Garuda Shakti 2026: भारत और इंडोनेशिया के विशेष बल जंगलों में करेंगे संयुक्त सैन्य अभ्यास

खबर सार :-

भारत और इंडोनेशिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास गरुड़ शक्ति 2026 का 12वां संस्करण आयोजित होगा। भारतीय विशेष बलों का दल बान्युवांगी रवाना हो गया है। अभ्यास में जंगलों में आतंकवाद विरोधी अभियानों और संयुक्त सैन्य रणनीतियों पर जोर रहेगा।
भारत-इंडोनेशिया संयुक्त सैन्य अभ्यास गरुड़ शक्ति 2026, विशेष बलों की बढ़ेगी क्षमता

खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में संयुक्त सैन्य अभ्यास 'गरुड़ शक्ति 2026' का 12वां संस्करण आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए भारतीय सेना के विशेष बलों का एक दल इंडोनेशिया के बान्युवांगी के लिए रवाना हो गया है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के विशेष बल जंगलों में आतंकवाद विरोधी अभियानों, उग्रवाद से निपटने की रणनीतियों और संयुक्त सैन्य कार्रवाई की क्षमताओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारतीय और इंडोनेशियाई सैनिकों के बीच आपसी तालमेल, परिचालन समन्वय और संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके तहत दोनों देशों के सैनिक विशेष सैन्य अभियानों से जुड़ी रणनीतियों, तकनीकों और कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करेंगे।

जंगलों में आतंकवाद विरोधी अभियानों पर रहेगा विशेष जोर

गरुड़ शक्ति 2026 में जंगलों के चुनौतीपूर्ण वातावरण में आतंकवाद विरोधी और उग्रवाद विरोधी परिस्थितियों से निपटने के प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। जंगलों में सैन्य अभियान चलाना विशेष बलों के लिए कठिन चुनौती माना जाता है, क्योंकि घनी वनस्पति, दुर्गम रास्ते और सीमित दृश्यता के कारण सैनिकों की आवाजाही, निगरानी और आपसी संपर्क प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे वातावरण में प्रशिक्षण से सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में काम करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने और अभियान के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित करने का अवसर मिलता है। संयुक्त अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के परिचालन अनुभवों को समझेंगे और विशेष अभियानों में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं से परिचित होंगे। इससे संयुक्त मिशनों के दौरान आपसी समझ और कार्यक्षमता बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विशेष बलों के बीच आपसी तालमेल होगा मजबूत

भारत और इंडोनेशिया के बीच गरुड़ शक्ति अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के पेशेवर सहयोग को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। इस तरह के संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण से सैनिकों को अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने की पद्धतियों को समझने और एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल विकसित करने का अवसर मिलता है। अभ्यास के 12वें संस्करण में विशेष बलों की संयुक्त परिचालन क्षमता और पेशेवर सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। दोनों देशों के सैनिकों के बीच अनुभव साझा करने से कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने और संयुक्त अभियान संचालित करने की तैयारी को मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा, यह अभ्यास भारत और इंडोनेशिया के बीच सैन्य संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का मिलकर सामना करने की तैयारी को आगे बढ़ाने में भी सहायक होगा।

भारत-इंडोनेशिया रक्षा सहयोग को मिल रही नई दिशा

गरुड़ शक्ति 2026 ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और इंडोनेशिया के बीच सैन्य सहयोग को व्यापक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता आयोजित हुई थी। इस वार्ता का उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करना और भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना था। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने तथा द्विपक्षीय सैन्य प्रशिक्षण और सहयोग के दायरे को विस्तृत करने से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। भारत में आयोजित इस वार्ता में भारतीय सेना के प्रतिनिधिमंडल ने इंडोनेशियाई सेना टीएनआई-एडी के प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्न रक्षा और सैन्य विषयों पर चर्चा की। इंडोनेशियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रिगेडियर जनरल आरी प्रसत्य ने किया, जो वीएसीओएस इंटेलिजेंस के पद पर हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी का महत्व

भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा संबंधों का महत्व केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और सुरक्षा, स्थिरता तथा क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर आपसी संवाद बनाए रखते हैं। गरुड़ शक्ति जैसे संयुक्त अभ्यास दोनों सेनाओं को पेशेवर अनुभव साझा करने और कठिन परिस्थितियों में एक साथ काम करने की क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। वहीं, नियमित सैन्य वार्ता दोनों देशों को रक्षा सहयोग की प्राथमिकताओं पर चर्चा करने और भविष्य की संयुक्त गतिविधियों की दिशा तय करने में मदद करती है।

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