​मिडिल ईस्ट में तनाव का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव, यूनाइटेड नेशंस से संघर्ष कम करने की अपील

खबर सार :-

भारत ने खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव को तत्काल कम करने और बातचीत व कूटनीति के जरिए मामले का हल निकालने की बात कही है। भारत का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव इस क्षेत्र की स्थिरता पर असर डालने के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में तत्काल कम हो तनाव, बातचीत—कूटनीति के जरिए निकले हल

खबर विस्तार : -

संयुक्त राष्ट्र: भारत ने एक बार फिर यूनाइटेड नेशंस से खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को तुरंत खत्म करने की अपील की है। भारत का कहना है कि बढ़ता तनाव न सिर्फ इस क्षेत्र की स्थिरता पर असर डाल रहा है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और वहां रहने वाले लाखों भारतीयों पर भी असर डाल रहा है। यूनाइटेड नेशंस में भारत के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव पी. हरीश ने गुरुवार को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में मिडिल ईस्ट के हालात पर तिमाही खुली बहस के दौरान कहा कि मौजूदा संघर्ष को तुरंत कम किया जाना चाहिए और बातचीत और डिप्लोमेसी के ज़रिए हल किया जाना चाहिए।

10 मिलियन भारतीयों की सुरक्षा ज़रूरी

उन्होंने कहा, "मिडिल ईस्ट की सुरक्षा, स्थिरता और शांति में भारत का अहम हिस्सा है। इस क्षेत्र के साथ हमारे मजबूत राजनीतिक, आर्थिक, निवेश, ऊर्जा और लोगों के बीच संबंध हैं। हरीश के अनुसार, अकेले छह गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों के साथ भारत का वार्षिक व्यापार करीब 180 बिलियन है। वहीं, इन देशों ने 31 बिलियन का फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) आकर्षित किया है, और भारत में वार्षिक रेमिटेंस 52 बिलियन से ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 10 मिलियन भारतीयों की सुरक्षा और भलाई भारत के लिए सबसे ज़रूरी है। यह दोनों पक्षों के बीच संबंधों का एक अहम हिस्सा है। समुद्री रास्तों और नाविकों की सुरक्षा भी भारत के लिए प्राथमिकता है। कमर्शियल जहाजों और नाविकों पर सभी हमले कानूनी और नैतिक रूप से गलत हैं।

सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पानी के रास्तों पर नेविगेशन की आज़ादी और समुद्री व्यापार का सुरक्षित और बिना रुकावट चलना पक्का होना चाहिए। हरीश ने इस हफ़्ते भारतीय झंडे वाले जहाज़ एमवी डीपी वर्ल्ड कावेरी पर हुए हमले का ज़िक्र किया, और हाल के हफ़्तों में एमटी पेट्रो डॉल्फ़िन, एमटी वाल्थेरा, एमटी ऑन पीस और एमटी  काज़िमा III जैसे दूसरे जहाजों पर हुए हमलों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि इन जहाजों पर कई भारतीय नाविक काम करते हैं। उन्होंने भारतीय नाविकों की सुरक्षा पक्का करने में मदद के लिए ओमान और यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) को भी धन्यवाद दिया। हरीश ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने नाविकों की सुरक्षा और इमरजेंसी में उनकी मदद के लिए एक सीफ़ेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क (एसईएसएन) बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव ब्रिक्स समिट में रखा गया था। उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क अलग-अलग देशों की समुद्री एजेंसियों और एम्बेसी को जोड़ सकता है। इससे इमरजेंसी मैसेजिंग, मेडिकल मदद, परिवारों से संपर्क और ज़रूरत पड़ने पर लोगों को निकालने में आसानी होगी।

शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा पर ग्रुप लॉन्च

उन्होंने बताया कि भारत और लाइबेरिया ने मिलकर हाल ही में यूएन जनरल असेंबली के दौरान "शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा पर दोस्तों का ग्रुप" लॉन्च किया। इस ग्रुप में 23 देश हैं और इसका मकसद समुद्री हमलों को रोकने और नाविकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कोशिशों में बेहतर तालमेल बिठाना है। होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे संकट की वजह से फ़िलिस्तीन की खराब हालत पर असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत दो-देशों वाले समाधान का समर्थन करता है, जिसमें इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों आज़ाद देशों के तौर पर शांति से साथ रह सकें। भारत फ़िलिस्तीनी लोगों की मदद के लिए कई प्रोजेक्ट लागू कर रहा है, जिसमें हॉस्पिटल बनाना, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाना और स्कॉलरशिप प्रोग्राम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने अब तक 52 मिलियन डॉलर का योगदान दिया है और फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाली यूएन एजेंसी यूएनआरडब्ल्यूए में सबसे बड़े योगदान देने वालों में से एक बन रहा है।

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