एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के भूमिगत हिस्से का ठेका

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने लखनऊ मेट्रो के फेज-1बी के तहत चारबाग से चौक तक भूमिगत सेक्शन के निर्माण के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को चुना है।
लखनऊ मेट्रो ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के अंडरग्राउंड सेक्शन का ऐलान

खबर विस्तार : -

लखनऊ: उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर यानी फेज-1बी के विकास में एक अहम पड़ाव तय कर लिया है। इस परियोजना के अंतर्गत चारबाग मेट्रो स्टेशन से चौक मेट्रो स्टेशन तक लगभग 6.52 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से के डिजाइन और निर्माण के लिए एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे कम बोलीदाता के रूप में सामने आई है। इस कार्य के लिए कुल 1,632 करोड़ रुपये की लागत तय की गई है, जिसमें जीएसटी भी शामिल है।

टेंडर प्रक्रिया और कंपनियों की भागीदारी

इस महत्वपूर्ण सिविल कार्य के लिए आयोजित टेंडर प्रक्रिया में देश की पांच बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था। इनमें एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा सैम इंडिया प्रोजेक्ट्स, लार्सन एंड टुब्रो, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी और टाटा प्रोजेक्ट्स के नाम शामिल हैं। इस वित्तीय निविदा को 5 अक्टूबर 2026 को खोला गया था। लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी होने के बाद निर्माण एजेंसी को यह पूरा कार्य निर्धारित तीन साल की अवधि के भीतर करना होगा।

भूमिगत स्टेशन और निर्माण का दायरा

इस प्रोजेक्ट के दायरे में कुल सात भूमिगत मेट्रो स्टेशनों का निर्माण और उससे जुड़े अन्य सभी सिविल कार्य शामिल हैं। यह पूरा रूट शहर के अत्यंत घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, जो फेज-1बी के भूमिगत भाग का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। यूपीएमआरसी इससे पहले इस कॉरिडोर के पांच एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों के वायाडक्ट और वसंत कुंज डिपो के निर्माण के ठेके पहले ही आवंटित कर चुका है।

कुल लागत और निर्माण की रणनीति

यूपीएमआरसी लगभग 5,801 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है। इस पूरे मार्ग पर कुल 12 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें पांच एलिवेटेड और सात भूमिगत स्टेशन शामिल होंगे। तय समय-सीमा के भीतर यातायात सेवाओं को शुरू करने के लिए एलिवेटेड और भूमिगत दोनों ही हिस्सों पर एक साथ निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।

अधिकारियों के बयान और कनेक्टिविटी का महत्व

इस संबंध में यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने जानकारी देते हुए कहा, "ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पुराने और नए लखनऊ के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।" उन्होंने आगे बताया कि चारबाग से वसंत कुंज तक मेट्रो के विस्तार से पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले और ऐतिहासिक क्षेत्रों के करीब तेज, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिल सकेगी। इससे न केवल सड़क यातायात का दबाव कम होगा, बल्कि शहरी विकास को भी नई गति मिलेगी। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज-1बी) को शहर के पुराने और नए हिस्सों के बीच यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। घनी बसाहट वाले क्षेत्रों में सड़क मार्ग पर बढ़ते वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने और नागरिकों को एक आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली उपलब्ध कराने के लिए इस भूमिगत मेट्रो लाइन की रूपरेखा तैयार की गई है।

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