हिंदुओं को आर्थिक चोट देने की कोशिश, पर्व और त्योहार के समय किए जा रहे प्रदर्शन: स्वामी जितेंद्रानंद

खबर सार :-

कांग्रेस पार्टी का एजेंडा समझ में आ गया है। उनका मंसूबा हिंदुओं को आर्थिक रूप से कमजोर करने का है। इसीलिए यह बारबार त्योहार या फिर पर्व के दौरान ही प्रदर्शन कर रहे हैं।
Congress की रैली चौपट करेगी हिंदुओं का व्यापार: संत समाज ने जताई चिंता

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने 1 नवंबर को कांग्रेस पार्टी की प्रस्तावित रैली के इरादे पर सवाल उठाया है। पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि यह विरोध प्रदर्शन हिंदू त्योहारों की तैयारियों और व्यापारिक कामकाज को बाधित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि आर्थिक नुकसान पहुंचाने के इरादे से कांग्रेस पार्टी ने 1 नवंबर को रैली का प्लान बनाया है।

हिंदुओं के कामकाज पर संत समाज ने जताई चिंता

रैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान इस तरह का आंदोलन आयोजित करके हिंदुओं के व्यापारिक कामकाज को षड़यंत्र के तहत बाधित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दीवाली है। ऐसे में इन त्योहारों से ठीक पहले रैली का आयोजन किया जा रहा है। इससे हर हिंदू का कामकाज प्रभावित होगा। वह भले ही किसी भी छोटे या बड़े काम में लगा हो। गुरुवार को संस्कृति संसद के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्वामी जितेंद्रानंद व्यापारियों के कामकाज को लेकर चिंता जताई है। 

बाजारों में भीड़ नहीं होगी तो कौन खरीदेगा

उन्होंने कहा कि पिछले साल त्योहारों के समय देश में लगभग 6.05 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी हुई थी। इनको हवाहवाई नहीं माना जाए। उन्होंने दावा किया कि कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के अनुमानों का यह आधार है। कहा कि इस साल हिंदू त्योहारों के दौरान व्यापारिक कारोबार 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। लेकिन यदि धरना-प्रदर्शन किए गए तो बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से भीड़ गायब हो जाएगी। सवारियां नहीं मिलेंगी। यात्री घर से निकलेंगे ही नहीं। ऐसे में कारोबार प्रभावित हो जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि ईद, बकरीद या क्रिसमस जैसे त्योहारों के दौरान इस तरह के आंदोलन क्यों नहीं किए जाते हैं।

सही समय पर दिया जाएगा विपक्ष को जवाब

 विशेष रूप से हिंदू त्योहारों के दौरान ही विपक्ष या कांग्रेस प्रदर्शन क्यों आयोजित करती है। हिंदू उत्सवों को निशाना बनाने का कुचक्र रचा जा रहा है। इससे पहले 10 अक्टूबर को एक आंदोलन के दौरान भी इसी तरह की चिंताएं जताई गई थीं। पितृ विसर्जन और रामलीलाओं का शुभारंभ होना था। तब यही कर्म का प्रदर्शन किया गया। लोग इन रामलीला और मेलों में बड़ी संख्या में स्टॉल लगाते है। जहां वे पूरी-कचौड़ी जैसी खाने-पीने की चीजें बेचते हैं।

विरोध-प्रदर्शन लोगों की आजीविका पर बुरा असर डाल सकते थे। स्वामी जितेंद्रानंद ने केंद्र सरकार खासकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ करते हुए कहा कि पिछले विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हालात को बहुत अच्छे से संभाला गया। नतीजा यह रहा कि दिल्ली में दशहरा और अन्य त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग विरोध-प्रदर्शनों के जरिए हिंदू त्योहारों और उनसे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों में बाधा डालने की एक सोची-समझी कोशिश की जा रही है। देश की जनता इन घटनाओं पर पैनी नजर रख रही है और सही समय आने पर इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।

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