Prayagraj के बमरौली के ऐतिहासिक डाकघर में सजी डाक टिकट प्रदर्शनी, बच्चों को हुई विरासत की पहचान

खबर सार :-

बच्चों के बीच बड़ों कोे भी डाकघर और डाक टिकट की चर्चा व चित्र बेहद पसंद आए। यह आइने के पीछे भी ले गए। जहां एक युग था। पोस्टमैन को निहारने का टाइम भी था।
Prayagraj : तब की जरूरत postcards, अब की जरूरत digital बनी

खबर विस्तार : -

प्रयागराज, बमरौली स्थित ऐतिहासिक पुराने डाकघर में शुक्रवार को डाक टिकट प्रदर्शनी में बच्चों को अपनी विरासत की पहचान हुई। यह आयोजन उनके लिए बड़ा ज्ञानवर्धक रहा। इसमें लगभग सभी स्कूली बच्चे ही थे। इनको भारत के बारे में जानकारी तो काफी है। सभी बच्चे एक जैसे नहीं होने के कारण इस आयोजन से समृद्ध डाक विरासत को जानने का अवसर सभी को मिल गया।

पुराने डाक टिकटों और पारंपरिक संचार माध्यमों से परिजय नहीं था। भारत में डाक व्यवस्था की बात करना विवादों में खिंचना हैै। घर-घर पत्र पहुंचाने वाला विभाग अब अपनी परिपाटी बचा ले वही अच्छा है। इसीलिए यह आयोजन बच्चों के लिए खास रहा। इन्होंने पुराने postcards पर अपनी चित्रकारी की और अंतर्देशीय पत्र लिखकर अपने परिजनों के प्रति भावनाएं व्यक्त कीं। कभी इनके पिता जी रिश्तेदारों को पत्र भेजा करते थे। डाक विभाग ने इन पत्रों को बच्चों के परिजनों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। पहले यह रोज का काम था। आज जो पत्र लिखे गए हैं, उनको पहुंचना बच्चों के लिए चौकाने वाली बात होगी। इससे बच्चों के परिवारों के लिए भी यह एक यादगार अनुभव बनेगा।

अवसरों का आनंद पाकर खुश हुए बच्चे

एयर फोर्स फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन (रीजनल), मुख्यालय मध्य वायु कमान, डाक विभाग और फिलैटेलिक सोसाइटी के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्देश्य ऐतिहासिक डाक विरासत को सहेजना हैै। आज की नई पीढ़ी को उसके महत्व से अवगत कराना था। आने वाले सालों में यदि सरकार ने घ्यान नहीं दिया तो प्रदर्शनी से भी यह गायब हो जाएंगी। ऐतिहासिक भवन की पृष्ठभूमि में आयोजित प्रदर्शनी ने बच्चों को अतीत की संचार परंपराओं को करीब से जानने का अवसर दिया। यह आयोजन है महत्वपूर्ण। प्रदर्शनी में बमरौली हवाई अड्डे के ऐतिहासिक महत्व और प्रारंभिक हवाई डाक सेवा से उसके जुड़ाव को विशेष रूप से दर्शाया गया।

कई ऐसे चित्र भी अब नहीं दिखते हैं, जो टिकटों में बने होते थे। हालांकि वायु सेना स्टेशन बमरौली और हवाई डाक सेवा से संबंधित अलग खंड प्रदर्शनी के चित्रों में दिखाए हैं। इसलिए प्रदर्शित के माध्यम से बच्चों को डाक व्यवस्था के विकास और संचार के इतिहास में बमरौली की भूमिका को सराहा जा रहा है। कम से कम बच्चों को विज्ञान और ज्ञान पता होना चाहिए। 

चित्रों में छिपाई है मन की रचना

प्रदर्शनी में बच्चों ने पुराने postcards पर चित्र बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। यह भी हो सकता था कि कुछ नए चित्र लाए जाते और बच्चों को दिखाया जाता। अंतर्देशीय पत्र लिखे गए, जिन्हें डाक विभाग उनके परिजनों तक पहुंचाएगा। यह काम तो होता ही था, किंतु अब इसकी जरूरत नहीं है। हमार विज्ञान आगे हो चुका है। इसलिए प्रदर्शनी महत्वपूर्ण रही है। जो चीज हमसे दूर हो रही है,उसका ज्ञान देना जरूरी है।

यह गतिविधि इतिहास बन चुके कार्याें की जानकारी देता है। हमें हमारी तरक्की का सफर समझाता है। कभी हम पोस्टकार्ड से सभी तरह की खबरें देते थे। इनमें लगे चित्र निहारा करते थे। प्रदर्शनी ने बच्चों को भारत की समृद्ध डाक टिकट विरासत की झलक दिखाने के साथ सांस्कृतिक जागरूकता और हस्तलिखित पत्राचार के प्रति रुचि बढ़ाने का संदेश दिया। 

हमारा अतीत याद दिलाता है यह कार्ड

प्रदर्शनी को सिर्फ अच्छे चित्र देखना नहीं, इसे समझना भी है। यह गौरवपूर्ण अतीत है। यह हमारी प्रगति की गाथा है। पहल अतीत और वर्तमान के बीच एक सुंदर सेतु है। digital माध्यमों के बढ़ते उपयोग के दौर में भी हस्तलिखित पत्रों से जुड़ी आत्मीयता है। अपनापन और भावनात्मक संबंधों का महत्व है। इस आयोजन की प्रमुख विशेषता इसे समझ लेने के बाद ही पता चल सकता है।

digital युग तक का फासला पता चला

कार्यक्रम में विंग कमांडर देबार्थो धर, जनसंपर्क अधिकारी एवं प्रवक्ता, रक्षा मंत्रालय, प्रयागराज ने कहा अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने डाकघर को ऐतिहासिक कहते हुए आयोजित प्रदर्शनी के उद्देश्य बताए। नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध डाक विरासत और पारंपरिक संचार माध्यमों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि बमरौली की हवाई डाक सेवा से जुड़े इतिहास को प्रदर्शित करने के साथ बच्चों को पोस्टकार्ड पर चित्रकारी करने का सुनहरा मौका मिला है। इनको अपने परिजनों को पत्र लिखने का अवसर दिया गया। इसे इन्होंने पहले शायद किया हो। यह पहल बच्चों की रचनात्मकता और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने मददगार साबित हो रही है। इसके साथ digital युग में प्रवेश करने का फासला पता चल जाएगा। 

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