यूरोप में Indian रक्षा उत्पादों पर भरोसा जगा, operation sindoor और आत्मनिर्भर पहल की है कामयाबी

खबर सार :-

भारत की रक्षा प्रणाली के लिए यह खुशखबरी है। कई देशों में रक्षा क्षेत्र से जुड़े उपकरण भारत से मंगाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है की रक्षा निर्यात के आंकड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रक्षा उद्योग को बढ़ा रहे हैं।
रक्षा निर्यात में India की छलांग: Europe में भारतीय हथियारों की मांग बढ़ी

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से, भारत से कुछ यूरोपीय देशों को होने वाले गोला-बारूद और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में 1,600 प्रतिशत के करीब वृद्धि हुई है। इस नए परिवर्तन से भारत पूर्वी और मध्य यूरोप के 13 देशों को आपूर्ति करने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंचा है। इन दो देशों में युद्ध से पहले भारत इस सूची में 29वें स्थान से नीचे था। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद के चार वर्षों में भारतीय कंपनियों ने यूरोपीय देशों को मजबूत उत्पादों का निर्यात किया है। 

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 के 23,622 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ हो गया है। भारत ने 79 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात किए हैं। रक्षा निर्यात में सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की कंपनियों का योगदान रहा।  रूस और यूक्रेन में युद्ध होने से पहले 4 सालों में निर्यात का मूल्य केवल 49.9 मिलियन डॉलर के करीब था। युद्ध से पहले और बाद में तुलनात्मक अध्ययन के आंकड़े में काफी अंतर है। इसका कारण है कि युद्ध के बाद भारत के सैनिक उपकरणों के निर्यात में वृद्धि हुई है। यह आंकड़े विशेष रूप से गोला बारूद और उससे जुड़े उत्पादों की श्रेणियां से संबंधित हैं। 

रक्षा कंपनियों के लिए विदेशी ग्राहकों से ज्यादा उम्मीदें

भारत में कई सैन्य उपकरण तैयार किये जा रहे हैं। उनकी मांग यूरोपीय देशों में ज्यादा हो रही है। रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय देशों में अपने सैन्य भंडार करने की जरूरत महसूस हो रही है। कई देशों में रक्षा विस्तार की तैयारी के कारण भारतीय हथियारों की खरीद की जा रही है। भारत के लिए यह काफी उत्साह बढ़ाने वाली जानकारियां हैं। भारत सहित अन्य देशों की कंपनियों के लिए आगे आने वाले आपूर्ति के अवसर मिलेंगे। पोलैंड, रोमानिया, चेक गणराज्य और बुल्गारिया सहित कई पूर्वी व मध्य यूरोपीय देशों में खपत बढ़ी है। भारतीय बाजार की रक्षा कंपनियों के लिए विदेशी ग्राहकों से ज्यादा उम्मीदें जगी हैं। 

भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल को मिल रही प्रमुखता

रक्षा निर्यात में आई तेजी के साथ भारत का कुल रक्षा निर्यात रिकॉर्ड बना रहा है। मांग और खपत की संभावनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती उत्पादन की क्षमता और विदेशों में उसकी विस्तार की संभावनाएं प्रबल हो रही हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों के निर्यात में 151 फीसदी, जबकि निजी क्षेत्र के निर्यात में 14 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल को भी प्रमुखता मिल रही है। इसमें देश में बड़े युद्ध विमान, मिसाइल, टैंक और ड्रोन देश में ही तैयार किये जा रहे हैं। भारत के सैन्य उपकरणों को विदेशों में पसंद किए जाने का एक कारण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान के मजबूत उदाहरण भी रहे हैं। ब्लूमवर्ग की एक रिपोर्ट कहती है कि भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिला है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम की जा रही है। 

निवेश करने वालों को भी भारत के प्रति रुझान बढ़ा

यह ऐसे प्रयास हैं, जिन पर कई देशों का भरोसा टिकने लगा है। निवेश करने वालों को भी भारत के प्रति रुझान बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है की रक्षा निर्यात के आंकड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रक्षा उद्योग को बढ़ा रहे हैं। साथ ही यह भी कहा है कि निर्यात में तेजी से वृद्धि बनाए रखने के लिए भारत में कंपनियों को समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करनी होगी। वैश्विक स्तर पर भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत स्थिति के लिए निर्यात के समय पर ध्यान देना होगा। समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करनी होगी और गुणवत्ता में मानक से भी खरे उतरना होगा।

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