नई दिल्ली : मैदान पर पसीना बहाकर जीत हासिल करने वाले खिलाड़ियों के हक पर डाका डालने वाले 'डोपिंग सिंडिकेट' पर भारत सरकार अब सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी में है। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने साफ कर दिया है कि प्रतिबंधित दवाओं के काले कारोबार और तस्करी में शामिल लोगों को अब जेल की सलाखों के पीछे जाना होगा। सरकार इसके लिए जल्द ही कड़े आपराधिक प्रावधान लागू करने जा रही है। राजधानी में आयोजित विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के 'ग्लोबल एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशन नेटवर्क' (GAIN) सम्मेलन में डॉ. मांडविया ने ये हुंकार भरी। उन्होंने दो टूक कहा कि डोपिंग अब केवल किसी एक खिलाड़ी की निजी भूल नहीं रह गई है, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का संगठित अपराध बन चुका है। इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए अब कानून का डंडा चलना जरूरी है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम 2022 ने एक मजबूत जमीन तैयार की है और 2025 के नए संशोधनों ने इसे वैश्विक मानकों के बराबर ला खड़ा किया है। लेकिन असली प्रहार उन लोगों पर होगा जो पर्दे के पीछे रहकर प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई चेन चलाते हैं। सरकार का लक्ष्य इन दवाओं की तस्करी करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करना है, ताकि खेलों की शुचिता बनी रहे।
यही कारण है कि खेल मंत्री डॉ. मांडविया ने भारतीय खेलों की बदलती तस्वीर को कुछ उत्साहजनक आंकड़ों के साथ पेश किया। उन्होंने बताया कि साल 2019 में जहां देश में करीब 4,000 डोप टेस्ट किए जाते थे, वहीं पिछले साल यह आंकड़ा दोगुना होकर 8,000 के पार पहुंच गया है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि परीक्षणों की संख्या बढ़ने के बाद भी डोपिंग के मामलों में भारी कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, पहले पॉजिटिव पाए जाने वाले मामलों की दर 5.6 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 2 प्रतिशत से भी नीचे सिमट गई है। यह गिरावट साफ तौर पर इशारा करती है कि 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' जैसे अभियानों ने जमीनी स्तर पर काम किया है और अब खिलाड़ी अपने करियर व सेहत को लेकर पहले से कहीं अधिक सतर्क और जागरूक हुए हैं।
खिलाड़ियों को अनजाने में गलती करने से बचाने के लिए सरकार ने “नो योर मेडिसिन” (Know Your Medicine) ऐप लॉन्च किया है। इसके जरिए कोई भी एथलीट किसी दवा को लेने से पहले तुरंत चेक कर सकता है कि वह प्रतिबंधित श्रेणी में है या नहीं। इसके साथ ही दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी विशेष शिक्षा मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। वाडा (WADA) के अध्यक्ष वितोल्ड बांका ने भी भारत के इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इंटरपोल और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर ही इस वैश्विक समस्या की जड़ काटी जा सकती है। वहीं नाडा (NADA) के महानिदेशक ने जोर दिया कि अब केवल जांच ही काफी नहीं, बल्कि खुफिया जानकारी जुटाना और खिलाड़ियों को शिक्षित करना ही हमारी मुख्य रणनीति है।
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