दिल्ली :दिल्ली हाई कोर्ट ने फीफा विश्व कप 2026 के प्रसारण से जुड़े विवाद पर केंद्र सरकार और प्रसार भारती को नोटिस भेजकर जवाब माँगा है। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने वकील अवधेश बैरवा की याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख अगले हफ्ते के लिए तय कर दी है। इस याचिका में मांग की गई है कि अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में होने वाले इस बड़े टूर्नामेंट के सभी 104 मैचों को फ्री-टू-एयर यानी मुफ्त वाले चैनलों पर दिखाया जाए, ताकि देश के करोड़ों फुटबॉल प्रेमी इन्हें देख सकें। चिंता की बात यह है कि 2022 के वर्ल्ड कप को भारत में करीब 74 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा था, लेकिन इस बार अब तक किसी भी बड़े चैनल ने इसे दिखाने के अधिकार नहीं लिए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह प्रसार भारती के जरिए इन मैचों के प्रसारण का इंतजाम करे, खासकर ओपनिंग, क्वार्टरफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मुकाबले। टूर्नामेंट 11 जून से शुरू होने वाला है, इसलिए समय की कमी को देखते हुए अब सबकी नजरें कोर्ट के अगले कदम पर हैं।
भारत में भले ही क्रिकेट सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो, लेकिन फुटबॉल चाहने वालों की संख्या भी बहुत बड़ी है। साल 2022 में कतर में हुए विश्व कप के आंकड़े बताते हैं कि इसे भारत में करीब 74.57 करोड़ लोगों ने देखा था, जो दुनिया में एक बड़ा रिकॉर्ड है। उस समय स्टार स्पोर्ट्स और अन्य चैनलों पर इसे खूब पसंद किया गया। अब 2026 का विश्व कप अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में होने जा रहा है, जिसमें पहली बार 48 टीमें हिस्सा लेंगी और कुल 104 मैच खेले जाएंगे। फीफा ने यह बदलाव इसलिए किया है ताकि खेल का रोमांच और बढ़ सके।
दिक्कत यह है कि भारत में अभी तक किसी भी प्राइवेट कंपनी या चैनल ने इसके प्रसारण के अधिकार नहीं खरीदे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इन अधिकारों की बहुत ज्यादा कीमत होना है, जिसे खरीदना चैनलों के लिए घाटे का सौदा लग रहा है। वकील अवधेश बैरवा ने कोर्ट में कहा है कि अगर मैचों का प्रसारण नहीं हुआ, तो करोड़ों लोग मनोरंजन और जानकारी से दूर रह जाएंगे। यह सिर्फ एक खेल का मामला नहीं है, बल्कि भारत के गली-मोहल्लों में फुटबॉल के प्रति बढ़ते लगाव और लोगों की भावनाओं से जुड़ा सवाल है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इस दिशा में कोई कदम उठाएगी या नहीं।
इस याचिका में साफ़ तौर पर यह मांग की गई है कि कोर्ट सरकार को आदेश दे ताकि प्रसार भारती को सभी 104 मैचों के प्रसारण का अधिकार मिल सके। मुख्य रूप से टूर्नामेंट की शुरुआत का पहला मैच, क्वार्टरफाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों को फ्री-टू-एयर यानी मुफ्त में टीवी पर दिखाने की बात कही गई है। प्रसार भारती, जो दूरदर्शन को चलाता है, पहले भी ओलंपिक और कॉमनवेल्थ जैसे बड़े खेलों को घर-घर पहुँचा चुका है। सरकारी संस्था होने के नाते इसका काम ही यही है कि जानकारी और मनोरंजन हर नागरिक तक पहुंचे।
याचिका में यह भी कहा गया है कि प्राइवेट चैनलों और ओटीटी प्लेटफॉर्म की महंगी फीस हर कोई नहीं दे सकता, जिससे गरीब और गाँव में रहने वाले दर्शक फुटबॉल देखने से वंचित रह जाते हैं। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सूचना मंत्रालय और प्रसार भारती को नोटिस भेजकर उनका पक्ष पूछा है। अब अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी। चूंकि टूर्नामेंट 11 जून से शुरू होने वाला है और समय बहुत कम बचा है, इसलिए जल्द फैसला आना बेहद जरूरी है। जस्टिस कौरव की बेंच का इस मामले को संज्ञान में लेना फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर है।
