Lucknow : महापौर ने छठे वित्त आयोग के सामने रखीं पांच प्रमुख आवश्यकताएं

खबर सार :-

महापौर लखनऊ ने 7,603 करोड़ रुपये की मांग की है। उन्होंने छठे राज्य वित्त आयोग के समक्ष  पांच प्रमुख अपेक्षाएं रखी हैं। निगम का पक्ष रखते हुए महापौर ने कहा कि लखनऊ नगर निगम का क्षेत्रफल 310 से बढ़कर 568 वर्ग किलोमीटर हो गया है। नया क्षेत्र हर मामले में नया है। यहां पर सभी जरूरी जिम्मेदारियों निभानी हैं। इनके लिए पेयजल-सीवर व्यवस्था और मार्ग प्रकाश के लिए बजट की जरूरत है।
विस्तारित क्षेत्र बढ़ जाने से कम पड़ रहा बजट, Lucknow में बाढ़ से निपटने के करने होंगे प्रबंध

खबर विस्तार : -

लखनऊ, अभी पिछले दिनों ही लखनऊ के कई मोहल्लों में गोमती नदी का जल फैल गया था। घरों के अंदर तक पानी भर गया था। इसी दौरान बारिश भी हुई थी। यह पानी चारों तरफ फैला था। शहर के प्रमुख स्थानों तक बाढ़ का पानी इकट्ठा हो गया था। लोग अपने घरों से सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे थे। यह स्थिति कई सालों बाद आई है। हालांकि इसका सामना पूर्व में किया जा चुका है। अफसरो और पूर्व की महापौर ने भी इस दिशा में काम नहीं किया है।

देर से ही सही, लेकिन महापौर सही दिशा में चल रही

शहर के प्रभारी मंत्री भी साफ सफाई करके अपनी बात रख कर चले जाते रहे हैं। उन्होंने भी कभी लखनऊ में बाढ़ की आशंका पर बात नहीं किया है। परिणाम यह हुआ कि इस बार लोगों के घरों तक पानी पहुंच गया। अब इस फजीहत से निपटने के लिए कुछ ना कुछ तो कहना ही है। इसलिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में खर्च करने के लिए अतिरिक्त बजट की मांग की जा रही है। यद्यपि यह कार्य कई सालों पहले होना चाहिए था। देर से ही सही, लेकिन महापौर सही दिशा में चल रही हैं।

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यह प्रयास एक दशक में नहीं किए गए, वह अब किए जा रहे हैं। अभी भी लोग अपने घरों से बाहर रह रहे हैं। महापौर सुषमा खर्कवाल ने आज एक उच्च स्तरीय बैठक की। इसमें लखनऊ नगर निगम के विस्तारित क्षेत्र और गोमती नदी से सटे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने छठे राज्य वित्त आयोग से आग्रह किया है कि नगर निकायों को विभिन्न सहायता देने का आधार केवल जनसंख्या तक सीमित ना रखा जाए।

बल्कि क्षेत्रफल विस्तार आधारभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया जाए। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पिछले कई सालों से लखनऊ में अतिरिक्त बजट की जरूरत थी, क्योंकि 2019 के दौरान से विस्तारित क्षेत्र में कई ग्राम सभाएं लखनऊ में शामिल की गई।

3 सालों तक किसी अफसर ने नहीं कराए काम

 लेकिन वहां पर किसी प्रकार के कार्य नहीं किए गए। यहां तक की 3 सालों तक किसी प्रधान ने या नगर निगम के किसी अफसर ने उन इलाकों में कोई काम नहीं कराया। चुनाव के बाद जब यह क्षेत्र पूरी तरह से लखनऊ में शामिल हो गए तो उसके बाद भी 1 साल तक काम नहीं हो पाए हैं। वर्तमान में इन क्षेत्रों में हर जरूर चीज की आवश्यकता पड़ती है। यहां पर पानी बिजली सफाई स्वास्थ्य के अलावा रास्ते, नाली, सीवर, हर कार्य नगर निगम को करना ही है।

इसके लिए नगर निगम का धन पर्याप्त नहीं है। सरकार से बजट की मांग की गई है। मुख्य अतिथि के रूप में बैठक में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना छठी राज्य वित्त आयोग छठी राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष दीपक कुमार और आयोग के सदस्य आदि बैठक में मौजूद रहे। इसके साथ ही नए क्षेत्रों में सड़क, नाली, जल, निकासी, प्रकाश, स्वच्छता पार्क पेयजल सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता करनी है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कराया जाने वाला है काम

इसके अलावा नगर की सीमा में किसी भी क्षेत्र को शामिल करना केवल प्रशासनिक सीमा का विस्तार नहीं बल्कि वहां रहने वाले नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नगर निगम की जिम्मेदारी बनती है कि हाल ही में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की जो स्थिति रही है। वहां भी बहुत से काम कराए जाने हैं। महापौर ने गोमती नदी से सटे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का उल्लेख किया।

यहां पुनर्निर्माण जल निकासी के अलावा कई सुविधाओं की जरूरत बताई है लगभग 7603 करोड रुपए वित्तीय आवश्यकता का आकलन किया गया है। महापौर ने कहा है कि नगर निगम में शामिल नहीं इलाकों के नागरिकों को सुविधा मिल सके इसके लिए यह बेहद जरूरी है। नगर निगम का निर्धारित वित्तीय अंश दोगुना करने की मांग हुई। 15 वर्षों में जनसंख्या और क्षेत्रफल में हुई वृद्धि को देखते हुए पूर्व आयोग द्वारा निर्धारित वित्तीय अंश को दोगुना करने का आग्रह किया। विकास और मार्ग प्रकाश के लिए 2,184 करोड़ दिए जाएं मागे गए हैं। 

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