले लगभग 12 अरब डॉलर था, जो इस साल बढ़कर 48 अरब डॉलर हो गया है।

3. भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक साझेदारों की जरूरत क्यों है?

भारत के पास अभी सभी प्रकार की सेमीकंडक्टर तकनीक उपलब्ध नहीं है। वैश्विक साझेदारों के सहयोग से तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और उद्योग को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

 

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