LUCKNOW :बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी के लिए लगाए गए पंप, हालात हो रहे सामान्य

खबर सार :-

नगर निगम की टीमें प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई कार्य पर विशेष ध्यान दे रही हैं। यदि इसमें तनिक चूक हो गई तो बीमारी पसर जाएगी। टीमें आवश्यक कार्यों में जुटी हैं। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि छिड़काव और सफाई की गतिविधियां प्रभावित क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार जारी रखी जाएं।
LUCKNOW: पानी निकासी के बाद होगी सड़क मरम्मत, ड्रोन से छिड़की जाएगी दवा

खबर विस्तार : -

लखनऊ नगर निगम के जोन तीन में डीजल और इलेक्ट्रिक पंप लगाए गए हैं। इसी तरह जोन छह में भी डीजल पंप से पानी निकाला जा रहा है। निगम की ओर से बताया गया है कि 65 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एंटी लार्वा छिड़काव किया जा रहा हैं। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का  निरीक्षण का पूरा पानी निकालने के लिए कहा है। साथ ही यहां खराब हुई सड़क को भी मरम्मत करने के निर्देश दिए हैं। 

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आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में झोंकी ताकत

नगर आयुक्त गौरव कुमार शुक्रवार को जोन अंतर्गत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे थे। इस समय वहां जल निकासी, पेयजल आपूर्ति, सफाई और सड़क मरम्मत सहित विभिन्न व्यवस्थाओं को चलाया जा रहा है। यहां पूरी तरह से हालात सामान नहीं हुए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों से पानी की निकासी तेजी से करें। ज्यादा दिन पानी भरा रहना भी ठीक नहीं हैं। उन्होंनं कहा कि सुनिश्चित कर लें कि नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की कमी न रहे। इस काम के लिए जोन-3 में 42 पंप लगाए गए हैं।

इनसे पानी निकाला जा रहा है। यह क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है। इस क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए अभियंत्रण विभाग द्वारा 34 डीजल पंप और 8 इलेक्ट्रिक पंप लगाए गए हैं।  जहां ज्यादा परेशानी रही है, वहां आज भी अधिकारी दौरा करते नजर आए। इन पंपों के माध्यम से फैजुल्लागंज क्षेत्र का पानी नालों के जरिए बाहर निकाला जा रहा है ताकि प्रभावित इलाकों में जलभराव कम किया जा सके। जब तक पानी नहीं हटेगा, कोई काम आगे नहीं होगा और न ही आवागमन सामान्य करने में मदद मिल सकेगी।

प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी के लिए डीजल पंप लगाए 

वहीं, जोन-6 में भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी के लिए 12 डीजल पंप लगाए गए हैं। इनके माध्यम से विभिन्न प्रभावित इलाकों से पानी निकालने का कार्य किया जा रहा है। नगर आयुक्त पत्रकारों को जवाब देते थक चुके हैं। उन्होंने जल निकासी की व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए कहा है। आवश्यकता के अनुसार यहा पर संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में सेप्टिक टैंकों की सफाई और पेयजल आपूर्ति पर भी जोर दिया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सेप्टिक टैंकों के चोक होने की समस्या काफी दिनों से सुनी जा रही है।

इसको देखते हुए सेक्शन मशीनों के माध्यम से उनकी सफाई कराई जा रही है। यदि यह सफाई नहीं करा दी जाती है तो दिक्कत बढ़ सकती है। इससे गंदगी और दूषित पानी के फैलाव को रोकने में मदद मिलेगी। वैसे भी मोहल्ले काफी दिनों से गंदा पानी देख रहे हैं। इन बारिश से प्रभावित परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पानी के टैंकर लगाए गए हैं। यह सेवा करीब 15 दिन से चल रही हैै। नगर निगम की व्यवस्था में काफी पैसा खर्च हो चुका है।

भूजल दूषित होने की आशंका, सबमर्सिबल का इस्तेमाल न करें

निगम ने नागरिकों से अपील की है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भूजल के दूषित होने की आशंका को देखते हुए फिलहाल समर्सिबल पंप का इस्तेमाल न करें। इन क्षेत्रों में पानी का उपयोग करने से पहले उसमें क्लोरीन डालकर उसे सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया अपनाएं। पेयजल की गुणवत्ता और स्वच्छता में समझौता करना नुकदान को दावत देना है। एक समस्या से निपट पाना कितना मुश्किल हो रहा है। 65 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव इसीलिए कराया जा रहा है,ताकि किसी प्रकार की मच्छर जनित बीमारी न फैल सके।

 बाढ़ के बाद मच्छरों के प्रजनन और संक्रमण से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए यह बहुत प्रभावी काम होता है। इसके लिए निगम प्रयास भी कर रहा है। बाढ़ और जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत लगभग 65 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से एंटी लार्वा छिड़काव कराया जा रहा है। निगम की ओर से कई लोगों को इसकी जिम्मेदारी दी हैं। इसका उद्देश्य मच्छरों के लार्वा को नष्ट करना और प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों के खतरे को कम करना है।

 जब पानी हट रहा है तो लोग भी परेशान हैं। कितनी जल्दी सड़क पर काम हों। सड़कों की मरम्मत और आवागमन बहाल करने के प्रयास कराया जा रहा है। बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत का कार्य भी कराया जा रहा है। कई जगह पर इसकी शुरूआत हो चुकी है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए चलने योग्य रास्ते तैयार किए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय नागरिकों को आवागमन में परेशानी न हो।

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