भारत-पोलैंड साझेदारी को नई धार: 2030 तक व्यापार दोगुना, रक्षा, अहम खनिज और एआई सहयोग पर जोर

खबर सार :-

भारत और पोलैंड ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला मजबूत करने और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। एआई, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और निवेश भी रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख केंद्र रहेंगे।
भारत-पोलैंड की नई रणनीति: खनिज, रक्षा और व्यापार पर बड़ा जोर

खबर विस्तार : -

India-Poland relations:  भारत और पोलैंड ने अपने रणनीतिक संबंधों को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला मजबूत करने, रक्षा सहयोग बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक दोगुना करने पर जोर दिया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, उभरती प्रौद्योगिकियों, नवीकरणीय ऊर्जा और सुरक्षा समेत कई प्रमुख मुद्दे एजेंडे में शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के पश्चिमी मामलों के सचिव सीबी जॉर्ज ने गुरुवार को प्रेस वार्ता में दोनों देशों के बीच सहयोग की प्राथमिकताओं और अहम समझौतों की जानकारी दी।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

सीबी जॉर्ज ने कहा कि प्रधानमंत्री टस्क के साथ वित्त मंत्री और बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। यह करीब चार दशक में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पोलैंड यात्रा थी। दोनों देशों ने 2024-28 की अवधि के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार की है। इसी वर्ष भारत और पोलैंड के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष भी पूरे हुए थे। जॉर्ज के मुताबिक, मध्य एवं पूर्वी यूरोप और यूरोपीय संघ के भीतर पोलैंड भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में टस्क की यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों के साथ व्यापक भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूती देने का अवसर है।

6.36 अरब डॉलर के व्यापार को दोगुना करने की तैयारी

भारत और पोलैंड के बीच आर्थिक सहयोग को विस्तार देना यात्रा की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। सीबी जॉर्ज के अनुसार, वर्ष 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार करीब 6.36 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। अब दोनों पक्ष 2030 तक इसे दोगुना करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत में निवेश और कारोबार के नए अवसर तलाशने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोलैंड की कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम से जुड़ने का आमंत्रण दिया है। दोनों देशों ने मजबूत आपूर्ति शृंखला विकसित करने, छोटे एवं मध्यम उद्यमों को समर्थन देने, नवाचार को बढ़ावा देने और डिजिटल बदलाव पर भी जोर दिया है। पोलैंड में भारतीय निवेश 3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। पोलैंड के प्रधानमंत्री के साथ आए कारोबारी प्रतिनिधिमंडल में रक्षा, कृषि प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, तकनीक, खनन, बुनियादी ढांचे, भारी मशीनरी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क और निवेश सहयोग बढ़ने की संभावनाएं हैं।

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महत्वपूर्ण खनिज और ईवी बैटरी पर नजर

भारत और पोलैंड के बीच सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला है। आधुनिक उद्योगों, इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के लिए जरूरी खनिजों की उपलब्धता को देखते हुए दोनों देश इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। सीबी जॉर्ज ने बताया कि व्यापार और निवेश के साथ इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और स्वच्छ तकनीकें भी साझेदारी के अहम क्षेत्र हैं। आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि उद्योगों को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने और नई तकनीकों के विकास में सहयोग मिल सके।

एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक में साझेदारी

विज्ञान और नवाचार को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए जॉर्ज ने कहा कि भारत और पोलैंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। उन्होंने बताया कि फरवरी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में पोलैंड के प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी के बाद दोनों देशों ने तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके तहत स्टार्टअप साझेदारी मजबूत करने और कारोबारियों, शोध संस्थानों तथा नवाचार से जुड़े संगठनों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इससे तकनीकी अनुसंधान और नए व्यावसायिक अवसरों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

रक्षा सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख

रक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सीबी जॉर्ज ने बताया कि दोनों पक्ष गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा और आदान-प्रदान से जुड़े समझौतों को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिजों, अभिलेखीय सहयोग तथा संस्कृति, विज्ञान और उच्च शिक्षा से संबंधित समझौतों को आगे बढ़ाना भी चर्चा का हिस्सा है। दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की और आतंकवादियों, उनके नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों तथा वित्तपोषण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। साथ ही, दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित प्रभावी और सुधारवादी बहुपक्षवाद के प्रति अपना समर्थन दोहराया। पोलैंड ने विस्तारित और सुधारवादी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए।

भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को भी मिलेगी मजबूती

पोलैंड यूरोपीय संघ का महत्वपूर्ण सदस्य है। ऐसे में भारत और पोलैंड के बीच बढ़ता सहयोग भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के लिए भी अहम माना जा रहा है। दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते, यूरोपीय संघ के नए रणनीतिक एजेंडे, सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी और मोबिलिटी फ्रेमवर्क का स्वागत किया है। कुल मिलाकर, भारत और पोलैंड आर्थिक सहयोग, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत तकनीकों को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। व्यापार को 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य इस साझेदारी का प्रमुख आर्थिक आधार है, जबकि सुरक्षा, अनुसंधान और यूरोपीय संघ के साथ व्यापक जुड़ाव इसके रणनीतिक आयाम को विस्तार देते हैं।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)...

1. भारत और पोलैंड ने द्विपक्षीय व्यापार को लेकर क्या लक्ष्य तय किया है?

दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2025 में यह करीब 6.36 अरब अमेरिकी डॉलर था।

2. भारत-पोलैंड सहयोग के प्रमुख क्षेत्र कौन-से हैं?

दोनों देश महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा, ईवी बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा, एआई, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

3. पोलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का समर्थन किया है?

हां, पोलैंड ने सुधारवादी और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है।

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