दुनिया भर में फीफा विश्व कप दिखाने के अधिकार बहुत महंगे होते हैं और इनकी कीमत करोड़ों डॉलर में होती है। साल 2022 में भारत में स्टार नेटवर्क ने ये अधिकार खरीदे थे, जिससे दर्शकों की संख्या ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। लेकिन 2026 के वर्ल्ड कप के लिए अभी तक कोई भी कंपनी रुचि नहीं दिखा रही है। जानकारों का कहना है कि इस बार 48 टीमें होने की वजह से मैचों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे इसे दिखाने का खर्च बहुत बढ़ गया है। साथ ही, अब जियो सिनेमा और अमेजन प्राइम जैसे प्लेटफॉर्म्स का दौर है, जहाँ मैच देखने के लिए पैसे देने पड़ते हैं।
ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या फुटबॉल सिर्फ अमीर लोगों का खेल बनकर रह जाएगा? याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र किया गया है, जिनमें क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल को मुफ्त चैनलों पर दिखाने का आदेश दिया गया था। मांग की जा रही है कि उसी तरह फीफा के बड़े मैच भी सबको मुफ्त में देखने को मिलने चाहिए। अगर प्रसार भारती इसके अधिकार लेती है, तो दूरदर्शन (डीडी फ्री डिश) के जरिए यह देश के करोड़ों घरों तक पहुँच सकता है। हालांकि, इतने महंगे अधिकारों के लिए बजट कहाँ से आएगा, यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती और दबाव की बात है।
भारत में फुटबॉल का सफर कोलकाता के मैदानों से शुरू हुआ, जहाँ मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसे क्लबों ने इस खेल को घर-घर पहुँचाया। टीवी पर विश्व कप का असली रोमांच 1990 के दशक में शुरू हुआ, जबकि 2010 के साउथ अफ्रीका वर्ल्ड कप ने युवाओं में इसका जबरदस्त क्रेज पैदा कर दिया। साल 2022 के अर्जेंटीना और फ्रांस के रोमांचक फाइनल को देखने के लिए तो लोग रात-रात भर जागे थे। अब सबको 2026 के टूर्नामेंट का इंतजार है। भले ही भारत की टीम ने कभी विश्व कप नहीं खेला, लेकिन यहाँ इसे देखने वालों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा रहती है। खुद फीफा भी जानता है कि भारत उसके लिए कितना बड़ा बाजार है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि इसे दिखाया कहाँ जाएगा।
इस मामले में कोर्ट में दी गई याचिका बिल्कुल सही समय पर आई है। टूर्नामेंट जून में शुरू होना है और प्रसारण के अधिकार तय करने का यह आखिरी मौका है। अगर कोर्ट आदेश देता है, तो प्रसार भारती फीफा से बातचीत शुरू कर सकती है या खेल मंत्रालय इस मामले में बीच-बचाव कर सकता है। मुंबई की गलियों में खेलने वाले लड़कों से लेकर केरल के गोलकीपरो तक, देश के करोड़ों प्रशंसक बस इसी इंतजार में हैं कि उन्हें अपने पसंदीदा खेल को देखने का मौका मिले।
यह याचिका केवल 2026 के विश्व कप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे बड़े आयोजनों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगी। अगर सरकार सरकारी चैनलों के जरिए खेलों के प्रसारण को बढ़ावा देती है, तो इससे अमीर और गरीब के बीच का अंतर कम होगा और खेल हर किसी की पहुँच में होंगे। साथ ही, यह निजी कंपनियों के लिए भी एक सबक होगा कि वे केवल मुनाफे के चक्कर में आम जनता के हितों को नजरअंदाज न करें।
इस मामले में कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक साबित हो सकता है। फिलहाल, फुटबॉल के दीवाने उम्मीद लगाए बैठे हैं कि क्या अगले हफ्ते होने वाली सुनवाई में उन्हें कोई खुशखबरी मिलेगी। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि क्या देश के करोड़ों प्रशंसक टीवी पर मुफ्त में वर्ल्ड कप देख पाएंगे या नहीं।
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