देश के आत्मनिर्भरता के दूसरे चरण में अत्याधुनिक तकनीक पर होगा सरकार का फोकस: राजनाथ सिंह
खबर सार :-
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आत्मनिर्भता के दूसरे चरण में भारत को अत्याधुनिक तकनीक पर फोकस करना चाहिए। भारत के पास दुनिया की किसी भी अत्याधुनिक तकनीक को विकसित करने के लिए ज़रूरी क्षमता है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 1,900 करोड़ से ज़्यादा के नौसैनिक अनुबंध इस बात का सबूत हैं कि भारत की आत्मनिर्भरता की कोशिशों के अब ठोस नतीजे मिल रहे हैं। आत्मनिर्भरता की दिशा में नौसेना की लगातार तरक्की इस बात को पुख्ता करती है। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की किसी भी अत्याधुनिक तकनीक को विकसित करने के लिए ज़रूरी क्षमता है। राजनाथ सिंह नेवी चीफ एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की मौजूदगी में नई दिल्ली में "स्वावलंबन 2026" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
नामुमकिन क्षेत्रों में करना चाहिए आगे बढ़ने का प्रयास
उन्होंने कहा कि भारत को अब अत्याधुनिक तकनीक पर फोकस करना चाहिए और उन क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहिए जिन्हें पहले नामुमकिन माना जाता था। यह आत्मनिर्भरता का दूसरा फेज़ है। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले फेज़ में अच्छा प्रदर्शन किया है और अब दूसरे फेज़ में जाने के लिए तैयार है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ सालों में काफी तरक्की की है। नेवी को नेवी द्वारा शुरू किए गए 229 "आईडेक्स" चुनौतियों के लिए नवाचार करने वाले नए उद्यमों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से 4,000 से ज़्यादा प्रस्ताव मिले हैं। यह भारतीय क्षमता और नवाचार के जोश को दिखाता है। उन्होंने कहा कि नवाचार के लिए यह ज़रूरी है कि वे अपने उत्पाद को असली ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से तैयार करें। राजनाथ सिंह ने कहा कि डिफेंस सेक्टर में किसी भी बड़ी चुनौती का हल ढूंढने के लिए आगे की सोच और वैज्ञानिक अनुशासन की ज़रूरत होती है।
आत्मनिर्भरता के दूसरे फेज़ में अहम भूमिका निभाएंगे युवा
उन्हें भरोसा है कि देश के नवाचार करने वाले युवा आत्मनिर्भरता के दूसरे फेज़ में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के इस फेज़ में, सिर्फ़ देश में उत्पादन करना काफ़ी नहीं है। उत्पादन कम लागत वाला, परिचालन के लिहाज से बेहतर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने लायक होना चाहिए। इसे पाने के लिए, उत्पाद की गुणवत्ता, कार्यक्षमता और किफायती के साथ-साथ उत्पादन की संख्या पर भी ध्यान देना होगा। रक्षा मंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों में रिसर्च को बढ़ावा देने और उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को मज़बूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने ज़ोर दिया कि युवाओं को रिसर्च में करियर बनाने के लिए बढ़ावा देना चाहिए। इससे देश के अंदर रिसर्च और विकास का एक मज़बूत कल्चर बनेगा, जिससे भारत अपनी ज़रूरतों के हिसाब से नई तकनीकी विकसित कर पाएगा। उन्होंने कहा कि आईडेक्स के ज़रिए, कई ऐसी तकनीकी विकसित की गई हैं जिनके लिए भारत को पहले विदेशी देशों पर निर्भर रहना पड़ता था।
टैलेंटेड युवाओं के सपने को पूरा करने में नहीं होगी फंड की कमी
देश में नए उद्यमों ने नौसैनिक प्रणालियों, संवेदक तकनीक, संचार प्रणालियों और कई दूसरे ज़रूरी एरिया में समाधान विकसित किए हैं। इनमें से कई तकनीकी का विकास इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि इनोवेटर्स को अपने सुझाव को असल उत्पाद में बदलने के लिए एक प्लेटफॉर्म, चैलेंज और मौका दिया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले क्षमतावान युवा बड़े सपने देखते थे, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए सही मौके नहीं मिलते थे। अक्सर फंड की कमी के कारण उनके सपने अधूरे रह जाते थे। अब, सरकार ने यह पक्का करने की कोशिश की है कि क्षमतावान युवाओं के सपनों को पूरा करने में फंड की कमी रुकावट न बने। आत्मनिर्भरता के दूसरे फेज़ पर चर्चा करते हुए, रक्षा मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि नागरिक और सेना शिपिंग सेक्टर दोनों में ज़रूरी तकनीकी और उत्पाद के विकास के लिए एक प्राथमिकता लिस्ट पर विचार किया जाना चाहिए।
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