विश्व ग्रामीण महिला दिवस आजः दुनिया को पड़ी जरूरत इस थीम की

खबर सार :-

नई दिल्ली, यदि हम अपवाद को छोड़ दें तो हर तरक्की के पीछे महिला का हाथ होता है। इनमें ग्रामण महिलाओं की भी भागीदारी कम नहीं हैं। वह हर क्षेत्र में काम कर रही हैं।
विश्व ग्रामीण महिला दिवस आज, बाकी है कल्पनाओं में उड़ान

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके मौलिक अधिकारों के जरिए उन्हें मजबूत करने के लिए हर वर्ष 15 अक्टूबर को विश्व ग्रामीण महिला दिवस मनाया जाता है। गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाएगा। इस खास अवसर पर खास बातों पर चर्चा करते हैं।

शहरों में हवाई जहाज भी उड़ा रही हैं गांव की महिलाएं

जब बात हम ग्रामीण महिलाओं की कर रहे हैं तो उनके हर योगदान को भी इसमें शामिल कर लेते हैं। ग्रामीण महिलाएं वह हैं जो खत में काम करती हैंर्। इंट के भट्ठे में काम करती हैैं। घर बनवाने में मदद करती हैं। नहर की खुदाई में काम करती हैं। तालाब में काम करती हैं। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां पर ग्रामीण महिलाएं ग्रामीण स्तर पर काम नहीं करती हैं। इसके अलावा कुछ और काम वह गांव से बाहर निकल कर करती हैं। उनकी ख्वाहिश केवल सपनों जैसी नहीं रही। आज गांव की महिलाएं गांव से निकलकर बड़े शहरों में हवाई जहाज उड़ा रही हैं।

गांव की महिलाएं सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा कर रही हैं। गांव की महिलाएं जब ट्रेन की कमान संभालती हैं तो देश के चक्कर लगा देती हैं।  गांव की महिलाएं गांव से निकलकर बड़े-बड़े कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में शोध कर रही हैं। डॉक्टर हैं, वह मास्टर हैं। वकील हैं, वह जज हैं। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां पर गांव की महिलाएं काम नहीं कर रही हैं। महिलाओं की न केवल सरकार बनाने में बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी आगे बढ़ाने में योगदान रहा है।

महिलाओं के मौलिक अधिकारों को मजबूती से रख सकें

वर्तमान समय में भी महिलाएं अपने कल्चर को, अपने परिवेश को परंपराओं को बचाने के लिए भी प्रयत्न करती हैं। इन महिलाओं में अपने देश के प्रति श्रद्धा और भक्ति रहती है। इसी तरह अपने धार्मिक रीति रिवाज को भी वह पारंपरिक तरीके से निभाती हैं। यह अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण दिवस इसीलिए मनाया जा रहा है ताकि हम उनके हर पहलू पर विमर्श कर सकें। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की बात को सशक्त तरीके से उनके मौलिक अधिकारों के लिए मजबूती से रख सके।

15 अक्टूबर को विश्व ग्रामीण महिला दिवस मनाया जाता है। आज हम भारत में जिस तरह से इस देश में ग्रामीण विश्व महिला दिवस मना रहे हैं, वैसे ही पूरी दुनिया में इस दिन को खास माना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस मनाने का उद्देश्य शुरुआत में खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण गरीबी, और उनकी कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए समर्पित रहा।

हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते हैं की शुरुआत में महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार नहीं रहा। गांव की महिलाएं कई क्षेत्रों में पीछे रह जाती थी। स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज सेवा, देश सेवा, पर आज वह आगे बढ़ने की इच्छा रखते हुए अप्रत्याशित तरीके से आगे नहीं बढ़ पाती थी। उनकी महत्वाकांक्षा के दरवाजे बंद रहते थे, आज सरकार ने विभिन्न योजनाओं के बल पर आत्मनिर्भर करने के प्रयास कर रही है। ग्रामीण महिलाएं अपने गांव में भी रहकर कई सार्वजनिक कम कर रही हैं। 

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संगठन बनाकर रोजगार दे रही हैं ग्रामीण महिलाएं

समूह में रहते हुए अपने आय के स्रोत बना रही हैं। वह बहुत सी महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उनको भी रोजगार दे रही हैं। वैश्विक स्तर पर कृषि क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी काफी हो चुकी है। उनके उत्पाद दुनिया भर में पहुंच रहे हैं। पुरुषों के समक्ष उत्पाद उद्यमशील बन रही महिलाओं ने कई क्षेत्रों में इनपुट दिए हैं। बाजारों में कीमती वस्तुओं की खपत की है। इन महिलाओं के हाथों से बनी घरेलू वस्तुएं बड़े-बड़े मॉल में बिक रहे हैं।

पहला अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस 15 अक्टूबर 1995 को मनाया गया था। ग्रामीण महिलाओं के अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन का कहना है कि ग्रामीण महिलाओं का यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस हमें विश्व को व्यवस्थित करने के एक नए तरीके के प्रति प्रतिबद्ध होने का नया अवसर प्रदान करता है। अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस मनाने का उद्देश्य कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण गरीबी दूर करने में ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को सम्मान देना है।

विश्व ग्रामीण महिला दिवस के खास अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम और समारोह का आयोजन कर देश और समाज की उन्नति एवं प्रगति में उनके योगदान को स्मरण किया जाता है। विश्व ग्रामीण महिला दिवस मनाने का सुझाव 1995 में बीजिंग में मिला था। यह दिन इस बात पर जोर देता है कि कृषि श्रम और खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की अहम भूमिका है, लेकिन अभी भी उन्हें भूमि, तकनीक और वित्तीय संसाधनों में सहयोग की जरूरत है। 

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