वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, चंद्रशेखरन बोले- घरेलू मांग बनी बड़ी ताकत

खबर सार :-

एन. चंद्रशेखरन ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत और स्थिर बताते हुए घरेलू मांग, सेवा निर्यात, विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकिंग क्षेत्र को प्रमुख ताकत बताया। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लिए गुणवत्ता, नवाचार और टिकाऊ विनिर्माण पर जोर दिया।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत: चंद्रशेखरन

खबर विस्तार : -

Indian Economy: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने घरेलू मांग, सेवा निर्यात और अनुकूल नीतिगत माहौल को देश की आर्थिक मजबूती के प्रमुख आधारों में शामिल किया। चंद्रशेखरन ने यह बात इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट सिम्पोजियम 2026 में कही। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में लगातार उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है और मजबूत विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख संकेतक देश की मौजूदा स्थिर स्थिति की तस्वीर पेश करते हैं।

ऑटो, क्रेडिट और बिजली मांग से मजबूती के संकेत

चंद्रशेखरन ने ऑटोमोबाइल बिक्री, क्रेडिट ग्रोथ, बिजली और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में मजबूत मांग को आर्थिक गतिविधियों में तेजी का महत्वपूर्ण संकेत बताया। उनका कहना था कि इन क्षेत्रों का प्रदर्शन घरेलू अर्थव्यवस्था में मांग की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी के एक प्रतिशत से लगातार नीचे बना हुआ है। इसके अलावा सेवा निर्यात जीडीपी के करीब 11 प्रतिशत के बराबर है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की बेहतर स्थिति भी आर्थिक परिदृश्य को समर्थन दे रही है।

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विकसित भारत 2047 के लिए मजबूत आधार जरूरी

टाटा संस के चेयरमैन ने कहा कि भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे, मजबूत संस्थानों और बौद्धिक संपदा का सहारा जरूरी होगा। उन्होंने समावेशी और टिकाऊ विकास को लंबे समय तक आर्थिक प्रगति बनाए रखने की अहम शर्त बताया। चंद्रशेखरन के अनुसार, भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के साथ उन्नत और सटीक विनिर्माण में रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे। इसके साथ मानव पूंजी में निवेश को भी प्राथमिकता देनी होगी। उनका मानना है कि इन क्षेत्रों में निरंतर निवेश से देश की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूती मिल सकती है।

विनिर्माण में गुणवत्ता और नवाचार पर जोर

चंद्रशेखरन ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने गुणवत्ता, नवाचार, उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को उद्योग की प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत जर्मनी जैसे देशों के अनुभवों से सीख सकता है। जर्मनी ने इंजीनियरिंग, मानकों और सटीकता के साथ मजबूत आपूर्तिकर्ता नेटवर्क तथा छोटे एवं मध्यम उद्यमों के इकोसिस्टम के जरिए अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत किया है। चंद्रशेखरन के मुताबिक, भारत को भी इसी तरह के बदलाव की आवश्यकता है, ताकि घरेलू विनिर्माण को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि गुणवत्ता और उत्पादकता में लगातार सुधार भी जरूरी है।

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टिकाऊ विनिर्माण को बनाना होगा विकास का हिस्सा

उन्होंने भारत की व्यापक विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं में टिकाऊ विनिर्माण को शामिल करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, टिकाऊ उत्पादन पद्धतियों पर जोर देने से भारतीय उद्योग वैश्विक मानकों के अनुरूप खुद को बेहतर ढंग से तैयार कर सकता है। चंद्रशेखरन ने यह भी कहा कि बदलाव की प्रक्रिया केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मध्यम स्तर के कारोबारी इकोसिस्टम में भी मजबूत नेतृत्व विकसित करना जरूरी है। इससे ऐसे विशेषज्ञ तैयार किए जा सकेंगे, जो वैश्विक विनिर्माण मानकों और बेहतर कारोबारी प्रथाओं में योगदान दे सकें। उन्होंने भारत की मौजूदा आर्थिक मजबूती को अवसर में बदलने के लिए घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र और विनिर्माण क्षमता के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। उनके मुताबिक, दीर्घकालिक विकास के लिए गुणवत्ता, कौशल, नवाचार और टिकाऊ उत्पादन को आर्थिक रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)....

1. एन. चंद्रशेखरन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है। घरेलू मांग, सेवा निर्यात और अनुकूल नीतिगत माहौल इसके प्रमुख आधार हैं।

2. भारत की आर्थिक मजबूती के कौन से संकेतक बताए गए?

चंद्रशेखरन ने ऑटो बिक्री, क्रेडिट ग्रोथ, बिजली और सीमेंट की मांग, कम चालू खाता घाटा, मजबूत सेवा निर्यात, विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकों की बेहतर एनपीए स्थिति का उल्लेख किया।

3. विकसित भारत 2047 के लिए किन क्षेत्रों पर जोर दिया गया?

उन्होंने विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे, मजबूत संस्थानों, मानव पूंजी में निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, गुणवत्ता, नवाचार, उत्पादकता और टिकाऊ विनिर्माण को दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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