हर बारिश में होता है जलभराव पर हल्ला, Prayagraj की जलनिकासी है बदनाम

खबर सार :-

प्रयागराज विश्व विख्यात है। लेकिन जल निकासी व्यवस्था खराब है। इसको सुधारने के लिए काम चल रहा है। दिसंबर तक ड्रोन सर्वे पूरा कर लिया जाएगा। पूरी व्यवस्था सही करने में करोड़ों रूपये खर्च किए जाएंगे।
Prayagraj में खर्च किए जाएंगे 1,500 करोड़, बदल जाएगा drainage-system

खबर विस्तार : -

प्रयागराज, प्रयागरात शहर में जलभराव की लगातार समस्या बनी रहती है। इसको दूर करने के लिए, 1,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। शहर की drainage-system को पूरी तरह से दुरुस्त करने के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है। दिसंबर तक पूरा होने वाले ड्रोन सर्वे के आधार पर एक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसके बाद नए पंपिंग स्टेशन बनाकर अगली तैयारी की जाएगी।

हाईकोर्ट ने किया था सख्त निर्देश 

शहर में बारिश होने पर प्रयागराज के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। समस्या एक दो दिन की नहीं है। यह हमेशा की बारिश में सड़कों पर पानी जमा हो जाता है। घरों के अंदर तक पानी पहुंच जाता है। हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद, शहर की drainage-system को पूरी तरह से बदलने की तैयारी चल रही है। यहां धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान हैं। इसलिए भी लोगों का आना जाना बड़ी संख्या में रहता है। 

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पता लगाने के लिए हो रहा ड्रोन सर्वे

पहला काम तो जलभराव वाले इलाकों की पहचान करना है। नालियों की स्थिति का आकलन और पानी की निकासी में रुकावट डालने वाले कारणों का पता लगाने में समय लग सकता है। बहरहाल इन बाधाओं का पता लगाने के लिए ड्रोन सर्वे किया जा रहा है। हर साल कई इलाकों में होने वाली जलभराव की समस्या को अब दूर कर लिया जाएगां। इसमें भले ही थोड़ा समय लगे। निवेश के जरिए आर्थिक समाधान हो चुका है। हल करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की योजना बनाई गई है। 

निगम ने रणनीति के तहत शुरू किया प्रयास

शहर की भौगोलिक परिस्थितियों के आंकलन पर ही  जलभराव के मूल कारणों की जानकारी हो पाएगी। मौजूदा नालियों के नेटवर्क का मूल्यांकन किए बिना कार्य योजना तैयार कर पाना कठिन है। इस काम के लिए कम से कम 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जब सर्वे को दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा, उसके बाद लक्ष्य के आधार पर काम होगा। इसका समय दिसंबर निर्धारित है। इसके बाद, शहर के ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर रणनीति बनाई जाएगी। व्यवस्थित और सुचारू काम के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। नगर निगम ने यह प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेजश् सौंप दिया है। 

इलाकों में कारणों का पता लगा रही है टीम

जब कभी गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है, ऐसी स्थिति में शहर के कई हिस्सों में जल निकासी रूक जाती है। यह पानी वापस लौटने लगता है। लोगों के घरों में गंदा पानी घुसने लगता है। इससे निपटने के लिए, नालों को पक्का (कंक्रीट का) बनाने और जहाँ ज़रूरी हो, वहाँ पंपिंग स्टेशन बनाया जाएगा। शहर के ड्रेनेज सिस्टम की तकनीकी दक्षता पर हमेश से प्रश्न लगते रहे हैं।

इसको बेहतर बनाने के लिए मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से संपर्क बनाया गया है। इस काम की सफलता के लिए विशेषज्ञों से भी सलाह ली जा रही है। नगर आयुक्त साईं तेजा ने बताया कि शहर की ड्रेनेज समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए बराबर प्रयास किए जा रहे हैं। यह एक दिन में नहीं होगा, लेकिन एक साल भी नहीं लगाया जाएगा। ड्रोन सर्वे से उन इलाकों की पहचान कर रहा है, जहां जलभराव से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं। 

मास्टर प्लान के आधार पर किया जाएगा काम

बारिश का पानी तेज़ी से निकालने के लिए पंपिंग स्टेशनों के लिए सही जगह और उनकी क्षमता का निर्धारण सर्वे और मास्टर प्लान के आधार पर किया जाएगा। नगर आयुक्त साईं तेजा, प्रयागराज का कहना है कि जॉर्जटाउन, टैगोर टाउन और अल्लापुर के बड़े इलाके में बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या होती है। इसीलिए मेडिकल कॉलेज चौराहे के पास पंपिंग स्टेशन बनाने की योजना है। इस प्रोजेक्ट पर 28 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके अलावा, चचर और घाघर नालों पर भी पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।

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