खेत की ज्यादा जुताई करती है नुकसान, ढैंचा और गोबर की खाद मिट्टी की है ताकत

खबर सार :-

बिहार में किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसमें दो गुना फसल के लिए खेत और मिट्टी बचाने पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।
खेत बचाओ अभियान बन रहा जन-आंदोलन, पटना में सफलता के लिए भरी हुंकार

खबर विस्तार : -

पटना, मुजफ्फरपुर में खेत बचाओ अभियान-सह-कृषि जन कल्याण संवाद का शुभारम्भ सोमवार को मंत्री कृषि विभाग विजय कुमार सिन्हा ने किया। उन्होंने कहा कि खेत बचाओ, जीवन बचाओ” का संदेश जन जन तक पहुंचाने की जरूरत है। खेत बचाओ जीवन बचाओ एक ऐसा संदेश है, जो बताता है कि हमें धरती को आने वाली पीढ़ियों और किसान के भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का हमारा संकल्प है। 

उनका कहनो का मतलब था कि खेत सुरक्षित होंगे, मिट्टी स्वस्थ होगी और किसान समृद्ध होंगे, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा। कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार के आह्वान पर 22 अक्टूबर से देशव्यापी अभियान चलाया जरा रहा है। इसमें खेत बचाओ के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बिहार में भी इस अभियान को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। लोगों की भावना उनके अनुरूप हो लेकिन मिट्टी फसल योग्य रहे। आज मुजफ्फरपुर से अभियान को नई गति देने का संकल्प लिया गया।

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जन-आंदोलन बनाने के लिए आगे आएं किसान

यह अभियान 30 नवंबर, 2026 तक संचालित होगा। विजय सिन्हा ने कहा कि खेत बचाओ अभियान-सह-कृषि जन कल्याण संवाद’ किसानों की समृद्धि के लिए प्रेरित करता है। किसान को मिट्टी के संरक्षण और महिला उद्यमिता के साथ युवा रोजगार और श्रमिकों के सम्मान के लिए विस्तृत क्षेत्र उपलब्ध कराता है। किसान को खेत से परिवार को अपनी जमीन से  जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। उनका कहने का मतलब ऐसे संकल्प से है जो कि कृषि सशक्त हो, गाँव समृद्ध बनें और बिहार विकास की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करे।

उन्होंने कहा कि सरकार ने दो गुना आय का सपना देखा है, इसको पूरा करने के लिए सभी प्रयत्न किए जा रहे हैं। आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग खेती की लागत बढ़ाने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। यह ऐसी जानकारी है जो हमें हमारे उद्देश्य के प्रति सचेत करता है। इसलिए मिट्टी की जाँच, मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा और वैज्ञानिक सलाह के आधार का संतुलित प्रयोग करना चाहिए। खेत की फसल उसकी मिट्टी और बीजों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।

खाद का सही उपयोग करें किसान 

यदि हमने ज्यादा लाभ के लिए खाद का उपयोग अधिक कर दिया तो हमारा मिट्टी के प्रति चिंता का अधिकार नहीं रही जाता है। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि खेत में कितनी खाद डाली गई, बल्कि यह है कि मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद का कितना सही उपयोग किया गया। कृषि जन कल्याण संवाद के अंतर्गत नकली खाद एवं नकली बीज की बिक्री पर चिंता जताई गई। नकली उर्वरकों के उत्पादन एवं बिक्री में संलिप्त लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह आशा कृषि मंत्री ने दी है। अब वासंतिक (रबी) मौसम 2026-27 में इस अभियान को राज्य के सभी 534 प्रखंडों तक पहुँचाने की योजना बनाई गई है। 

फसल चक्र पर किसानों ने सोचना ही छोड़ दिया

मिट्टी की सेहत बनाने के लिए जैविक खाद और कंपोस्ट का उपयोग प्रभावी तरीका बन रहा है। इसमें गोबर की खाद, वर्मीकंपोस्ट या अन्य जैविक पदार्थ मिलाने की परंपरा का विकास किया जा रहा है। इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता और पोषक तत्व बढ़ाने के लिए बारबार कृषि वैज्ञानिक सुझाव दे रहे हैं। फसल चक्र के बारे में किसानों ने सोचना ही छोड़ दिया है। हर मौसम में एक ही फसल उगाने की आदत बन गई है। लेकिन इस आदत को त्याग कर अलग-अलग प्रकार की फसलें जैसे दालें  पर जोर देना होगा।

बदलकर फसल बोने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और कीटों का चक्र टूटता है। हमने अपने खेतों को हरी खाद या आवरण फसलें देना छोड़ दिया है। जबकि खेत खाली होने पर ढैंचा, सनई या मटर जैसी फसलें उगाकर उन्हें मिट्टी में मिला देना चाहिए। खेत की बार-बार गहरी जुताई करने से मिट्टी की संरचना बिगड़ती है। जबकि बात कम से कम किसान जानते हैं। कम जुताई में मिट्टी के सूक्ष्मजीव सुरक्षित रहते हैं।

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